उर्दू प्रेस रिव्यू: नवाज़ शरीफ़ ने किया बग़ावत का एलान

  • 11 मार्च 2018
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Image caption पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने संसद में अमरीका की आलोचना की है

पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते सबसे ज़्यादा जो ख़बर चर्चा में रही वो थी सीनेट चेयरमैन का चुनाव. इसके अलावा भारत प्रशासित कश्मीर और भारत से जुड़ी ख़बरें भी सुर्ख़ियों में रहीं.

लेकिन सबसे पहले बात करते हैं, पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ के एक बयान की. आसिफ़ का कहना है कि अमरीका चाहता है कि पाकिस्तान उसकी प्रॉक्सी बने लेकिन ऐसा कभी नहीं होगा.

अख़बार नवा-ए-वक़्त के मुताबिक़ ख़्वाजा आसिफ़ ने संसद में अपने भाषण में अमरीका की जमकर आलोचना की. अख़बार ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री के पूरे भाषण को छापा है.

अख़बार के मुताबिक़ ख़्वाजा आसिफ़ का कहना था कि समंदर के पार से आकर दुश्मन इस्लामी देशों में ख़ून की होली खेल रहा है और मुसलमान देशों के मुखिया दुश्मन के हाथों का खिलौना बने हुए हैं.

अमरीका पर सख़्त हमला करते हुए ख़्वाजा आसिफ़ ने कहा, "हमने मेड इन अमरीका जिहाद लड़ा और जिहादी बनाए. हमने अपना क्या हाल किया है हमें अपने गिरेबान में झांकना चाहिए. मरवाता कोई और है, क़त्ल करने का हथियार हमारे हाथों में होता है. मुसलमान देशों को दुश्मनों की ज़रूरत नहीं, क्योंकि मुसलमान देश किसी एक भी मुद्दे पर एकमत नहीं हुए हैं.''

ख़्वाजा आसिफ़ ने अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका की भूमिका पर भी उंगली उठाई.

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ख़्वाजा आसिफ़ का कहना था, "अफ़ग़ानिस्तान में दुनिया की 16 बेहतरीन सेनाएं मौजूद हैं लेकिन फिर भी 43 फ़ीसदी इलाक़े पर तालिबान का क़ब्ज़ा है और अमरीकी प्रशासन इसके लिए पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराता है.''

चरमपंथी संगठन हक़्क़ानी नेटवर्क को पाकिस्तानी समर्थन के आरोप को नकारते हुए ख़्वाजा आसिफ़ ने कहा कि अमरीका की अफ़ग़ानिस्तान में शांति बहाल करने की कोई मंशा नहीं है.

अमरीका पर हमला जारी रखते हुए उन्होंने कहा, "इस्लामिक स्टेट अफ़ग़ानिस्तान में सक्रिय है और हम सब जानते हैं कि इसे अफ़ग़ानिस्तान कौन लाया है.''

इस भाषण के दौरान उन्होंने भारत और भारत प्रशासित कश्मीर का भी ज़िक्र किया. उनका कहना था कि भारतीय सेना ने अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर 400 से ज़्यादा बार युद्धविराम का उल्लंघन किया है.

उनके अनुसार इस साल अब तक भारतीय फ़ायरिंग के कारण 18 पाकिस्तानी नागरिक मारे जा चुके हैं और पिछले साल भी 54 पाकिस्तानी नागरिक मारे गए थे. उन्होंने कहा कि सीमा पर तनाव कम करने के लिए पाकिस्तान लगातार कोशिश कर रहा है लेकिन इस मामले में भारत ने अभी तक कोई सकारात्मक रुख़ नहीं दिखाया है.

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Image caption इमरान ख़ान की पार्टी ने किसी को नहीं दिया समर्थन

सीनेट चुनाव का दंगल

अब बात पाकिस्तान के ऊपरी सदन सीनेट के चेयरमैन के चुनाव की.

अख़बार एक्सप्रेस लिखता है कि सीनेट के चेयरमैन के लिए जोड़-तोड़ जारी है. अख़बार के मुताबिक़ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी के प्रमुख इमरान ख़ान ने कहा है कि इस पद के लिए उनकी पार्टी ना तो मुस्लिम लीग (एन) का समर्थन करेगी और ना ही पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी का.

अख़बार के अनुसार इमरान ख़ान ने मांग की है कि चेयरमैन बलूचिस्तान और वाइस चेयरमैन फ़ाटा से होना चाहिए.

वहीं, अख़बार जंग लिखता है कि सीनेट चेयरमैन के पद के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं.

पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने सीनेट के चेयरमैन रज़ा रब्बानी को सर्वसम्मित से दोबारा चेयरमैन बनाए जाने की सिफ़ारिश की लेकिन पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने उनकी इस सलाह को ठुकरा दिया.

सोमवार को सीनेट के चेयरमैन और वाइस चेयरमैन का चुनाव होना है. शुक्रवार को 52 सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो गया. सोमवार को 52 नए सीनेटर शपथ लेंगे.

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नवाज़ बदलना चाहते हैं इतिहास

नवाज़ शरीफ़ ने कहा है कि पाकिस्तान में पिछले 70 सालों से ज़ुल्म हो रहा है और वो उसको रोकना चाहते हैं और उसके ख़िलाफ़ बग़ावत करना चाहते हैं.

अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार पंजाब प्रांत के बहावलपुर शहर में एक रैली को संबोधित करते हुए नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि पिछले 70 सालों में पाकिस्तान की नस्लों के साथ बहुत ज़ुल्म हुए हैं.

उनका कहना था, "पाकिस्तान उस वक़्त तक तरक़्क़ी नहीं कर सकता जब तक हम 70 साल के इतिहास को नहीं बदलेंगे. पाकिस्तान में 70 सालों से जो हो रहा है मैं उसके ख़िलाफ़ बग़ावत करता हूं. हमारे अगले 70 साल पिछले 70 सालों से बेहतर होने चाहिए. ये तभी मुमकिन है जब हमें अपने वोट पर किसी को भी डाका नहीं डालने देंगे.''

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