चेक गणराज्य ने रूस के दावों को ख़ारिज किया

  • 18 मार्च 2018
रूस के पूर्व राजदूत और उनकी बेटी की हालत गंभीर बनी हुई है, दोनों अस्पताल में भर्ती हैं. इमेज कॉपीरइट EPA/ YULIA SKRIPAL/FACEBOOK
Image caption रूस के पूर्व राजदूत और उनकी बेटी की हालत गंभीर बनी हुई है, दोनों अस्पताल में भर्ती हैं.

चेक गणराज्य ने रूस के उन दावों को ख़ारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि पूर्व रूसी जासूस पर ब्रिटेन में हुए हमले में उसका हाथ हो सकता है. चेक गणराज्य के विदेश मंत्री मार्टिन स्ट्रॉपनिकी ने कहा कि ये आरोप बेतुके और कयासबाज़ी के अलावा और कुछ नहीं हैं.

ब्रिटेन में रूस के पूर्व राजदूत और उनकी बेटी को 4 मार्च को नर्व एजेंट के ज़रिये ज़हर देकर मारने की कोशिश की गई थी. अभी दोनों अस्पताल में भर्ती हैं और उनकी हालत गंभीर है. ब्रिटेन का आरोप है कि इस हमले के लिए रूस ज़िम्मेदार है और उसने ही नर्व एजेंट नोविचोक का इस्तेमाल किया.

हालाँकि रूस ने इन आरोपों से इनकार किया. लेकिन जब ब्रिटेन ने उसके 23 राजनयिकों को निष्कासित करने का ऐलान किया तो रूस ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इतने ही ब्रितानी राजनयिकों को रूस छोड़कर जाने के आदेश जारी कर दिए.

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Image caption ब्रिटेन ने पहले 23 रूसी राजनयिकों को निष्कासित किया था

रूस और यूरोशिया मामलों के जानकार जेम्स शर्र कहते हैं, ''अब मायने ये रखता है कि हम अपने नागरिकों को व्यावहारिक रूप से कितनी सुरक्षा दे पाते हैं. साथ ही वैध तरीके से यहाँ रह रहे लोगों को भी भरोसा दिला सकते हैं कि वे यहां महफूज़ हैं. इसके अलावा रूस इस बात पर भी करीबी नज़र रख रहा होगा कि कहीं ब्रिटेन, रूसी कंपनियों के ख़िलाफ़ तो कोई कदम नहीं उठा रहा.''

रूस और ब्रिटेन के बीच चल रहा शह और मात का ये खेल अभी यहाँ रुकने वाला नहीं है. रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जाख़ारोवा ने दावा किया है कि नर्व एजेंट नोविचोक बनाने के पीछे चेक गणराज्य, स्लोवाकिया, ब्रिटेन या स्वीडन का हाथ हो सकता है. उन्होंने दावा किया कि ये देश 1990 के दशक से ही इस नर्व एजेंट को बनाने पर काम कर रहे थे.

रूस की जनता में गुस्सा

रूस और ब्रिटेन के इन दावों में कितनी सच्चाई है, इस पर अभी कुछ कहना मुश्किल है, लेकिन राजनयिकों को निकालने की ब्रिटेन की कार्रवाई पर रूस की जनता में काफी गुस्सा है.

मास्को में रहने वाले बोरिस कहते हैं, ''ब्रिटेन की इस कार्रवाई का कड़ा जवाब दिया जाना चाहिए. न सिर्फ़ ब्रिटेन के 23 राजनयिकों को बल्कि रूस की धरती पर काम कर रहे ब्रिटेन, अमरीका और पूर्वी यूरोप के सभी खुफिया कर्मचारियों को बाहर निकाल देना चाहिए.''

हालाँकि ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो रूस और ब्रिटेन की इस तकरार को किसी के हित में नहीं मानते.

मास्को की रहने वाली नास्त्या का कहना है, ''मैं नहीं समझती कि ये किसी के लिए भी फ़ायदे की बात है. पता नहीं ये ब्रिटेन के हित में है या नहीं और क्या वो कोई सैन्य कार्रवाई शुरू करना चाहते हैं.''

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Image caption ब्रितानी प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे इस मामले में काफी कड़ा रुख़ अपना रही हैं

नर्व एजेंट के आक्रामक इस्तेमाल को लेकर ब्रिटेन रूस को किसी तरह की रियायत देने के मूड में नहीं है और यही वजह है कि उसने अमरीका, रूस, फ्रांस और जर्मनी के साथ संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि रूस के पास सफाई देने का विकल्प नहीं है.

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