वो दिन जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सुबक-सुबक कर रोये थे

  • 6 मार्च 2018
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रूस व्लादिमीर पुतिन को लगातार चौथी बार राष्ट्रपति चुनने की तैयारी कर रहा है. इस पद के लिए चुनाव आगामी 18 मार्च को होने है.

दुनिया की राजनीति में पुतिन सख्त और ताक़तवर नेता के रूप में जाने जाते हैं, पर उनके जीवन में एक वक्त ऐसा भी आया था जब वो सुबक-सुबक कर रोए थे.

और वो वक्त था जब पुतिन रूस के कार्यवाहक राष्ट्रपति बने थे. वो उस समय राष्ट्रपति बनने की दौड़ में शामिल थे.

बीबीसी के ग्रेबिएल गेटहाउस उस पल को याद करते हैं:

व्लादिमीर पुतिन के 18 साल के शासनकाल में कई बुरे दौर आए पर वो सबसे कमज़ोर उस समय पड़ गए थे जब एंतोली सोबचाक को दफनाया जा रहा था.

यह तारीख़ थी 24 फरवरी, 2000. इस दिन उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी.

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Image caption 1992 में पुतिन के साथ एंटॉने सोबचेक

एंतोली सोबचाक उनलोगों में शामिल थे जिन्होंने सोवियत संघ के खात्मे की लड़ाई लड़ी थी. ये वही थे जो रूसी खुफिया एजेंसी केजीबी में काम करने वाले एक अधिकारी व्लादिमीर पुतिन को राजनीति में लेकर आए थे.

यह कोई नहीं जानता कि उन्होंने यह फैसला क्यों लिया. लेकिन आज सोवियत सुरक्षा तंत्र का एक गुट रूस की सत्ता पर ऐसे राज कर रहा है, जिससे देश में लोकतंत्र महज नाम का रह गया है.

मार्च में होने वाले चुनाव में यूं तो आठ उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन पुतिन को 'मुख्य उम्मीदवार' माना जा रहा है और परिणाम पर कोई संदेह भी नहीं है.

एक प्रतिद्वंदी उम्मीदवार इसे "फ़र्जी चुनाव" बताती हैं. वो कहती हैं, "जैसे जुआ घर में एक गुट की हमेशा जीत होती है वैसे ही रूस के लोकतंत्र में जीत हमेशा पुतिन की ही होगी."

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Image caption चुनाव प्रचारः "सोबचाक, सत्य के लिए, आजादी के लिए"

एंतोली की बेटी किस तरफ?

ऐसा कहने वाली उम्मीदवार का नाम है- कसेनिया सोबचाक. ये कोई और नहीं एंतोली सोबचाक की बेटी हैं जिन्होंने पुतिन को 'राष्ट्रपति पुतिन' बनाया.

कसेनिया 36 साल की हैं. वो टीवी रियलिटी शो की होस्ट रह चुकी हैं और सत्ता के ख़िलाफ़ पत्रकारिता करती हैं. चुनाव में एक और उम्मीदवार अलेक्सी नवालनी को 'मुख्य प्रतिद्वंद्वी' बताने वाले उनके समर्थक कसेनिया को राष्ट्रपति भवन की कठपुतली बताते हैं.

अलेक्सी नवालनी को चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी गई है. समर्थकों को कहना है कि कसेनिया सोबचाक की पटकथा पुतिन ने तैयार की है ताकि चुनाव में विश्वसनीयता की हवा बनी रहे.

निश्चित तौर पर वो बिना पुतिन के अनुमति के नहीं चल रही हैं. रूस में लोकतंत्र इसी तरह काम करता है.

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Image caption कसेनिया सोबचाक और नारुसोवा के साथ व्लादिमीर पुतिन

क्या एंतोली की मौत में पुतिन का हाथ?

चलिए, कसेनिया को कुछ समय के लिए भूल जाते है और उनके पिता एंतोली सोबचेक की बात करते हैं. वो सेंट पीटर्सबर्ग के मेयर थे. पुतिन उनके सहायक थे.

