उत्तर कोरिया के मंत्री गुपचुप स्वीडन क्यों पहुंचे?

  • 16 मार्च 2018
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Image caption उत्तर कोरियाई विदेश मंत्री री योंग हो गुरुवार को स्वीडन पहुंचे

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के बीच संभावित मुलाक़ात से पहले उत्तर कोरिया के विदेश मंत्री ने स्टॉकहॉम में स्वीडन के प्रधानमंत्री स्टेफ़ान लूवेन से मुलाक़ात की है.

उत्तर कोरिया ने कहा है कि री योंग हो का दौरा द्विपक्षीय रिश्तों और आपसी मुद्दों के लिए था. हालांकि, अमरीका और उत्तर कोरिया के बीच मध्यस्थता का स्वीडन का एक लंबा इतिहास रहा है.

री योंग ने पहले ही स्वीडन की विदेश मंत्री मार्गोट वेलस्ट्रेम से गुरुवार देर रात और शुक्रवार सुबह को मुलाक़ात की थी.

स्वीडन की विदेश मंत्री ने कहा था कि उनकी चर्चा दोनों कोरिया राष्ट्रों के बीच तनाव और उत्तर कोरिया में अमरीका की ओर से स्वीडन के राजनयिक कार्य पर आधारित थी.

स्वीडन के एसवीटी न्यूहेटर की रिपोर्ट के अनुसार, री का दौरा केवल दो दिन का था जो अब बढ़ चुका है और वह रविवार तक स्वीडन में रुकेंगे.

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Image caption ट्रंप और किम जोंग उन की मुलाक़ात कब होगी यह अभी साफ़ नहीं है

'स्वीडन मध्यस्थता को तैयार'

एक न्यूज़ वेबसाइट का कहना है कि बातचीत का एजेंडा काफ़ी लंबा हो गया है. इसमें से कुछ विषय अमरीका के साथ विश्वास बनाना और उत्तर कोरिया के हिरासत केंद्रों से अमरीकी नागरिकों को रिहा करना भी बताया जा रहा है.

पिछले सप्ताह किम की तरफ़ से भेजे गए बातचीत के न्यौते को डोनल्ड ट्रंप ने स्वीकार कर लिया था. यह उन दो नेताओं द्वारा एक चौंकाने वाला फ़ैसला था जो एक-दूसरे का कई महीनों से अपमान कर रहे थे.

अमरीका को दक्षिण कोरिया के माध्यम से बातचीत का न्यौता भिजवाने के बाद उत्तर कोरिया की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.

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स्वीडन के प्रधानमंत्री ने देश की समाचार एजेंसी टीटी से कहा है कि "अगर मुख्य पार्टियां चाहती हैं कि स्वीडन एक बड़ी भूमिका अदा करे तो हम वह करने को तैयार हैं."

उन्होंने आगे कहा, "हम वह देश हैं जो सैन्य रूप से ग़ैर-गठबंधित हैं और हमारी उत्तर कोरिया में लंबी उपस्थिति रही है. विश्वास के साथ हम सोचते हैं कि हम अहम भूमिका अदा कर सकते हैं. लेकिन यह मुख्य पार्टियों पर है कि वह फ़ैसला लेंगे कि स्वीडन क्या भूमिका अदा करता है."

पद पर रहते हुए आज तक कोई भी अमरीकी राष्ट्रपति उत्तर कोरियाई नेता से नहीं मिला है.

परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों के बाद उत्तर कोरिया पर कई प्रतिबंध लग चुके हैं जिसके बाद उत्तर कोरिया में आम सहमति के बाद बातचीत की बात पर विचार किया गया है.

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स्वीडन ही क्यों?

उत्तर कोरिया के साथ स्वीडन के रिश्ते काफ़ी पुराने रहे हैं. 1970 में उत्तर कोरिया में स्वीडन पहला पश्चिमी राजनयिक मिशन था.

साथ ही पहली बार दुनिया में तटस्थ रहने की घोषणा भी स्वीडन ने ही की थी. इसके बाद संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन में उसने अहम भूमिका निभाई. नाटो के साथ भागीदारी में उसने अफ़ग़ानिस्तान सुरक्षाबलों के सहयोग के लिए अपने जवान भेजे थे.

गुट-निरपेक्ष नीति के तहत स्वीडन ने कई राज्यों के लिए राजनयिक संबंध बहाल करने का काम भी किया है.

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