नेपाल विमान हादसाः पायलट और एटीसी की बातचीत यूट्यूब पर हुई अपलोड

  • 15 मार्च 2018
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नेपाल में सोमवार को दुर्घटनाग्रस्त हुए बांग्लादेश की निजी एयरलाइन 'यूएस-बांग्ला' के विमान के पायलट और काठमांडू एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल (एटीसी) के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग सार्वजनिक हो गई है.

किसी व्यक्ति ने यह बातचीत यूट्यूब पर अपलोड कर दी है, इस रिकॉर्ड बातचीत के आधार पर दुर्घटना के लिए ज़िम्मेदार दोषियों के बारे में कई तरह के सवाल-जवाब शुरू हो गए हैं.

किसी भी विमान दुर्घटना की जांच में पायलट और एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल के बीच होने वाली बातचीत सबसे अहम सबूत होती है.

सोमवार नेपाल में हुए विमान दुर्घटना के कुछ घंटों बाद ही यह रिकॉर्ड बातचीत उपलब्द्ध हो गई थी. इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहे हैं कि आखिर यह बातचीत यूट्यूब पर कैसे लीक हो गई.

बातचीत रिकॉर्ड करना ग़ैरक़ानूनी

भारत के शौकिया रेडियो ऑपरेटर जिन्हें आम भाषा में हैम ऑपरेटर भी कहा जाता है, उनके अनुसार एटीसी और पायलटों के बीच होने वाली बातचीत बहुत-सी वेबसाइटों के ज़रिए रिकॉर्ड, अपलोड और सुनी जाती है.

ऐसी ही एक वेबसाइट जिससे रिकॉर्ड बातचीत को लेकर यूट्यूब पर अपलोड किया गया, उस वेबसाइट को देखने पर मालूम चलता है कि उसमें दुनिया के कई हिस्सों में एटीसी और पायलट के बीच होने वाली बातचीत मौजूद है.

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उस वेबसाइट का दावा है कि वे इन रिकॉर्ड बातचीतों को सुनने के लिए अपने वॉलंटियर्स से साइट पर आने की अपील करते हैं.

हैदराबाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ अमेच्योर रेडियो के निदेशक एस राममोहन का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय टेलीकॉम यूनियन यानि आईटीयू के नियमों के मुताबिक़ इस तरह की बातचीत को आम लोगों के बीच उपलब्द्ध करवाना ना सिर्फ़ भारत में बल्कि पूरे विश्व में ग़ैरक़ानूनी है.

उन्होंने आगे बताया, ''अगर कोई बहुत ऊंची फ़्रीक्वेंसी वाले रेडियो उपकरण का इस्तेमाल कर रहा है और वह उस समय एटीसी के नज़दीक है तो ऐसा हो सकता है कि पायलट और एटीसी के बीच होने वाली बातचीत उसके उपकरण की पहुंच में भी आ जाए. कई बार ऐसा हमारे साथ भी होता है, लेकिन उस बातचीत को रिकॉर्ड करना और फिर आम जनता के लिए अपलोड कर देना, इस पर पूरी तरह रोक है.''

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कैसे की जाती है यह रिकॉर्डिंग?

भारतीय हैम ऑपरेटर के अनुसार काठमांडू एयरपोर्ट से 30-40 किलोमीटर की रेंज में रहने वाले किसी व्यक्ति ने ही यह रिकॉर्डिंग की होगी.

पश्चिम बंगाल रेडियो ऑपरेटर क्लब के सचिव अम्बरीश नाग बिस्वास का कहना है, ''विमानन संचार प्रणाली एक सीधी रेखा में होने वाला संचार है. इस संचार को प्राप्त करने के लिए एंटीना का उस रेखा में होना ज़रूरी है. अगर आपके पास ऊंची फ़्रीक्वेंसी वाला रेडियो उपकरण है और वह उसकी लाइन ऑफ़ साइट में आता है तो 70 किलोमीटर की दूरी से भी एटीसी और पायलट की बातचीत सुनी जा सकती है.''

नाग बिस्वास ख़ुद एक लाइसेंस प्राप्त हैम ऑपरेटर हैं, वे कोलकाता एटीसी के नज़दीक रहते हैं और कई बार पायलट और एटीसी की बातचीत सुन लेते हैं.

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
काठमांडू एयरपोर्ट पर लैंडिंग के वक़्त विमान क्रैश

आखिर ये बातचीत सुनी कैसे जाती है और फिर रिकॉर्ड कैसे होती है. इस बारे में नाग बिस्वास बताते हैं, ''सॉफ्टवेयर डिफ़ाइंड रेडियो (एसडीआर) नामक एक सिस्टम होता है. यह कम्प्यूटर और लाइव इंटरनेट कनेक्शन के ज़रिए काम करता है. इसके अलावा एंटीना भी ज़रूरी होता है. इन सभी उपकरणों के बाद अगर एसडीआर सिस्टम चालू है तो कम्प्यूटर अपने आप ही एटीसी और वहां से गुज़रने वाले विमानों के पायलटों की बातचीत को रिकॉर्ड करने लगेगा. कई बार लोग अपनी मौज-मस्ती के लिए इन बातचीतों को रिकॉर्ड कर लेते हैं, लेकिन यह करना ग़ैरक़ानूनी है.''

यहां तक कि जो वेबसाइट इन बातचीत को सुनाती है वह भी इस बारे में साफ़-साफ़ लिखती है कि इसका मक़सद सिर्फ़ मनोरंजन करना और ट्रेनिंग प्राप्त करना है. इन रिकॉर्डिंग्स का इस्तेमाल विमानन सेवा या किसी जांच के मकसद से नहीं किया जा सकता.

नेपाल विमान दुर्घटना के पायलट और एटीसी की बातचीत सार्वजनिक होने के बाद सोमवार से ही सोशल मीडिया पर यह बहस भी चल रही है कि आखिर इस दुर्घटना के लिए कौन ज़िम्मेदार है.

हालांकि जांचकर्ता सिर्फ़ ग़ैरक़ानूनी तरीके से रिकॉर्ड हुई इस बातचीत को ही आधार मानकर अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकते. उन्हें अपनी जांच पूरी करने के लिए एटीसी के साथ हुई मुख्य रिकॉर्डिंग और दुर्घटनाग्रस्त विमान के ब्लैक बॉक्स का सहारा लेना होगा.

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