शी जिनपिंग को 2023 के बाद भी राष्ट्रपति बनाने की तैयारी

  • 26 फरवरी 2018
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Image caption 2013 में पहली बार चीन के राष्ट्रपति बने थी जिनपिंग

चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने संविधान से उस धारा को हटाने का प्रस्ताव दिया है जो किसी शख़्स को राष्ट्रपति के सिर्फ़ दो कार्यकाल देती है.

अगर यह प्रस्ताव पारित हो जाता है तो वर्तमान राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने कार्यकाल के बाद भी इस पद पर बन रहेंगे.

ऐसी अटकलें अक्सर लगाई जाती रही हैं कि शी जिनपिंग अपने राष्ट्रपति कार्यकाल को साल 2023 के बाद भी जारी रखना चाहते हैं.

दिवंगत माओ त्सेतुंग के बाद पार्टी कांग्रेस ने पिछले साल उन्हें सबसे शक्तिशाली नेता माना था.

उनकी विचारधारा को कांग्रेस के दौरान पार्टी के संविधान में शामिल किया गया था और सम्मेलन के दौरान उनका कोई उत्तराधिकारी नहीं चुना गया था.

1953 में पैदा हुए शी जिनपिंग के पिता कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापकों में से एक थे. 1974 में वह पार्टी में शामिल हुए और 2013 में राष्ट्रपति बनने से पहले उन्होंने पार्टी में अपनी पकड़ बनाई.

उनके कार्यकाल में आर्थिक सुधार, भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ भयंकर अभियान और राष्ट्रवाद में एक नई शुरुआत को देखा गया. उनके कार्यकाल में मानवाधिकारों को लेकर दमन भी देखा गया.

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क्या है यह कदम?

रविवार को इसकी घोषणा सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने की.

इसकी रिपोर्ट में कहा गया है, "चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति ने उस धारा को हटाने का प्रस्ताव दिया है जो चीनी जनवादी गणराज्य के राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति को लगातार दो कार्यकाल से अधिक सेवा करने का मौका नहीं देता है."

इसमें और अधिक जानकारियां नहीं दी गई थीं लेकिन पूरा प्रस्ताव बाद में जारी किया गया.

यह घोषणा बेहद सावधानीपूर्वक की गई है क्योंकि चीनी लोग सोमवार को चीनी नया साल मनाने के बाद काम पर लौटेंगे. शीतकालीन ओलंपिक के समापन समारोह में भी चीन केंद्र में है क्योंकि दक्षिण कोरिया के बाद 2022 में बीजिंग में यह खेल होने हैं.

पार्टी के केंद्रीय समिति के वरिष्ठ नेता सोमवार को बीजिंग में एक बैठक करने जा रहे हैं.

संसद में जाने से पहले यह प्रस्ताव 5 मार्च से शुरू हो रहे नेशनल पीपल्स कांग्रेस में रखा जाएगा.

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1990 में ख़त्म हुआ था प्रावधान

मौजूदा प्रणाली के अनुसार शी जिनपिंग को 2023 में अपना पद छोड़ना है.

10 साल तक पद पर बने रहने की परंपरा 1990 में शुरू हुई थी. उस समय दिग्गज नेता डेंग जियाओपिंग ने अराजकता को दोहराने से बचने की मांग की थी. इसके बाद माओ से पहले और बाद का युग माना जाता है.

शी जिनपिंग से पहले के दो पूर्व राष्ट्रपतियों ने इसी उत्तराधिकार की घोषणा का पालन किया लेकिन जिनपिंग के 2012 में ताकत में आने के बाद इन्होंने अपने नियम लिखने की तत्परता दिखाई.

यह अभी साफ़ नहीं है कि जिनपिंग कब तक सत्ता में रहेंगे लेकिन चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स के एक संपादकीय के अनुसार, बदलाव का मतलब नहीं है कि चीनी राष्ट्रपति का आजीवन कार्यकाल होगा.

अख़बार में कम्युनिस्ट पार्टी के अकादमिक और पार्टी सदस्य सू वेई के हवाले से कहा गया है कि यह एक महत्वपूर्ण निर्णय है क्योंकि चीन को 2020-2035 तक स्थिर, शक्तिशाली और सुसंगत नेतृत्व की ज़रूरत है.

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस की एशिया प्रशांत की क्षेत्रीय संपादक सीलिया हैटन कहती हैं कि इस घोषणा की उम्मीद की जा रही थी.

वह बताती हैं कि कम्युनिस्ट पार्टी का दशकों से चीन पर शासन रहा है और अब शी जिनपिंग सुर्ख़ियों में हैं और पार्टी पर छा गए हैं.

सीलिया बताती हैं कि शी जिनपिंग की तस्वीर पूरे देश में बोर्डों पर लगी हुई है और उनका आधिकारिक निकनेम 'पापा शी' शासकीय गीत में शामिल है.

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