ये दोनों एक दूसरे के काफी नजदीक थे. तभी सोबचेक सीनियर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और पुतिन ने उन्हें देश से भागने में मदद की थी. उन्होंने इसके लिए विशेष विमान की व्यवस्था की थी. यह 1990 के दशक की बात थी.

उन दिनों को याद कीजिये? रूस में अराजकता का माहौल था. राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन अक्सर नशे में रहते थे और शायद ही काम करते थे.

यही मौका था जब सोबचाक ने पुतिन को बोरिस येल्तसिन के उत्तराधिकारी के रूप में तैयार करने के बारे में सोचा. फिर अचानक, जैसे ही पुतिन राष्ट्रपति की दौड़ में पहली बार शामिल हुए, उनके दोस्त एंतोली सोबचाक की एक होटल के कमरे में मौत हो गई.

एंटोली उस समय 62 साल के थे. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत की वजह कार्डियेक अरेस्ट बताया गया, लेकिन हार्ट अटैक के कोई प्रमाण नहीं मिल सके. सोबचाक की विधवा ने अपने पति की मौत को लेकर संदेह जाहिर किया था.

मैं हाल ही में एंटोली की पत्नी ल्यूडमिला नारूसोवा से मिला था और उनसे पूछा था कि क्या उन्हें लगता है कि उनके पति की हत्या हुई थी. इस पर वो कुछ देर चुप रहीं फिर "हां" में जवाब दिया और फिर उन्होंने कहा, "मुझे नहीं मालूम."

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Image caption नारुसोवा के साथ पुतिन 2007 में एंटोली की कब्र पर गए थे

'इस लोकतंत्र में रहना खौफनाक है'

कुछ लोगों का मानना है कि एंटोली की मौत में पुतिन का हाथ था. क्या सोबचाक के पास उनके ख़िलाफ़ कुछ था? नारुसोवा इसमें पुतिन का हाथ होने से इनकार करती हैं.

फिर मैंने इसके बाद एंटोली के अंतिम संस्कार का वीडियो देखा.

पुतिन परेशान दिख रहे थे. उनकी आंखें लाल थी. जैसे ही उन्होंने ल्यूडमिला नारुसोवा को गले लगाए वो सुबक-सुबक कर रोने लगे.

पुतिन एक कलाकार नहीं है. न ही वो सार्वजनिक तौर पर अपनी भावनाओं का प्रदर्शन करते हैं. तो ऐसा मानना उचित था कि वो गहरे शोक में थे. या ये भी हो सकता है कि बात कुछ और हो, शायद वो अपराधबोध में हों.

नारुसोवा ने मुझसे कहा, "कुछ लोग थे जो पुतिन को सत्ता में लाने के लिए छल कर रहे थे."

अगर सोबचोक की हत्या हुई थी तो क्या ये उन धड़ों में किसी ने की थी जिन्हें डर था कि उनके मेंटोर का उन पर नियंत्रण हैं. शायद. और अगर ऐसा था तो क्या केजीबी के अफ़सर ने ये महसूस किया था कि उनके पुराने दोस्त 'प्रोजेक्ट पुतिन' में मारे गए थे. ये केवल शक था, लेकिन मैंने ऐसा सोचना शुरू कर दिया था.

मैंने नारुसोवा से उस मेडिकल जांच के बारे में भी पूछा जो उन्होंने की थी. इस पर पता चला कि वो उन्होंने उस मेडिकल रिपोर्ट को कभी सार्वजनिक नहीं किया और दस्तावेजों को रूस के बाहर सुरक्षित रखा है.

मैंने उन पर दबाव डाला. मैंने कहा, "ऐसा लगता है कि जैसे आपको कोई बीमा पॉलिसी मिली हो."

उन्होंने कहा, "आप इसे इस तरीके से देख सकते हैं."

मैंने पूछा, "क्या आप डरे हुए हैं, अपनी या अपनी बेटी की सुरक्षा के लिए?"

वो थोड़े देर के लिए रुक गईं. वो कहती हैं, "आप जानते हैं इस देश में जीना खौफनाक है. खासकर उनलोगों के लिए जो सत्ता के ख़िलाफ़ सोच रखते हैं. इसलिए शायद मैं डरी हुई हूं..."

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