पाकिस्तानी सीनेटर चुनी जाने वाली हिंदू महिला

  • 4 मार्च 2018
कृष्णा कोहली
Image caption कृष्णा का संबंध थर के ज़िला नगरपारकर के एक गांव से है

पाकिस्तान के पिछड़े इलाक़े नगरपारकर के एक हिंदू परिवार से संबंध रखने वाली कृष्णा कुमारी सीनेटर बन गई हैं.

बीबीसी उर्दू से बात करते हुए कृष्णा ने बताया कि उनके माता-पिता को पता ही नहीं कि सीनेटर क्या होता है और उनका चुना जाना क्या मायने रखता है.

कृष्णा कोहली ने कहा कि उनके समुदाय के जो लोग उनके घर उन्हें मुबारकबाद देने के लिए आ रहे हैं उनसे उनके माता-पिता का यही कहना है कि उनकी बेटी को बहुत बड़ी नौकरी मिल गई है और वह जल्द इस्लामाबाद चली जाएंगी.

कृष्णा का कहना है कि उनके घर वाले और उनके समुदाय वाले बहुत ख़ुश हैं और मिठाई बांट रहे हैं.

देश की सीनेट में चुने जाने पर कृष्णा कुमार ने अपनी भावनाएं ज़ाहिर करते हुए कहा कि इतनी ख़ुशी हुई है कि इसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता.

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Image caption पिता के साथ कृष्णा कोहली

उनका कहना था कि उन्हें यह सब कुछ सपनों सा लग रहा है और वह कभी सोच भी नहीं सकती थीं कि वह सीनेटर के लिए चुनी जाएंगी. उनका कहना था, "मुझे अभी तक यक़ीन नहीं आ रहा है."

कृष्णा कोहली ने कहा कि शिक्षा हासिल करने के बाद उनकी ये सोच थी कि उन्हें कोई अच्छी नौकरी मिल जाएगी और वह अपने समुदाय की कुछ सेवा कर सकेंगी.

उन्होंने एम.ए. किया है और सामाजिक सेवा करती रहती हैं. उन्होंने कहा कि राजनीति में आने के बारे में जब भी वह सोचती थीं तो उन्हें यह ही ख़याल आता था कि कभी मौका मिला तो प्रांत की विधानसभा के लिए चुनाव लड़कर अपने इलाक़े के पिछड़े और ग़रीब लोगों के लिए कुछ करेंगी.

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सिंध प्रांत में हिंदू अल्पसंख्यकों की भील, कोहली, मीगावार और ओड जातियों से संबंध रखने वाले लोग काफ़ी ग़रीब हैं और उनमें साक्षरता दर भी काफ़ी कम है. सिंध के दूर-दूराज़ इलाकों में लड़कियों को उच्च शिक्षा दिलवाना एक अनहोनी वाली बात है.

इन इलाक़ों में ग़रीबी की वजह से लोगों में इतनी ताक़त ही नहीं होती कि वह बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए शहरों में भेज सकें.

कृष्णा कोहली अपने समुदाय के लोगों और ख़ासतौर पर औरतों के लिए कुछ करने के लिए दृढ़ संकल्प हैं और उनका कहना है कि क्योंकि वह जरनल सीट से चुनी गई हैं इसलिए वह ज़्यादा प्रभावी तरीक़े से काम कर सकती हैं.

कृष्णा कोहली को इस बात का पूरी तरह एहसास है कि सीनेटर का किरदार अधिकतर क़ानून निर्माण तक सीमित रहता है और वह संसद में अपने प्रांत की नुमाइंदगी करते हैं.

उन्होंने कहा कि सीनेट का प्लेटफॉर्म एक बड़ा प्लेटफॉर्म है और इसका इस्तेमाल करते हुए औरतों की शिक्षा और स्वास्थ्य का मुद्दा उजागर करते उन्हें हल किया जा सकता है.

कृष्णा का कहना है कि उन्हें अपने समुदाय के 80 फ़ीसदी से अधिक लोगों का समर्थन हासिल है और उनका अपने समुदाय के लोगों से क़रीबी संबंध हैं.

कृष्णा कुमारी की फ़ोन की रिंगटोन अपने वक़्त के प्रसिद्ध राष्ट्रीय गीत 'सोहणी धरती अल्लाह रखे क़दम क़दम आबाद' है.

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