माओ के बराबर शी जिनपिंग को खड़ा करने की तैयारी शुरू

  • 4 मार्च 2018
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Image caption शी जिनपिंग के लिए संविधान में बदलाव हो सकता है

चीन की राजनीति में दो बड़ी घटनाएं आने वाले वक़्त की तस्वीर तय करने वाली हैं.

पहला, चीन की संसद की सालाना बैठक और दूसरा राजनीतिक सलाहकार परिषद की मीटिंग.

राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कार्यकाल को विस्तार देने के लिए इन दोनों अधिवेशनों की राजनीतिक पटकथा करीने से लिखी जा रही है.

इस साल संसद सबसे बड़े संवैधानिक बदलावों पर मुहर लगाने वाला है जिससे तहत शी जिनपिंग की ताक़त और बढ़ जाएगी.

साथ ही चीन में किसी व्यक्ति के सिर्फ़ दो बार राष्ट्रपति बनने के नियम को भी बदल दिया जाएगा.

मतलब ये कि शी जीवन भर के लिए सत्ता में बने रह पाएंगे और अपने वैचारिक दिशानिर्देशों को आगे बढ़ा सकेंगे. इसे 'शी जिनपिंग के विचार' के तौर पर दुनिया जानती है.

एक नज़र डालते हैं इन दोनों अधिवेशनों के संभावित घटनाक्रम पर.

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Image caption 5,000 से अधिक प्रतिनिधि लेंगे भाग

कौन कर रहा है बैठक?

नेशनल पीपल्स कांग्रेस (एनपीसी) चीन की वो संस्था है जिसे हम संसद कह सकते हैं और जिसका काम क़ानून बनाना है.

आप इसे ब्रिटेन के 'हाउस ऑफ़ कॉमंस' या अमरीका के 'हाउंस ऑफ़ रिप्रज़ेंटेटिव्स' की तरह मान सकते हैं.

संविधान के अनुसार, एनपीसी देश की सबसे ताक़तवर संस्था है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक इसे केवल एक 'रबर स्टैंप' मानते हैं.

यानी एनपीसी सिर्फ़ उस चीज़ को मंज़ूरी देता है जिसके लिए उसे निर्देश दिए जाते हैं. इस साल एनपीसी में 2,980 प्रतिनिधि हैं.

ये चीन के प्रांतों, स्वायत्त क्षेत्रों, केंद्र प्रशासित नगरपालिकाओं, हांगकांग और मकाऊ के विशेष प्रशासनिक क्षेत्र और सशस्त्र बलों का प्रतिनिधित्व करते हैं.

इसमें 742 महिला प्रतिनिधि हैं जो पिछले एनपीसी के मुकाबले 25 फ़ीसदी अधिक हैं और इसमें 438 जातीय अल्पसंख्यक भी हैं.

चाइनीज़ पीपल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ़्रेंस (सीपीपीसीसी) सबसे शक्तिशाली राजनीतिक सलाहकार संस्था है.

इसको आप 'हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स' या 'अमरीकी सीनेट' की तरह मान सकते हैं. सीपीपीसीसी का काम सलाह देने का है क्योंकि इसके पास कोई क़ानूनी शक्ति नहीं है.

फ़िलहाल सीपीपीसीसी में 2,158 सदस्य हैं जिसमें मनोरंजन, खेल, विज्ञान, व्यापार जगत समेत ग़ैरवामपंथी दलों के भी लोग होते हैं.

इन बैठकों को 'दो अधिवेशन' कहा जाता है जो एक से दो हफ़्ते के बीच चलते हैं. इस साल सीपीपीसीसी तीन मार्च से और एनपीसी पांच मार्च से शुरू होगी.

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Image caption शी जिनपिंग को माओ के समकक्ष लाया गया है

क्या उम्मीद की जा सकती है?

इन 'दो अधिवेशनों' का महत्व इसलिए है क्योंकि पांच साल में एक बार होने वाला कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस पिछले साल अक्तूबर में हुआ था और इसके बाद ये अधिवेशन हो रहे हैं.

कांग्रेस में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लिए अभूतपूर्व समर्थन को देखा गया था जो उन्हें देश के शीर्ष नेता माओत्से तुंग के बराबर खड़ा करता है.

