इनके लिए किम-ट्रंप की मुलाक़ात से ज़्यादा अहम होगी ये मीटिंग

  • 9 मार्च 2018
दक्षिण और उत्तर कोरिया की सीमा इमेज कॉपीरइट Getty Images

तापमान -10 डिग्री था और दोपहर दो बजे उत्तर कोरिया बॉर्डर के बर्फ़ से ढके योंगाम-री गाँव में सड़कें वीरान और दुकानें खाली थीं.

बात पिछले साल दिसंबर की है. एक बड़े से कम्यूनिटी सेंटर के भीतर सात लोग बैठे सोजू (दक्षिण कोरिया की देशी शराब) पी रहे थे.

बातचीत का मुद्दा था पिछले साल दिसंबर में एक उत्तर कोरियाई सैनिक का भागकर दक्षिण आ जाना.

पेशे से इंजीनयर ली-किम सोक ने मुझे देखते ही पूछा, "क्या आप भी बॉर्डर पर ख़बर बनाने आए हैं"?

मैंने कहा, "तनाव वाला माहौल भी तो है. इसलिए पूरी दुनिया में इस बॉर्डर के बारे में बहुत कौतूहल है."

कहना भर था कि एकाएक, बेसमेंट में बने इस बंकरनुमा कम्यूनिटी सेंटर में उन सातों दक्षिण कोरियाई लोगों के ठहाके गूंजने लगे.

मुझे लगा, शायद नशे में हैं, लेकिन पता चला बहुत कम पी गई है.

गाँव की नगरपालिका के सदस्य बान-जुंग भी इसमें शामिल थे.

बोले, "सब बाहरी दुनिया का नाटक है. जो आज उत्तर और दक्षिण बन चुके हैं वो सभी एक ही कोरिया तो है. जब लगेगा इस कहासुनी में दिलचस्पी कम हो रही है अमरीकी राष्ट्रपति प्योंगयांग के शासक किम को बुलाकर समझा-बुझा देंगे".

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इस बात को पूरे तीन महीने हो चुके हैं और शुक्रवार तड़के अमरीका से आई ख़बर ने उस बातचीत को ताज़ा कर दिया.

उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने डोनल्ड ट्रंप को मुलाक़ात का न्यौता दिया है और अमरीकी राष्ट्रपति ने भी इस न्यौते को स्वीकार कर लिया है.

लैंडमाइंस का जाल और उम्मीदें

उधर, योंगाम री गाँव के बाद से ही उत्तर और दक्षिण के बीच का डिमिलिट्राइज़्ड ज़ोन (विसैन्यीकृत क्षेत्र) शुरू हो जाता है.

अनुमान है कि इस ज़ोन में दस लाख से भी ज़्यादा लैंडमाइन्स का जाल बिछा हुआ है.

इस ज़ोन में करीब पांच लाख से भी ज़्यादा दक्षिण कोरियाई सैनिक तैनात रहते हैं और बॉर्डर के एक किलोमीटर दूर तक सिर्फ़ टैंक और एंटी-मिसाइल तोपें दिखती हैं.

चाहे सीमा पर बसे लोग हों या वहां से घंटों दूर राजधानी सोल में रहने वाले आम कोरियाई वयस्क हों, उत्तर कोरिया के बारे में लगभग सभी की कुछ राय एक सी है:

* कोरियाई मूल के लोग एक ही हैं, चाहे इधर हो या सीमा पार.

* हमारी भाषा एक है, खान-पान समान हैं और पहनावा भी लगभग एक सा ही है.

* कोरियाई प्रायद्वीप पर जब से बाहरी ताकतों की बुरी नज़र पड़ी, हमारे झगड़े बढ़े, जंग तक हुई और आखिरकार बंटवारा हुआ.

* हमें आज भी दक्षिण कोरिया की मिनिस्ट्री ऑफ़ यूनिफिकेशन में भरोसा है कि आगे चल दोनों देश एक हो सकेंगे.

हालांकि दक्षिण कोरिया की स्थानीय मीडिया में किम जोंग-उन के 'आक्रामक तेवरों' या 'मिसाइल धमकियों' पर खबरें बहुत अहमियत नहीं देती हैं.

दक्षिण कोरिया की युवा पीढ़ी भी बड़े-बुज़ुर्गों की राय से पूरी तरह सहमत नहीं दिखी.

राजधानी सियोल के गंगनम इलाके में दर्जनों कैफ़े और पब है, गंगनम वही इलाक़ा है जो मशहूर 'गंगनम स्टाइल' गाने में दिखता है.

फ़र्क तो बहुत है

इन्हीं में से एक के बाहर, कॉलेज में पढ़ने वाले पार्क-जिम और उनकी गर्लफ्रेंड से मुलाक़ात हुई थी.

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उन्होंने बताया था, "उत्तर कोरिया और दक्षिण में अब ज़मीन-आसमान का फ़र्क है. हम डिज़िटल ऐज में हैं और वे फ़ैक्ट्री प्रोडक्शन में उलझे हुए हैं. हम स्पेस रिसर्च करते हैं और वे सिर्फ़ परमाणु मिसाइल की. दोनों रहें और दूसरे से कम मतलब रखें तो बेहतर".

ज़ाहिर है, उत्तर कोरिया में बाहरी दुनिया को जितनी दिलचस्पी है उतनी दक्षिण कोरिया में नहीं.

लंबे समय तक चली तल्ख़ी के बाद अमरीका ने किम जोंग उन से बातचीत करने पर रज़ामंदी ज़ाहिर की है और दक्षिण कोरिया के ज़्यादातर लोगों को इस पर कम ही ताज्जुब हुआ होगा.

क्योंकि जिस मुलाक़ात का इंतज़ार दक्षिण कोरिया को है वो है उसके राष्ट्रपति मून जे-इन और किम जोंग उन की.

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