'धरती के जहन्नुम' पर सीरियाई हवाई हमले जारी

  • 26 फरवरी 2018
हमले के बाद की तबाही इमेज कॉपीरइट EPA

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शुक्रवार को संघर्ष विराम का प्रस्ताव पारित होने के बावजूद, विद्रोहियों के ठिकानों पर सीरियाई सरकार के हवाई हमले जारी हैं. कहा जा रहा है कि ताज़ा हमले में सीरिया ने क्लोरीन जैसे रासायनिक हथियारों का भी इस्तेमाल किया है.

राजधानी दमिश्क के नज़दीक पूर्वी ग़ूटा में विद्रोहियों के ठिकाने पर सीरियाई बमबारी में पिछले एक हफ्ते के दौरान सैकड़ों लोग मारे गए हैं.

बीबीसी के मिडिल ईस्ट एडिटर जेरेमी बोवेन का कहना है कि सीरिया में लगभग सात साल से लड़ाई जारी है और इस दौरान सही मायनों में संघर्ष विराम शायद ही कभी हुआ है.

सीरिया संघर्षः सुरक्षा परिषद में संघर्ष विराम पर सहमति

सीरिया में घमासान जारी, संघर्ष विराम पर नहीं बनी सहमति

सीरियाई हवाई हमलों में एक हफ्ते में 500 से अधिक नागरिकों की मौत

'हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठ सकते'

इमेज कॉपीरइट Reuters

सीरिया के सहयोगी रूस का कहना है कि पूर्वी ग़ूटा में मौजूद जैश अल इस्लाम संघर्ष विराम का उल्लंघन कर रहा है.

रूस के दावे पर जैश अल इस्लाम के एक प्रवक्ता का कहना है कि जब सीरिया की सरकार ही संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव को नहीं मान रही है, तो हम भी अपने बच्चों के साथ हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठ सकते.

सीरिया ने ताज़ा हमला सुरक्षा परिषद में 30 दिन के संघर्ष विराम का प्रस्ताव पारित होने के कुछ ही घंटों बाद किया जिसमें हवाई हमलों के साथ ज़मीनी सैन्य कार्रवाई भी शामिल है.

रविवार को फ्रांस और जर्मनी ने रूस से कहा था कि वो सीरिया की सरकार पर संघर्ष विराम का सम्मान करने के लिए दबाव बनाए.

'धरती पर जहन्नुम'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटरेश ने पूर्वी ग़ूटा के हालात को 'धरती पर जहन्नुम' की तरह बताया है.

इस इलाके में बैरल बम और दूसरे तरह से गोलाबारी में बड़ी संख्या में लोग मारे गए हैं और लगभग चार लाख लोग संघर्ष वाले क्षेत्र में फंसे हुए हैं.

इमेज कॉपीरइट AFP

संघर्ष विराम के बावजूद सीरियाई कार्रवाई के बीच समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, ईरान ने कहा है कि वो संघर्ष विराम का पालन करेगा, लेकिन दमिश्क के आसपास अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा, क्योंकि ये इलाका संघर्ष विराम के दायरे में नहीं आता.

इमेज कॉपीरइट AFP GETTY

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

मिलते-जुलते मुद्दे