इस बार एनपीसी क्या कर सकता है-

  • राष्ट्रपति शी जिनपिंग की राजनीतिक विचारधारा 'शी जिनपिंग विचार' को संविधान में शामिल करने की पुष्टि हो सकती है.
  • अगले पांच सालों के लिए चीन की नई सरकार की कार्य योजना की पुष्टि की जाएगी, यह शी जिनपिंग का राष्ट्रपति के रूप में दूसरा कार्यकाल होगा.
  • केवल दो बार ही राष्ट्रपति बनने की बाध्यता को भी हटाया जाएगा. इसका अर्थ है शी जिनपिंग 2023 के बाद भी अपने कार्यालय में बने रहेंगे.
  • एक शक्तिशाली भ्रष्टाचार रोधी एजेंसी बनाने के क़ानून को भी बहाल किया जाएगा.

'दो अधिवेशनों' के दौरान आर्थिक सुधारों की योजनाओं के साथ-साथ शी जिनपिंग के दो मुख्य बिंदु भ्रष्टाचार और पर्यावरण सुरक्षा भी केंद्र में रहेगा.

इस दौरान सीपीपीसीसी केंद्र और स्थानीय सरकारों की पिछली नीतियों की समीक्षा करेगा और भविष्य के लिए योजना तैयार करेगा.

चीन में आर्थिक सुधारों और अपने दरवाज़े दुनिया के लिए खोलने की 40वीं सालगिरह पूरी हो रही है. इस कारण 2018 में आर्थिक मुद्दे मुख्य केंद्र में होंगे.

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Image caption ग्रेट हॉल ऑफ़ द पीपल में होगा सीपीपीसीसी का अधिवेशन

क्या कोई विपक्ष भी होगा?

एशिया के सबसे बड़े राजनीतिक 'मूक अभिनय' कहे जाने वाले इन कार्यक्रमों में कुछ हैरतअंगेज़ घटनाएं होंगी, ऐसा नहीं है.

किन चीज़ों पर फ़ैसला होगा या किन पर चर्चा होगी यह कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा पहले से तय होगा. हालांकि, ऐसे कुछ उदाहरण हैं जब एनपीसी ने आपत्ति जताई है.

2006 में सरकार ने संपत्ति कर कानून को स्थगित कर दिया था जिसके बाद एनपीसी में इसको लेकर ज़बरदस्त बहस हुई थी.

चीन को आमतौर पर एक पार्टी वाला देश कहा जाता है, लेकिन यहां कम्युनिस्ट को छोड़कर कई और आधिकारिक पार्टियां हैं.

जो अधिकतर देश के अंदर और बाहर ख़ारिज की जा चुकी हैं. ये पार्टियां एनपीसी में सर्वसम्मति से वामपंथियों का समर्थन करती हैं.

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जिनपिंग की बढ़ती ताक़त और सोशल मीडिया पर विरोध

चीन में इसे कैसे दिखाया जा रहा?

चीन का सरकारी मीडिया इन अधिवेशनों को बड़े पैमाने पर तवज्जो दे रही है, लेकिन आप इसकी कहीं भी आलोचना नहीं सुन पाएंगे.

चाइना रेडियो इंटरनेशनल ने प्रशंसा करते हुए कहा है कि लंबे समय से इंतज़ार किए जा रहे संस्थानों के सुधार का मामला एनपीसी के एजेंडे में रहेगा.

बीजिंग स्थित चाइना फाइनैंस ऑनलाइन कहता है कि इस बैठक में टिकाऊ औद्योगिक विकास, बेल्ट एंड रोड योजना के फ़ायदे और ग़रीबी निवारण मुख्य बिंदु होंगे.

वहीं, अमरीका स्थित एनटीडीटीवी डॉट कॉम रिपोर्ट कहता है कि कई प्रांतों के याचिकाकर्ता भी अपनी शिकायतों को लेकर बीजिंग आ रहे हैं.

चीन में राष्ट्रपति के कार्यकाल की सीमा समाप्त करने को लेकर भी आलोचना हो रही है.

चीन के सरकारी मीडिया संस्थान यूथ डेली के पूर्व संपादक ने कानून निर्माताओं को खुला पत्र लिखकर कहा है, "यह पार्टी और राष्ट्र में किसी एक व्यक्ति को बैठने से रोकने के लिए सबसे प्रभावी कानूनी प्रतिबंध है."

उन्होंने बीबीसी से कहा कि इस तरह का क़दम भविष्य में चीनी इतिहास के एक मज़ाक के तौर पर समझा जाएगा.

केवल दो बार राष्ट्रपति बनने का क़ानून संविधान में 1982 में शामिल किया गया था.

(रिपोर्टिंग: तिलक झा, बीबीसी मॉनिटरिंग)

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