सऊदी अरब का दूसरा सबसे अमीर आदमी जो क्राउन प्रिंस सलमान की क़ैद में है

  • 21 मार्च 2018
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सऊदी अरब में भ्रष्टाचार के आरोपों के नाम पर हिरासत में लिए गए कई शहज़ादों और कारोबारियों को भले ही रिहा कर दिया गया हो, लेकिन एक शख़्स अब भी क़ैद में हैं.

सऊदी बिज़नेसमैन मोहम्मद हुसैन अल अमौदी को फ़ोर्ब्स मैगज़ीन ने कभी दुनिया का सबसे अमीर काला आदमी कहा था.

मोहम्मद हुसैन अल अमौदी की ज़िंदगी में पिछले साल नवंबर महीने में उस वक्त एक बड़ा मोड़ आया जब उन्हें रियाद के रिट्ज़ कार्लटन होटल में कई सऊदी शहज़ादों और कारोबारियों के साथ हिरासत में ले लिया गया था.

साल 1946 में इथियोपिया में जन्मे अल अमौदी एक यमनी कारोबारी और इथियोपियाई मां के बेटे हैं. किशोर उम्र में ही वे सऊदी अरब आ गए थे और साठ के दशक में उन्होंने सऊदी नागरिकता ले ली.

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Image caption रियाद का रिट्ज़ कार्लटन होटल

पुराने निज़ाम से रिश्ते

फ़ोर्ब्स मैगज़ीन के मुताबिक़ मोहम्मद हुसैन अल अमौदी मार्च, 2014 में 15.3 अरब डॉलर की दौलत के मालिक थे और उनकी कंपनी में 40 हज़ार लोगों को रोज़गार मिला हुआ है. वे सऊदी अरब के दूसरे सबसे अमीर शख़्स हैं.

मोहम्मद हुसैन अल अमौदी के क़रीबी सहयोगी कहते हैं कि सऊदी अरब के रक्षा मंत्री रहे पूर्व क्राउन प्रिंस सुल्तान बिन अब्दुल अज़ीज़ के साथ उनके अच्छे रिश्ते थे.

पूर्व क्राउन प्रिंस सुल्तान बिन अब्दुल अज़ीज की मौत साल 2011 में हो गई थी. उस वक़्त मोहम्मद हुसैन अल अमौदी अपना बिज़नेस प्रिंस सुल्तान बिन अब्दुल अज़ीज़ और उनके ताक़तवर दोस्तों के पैसों से मैनेज करते थे.

अस्सी के दशक में मोहम्मद हुसैन अल अमौदी ने भूमिगत तेल भंडारण के कारोबार में कदम रखा. इसके अलावा कंस्ट्रक्शन से लेकर, इंजीनियरिंग, फ़र्नीचर और दवा के कारोबार में भी वे दखल रखते थे.

Image caption मोहम्मद हुसैन अल अमौदी की कंपनी स्टारबक्स की सबसे बड़ी कॉफ़ी सप्लायर है

इथियोपिया में दबदबा

इतना ही नहीं मोहम्मद हुसैन अल अमौदी इथियोपिया में ख़ासा दखल रखते थे.

विकीलीक्स के ज़रिए अमरीकी विदेश मंत्रालय के लीक हुए दस्तावेज़ों के मुताबिक़ मोहम्मद हुसैन अल अमौदी का नब्बे के दशक में इथियोपिया में इस कदर दबदबा था कि उन्हें कॉफ़ी से लेकर टूरीज़्म तक लगभग हर कारोबार में सरकारी संरक्षण हासिल था.

सऊदी अरब के मरहूम सुल्तान किंग अब्दुल्ला बिन अब्दुल अज़ीज़ भी मोहम्मद हुसैन अल अमौदी के ख़ासे मुरीद थे.

दरअसल, इथियोपिया में मोहम्मद हुसैन अल अमौदी का एक बड़ा एग्रीकल्चर प्रोजेक्ट चल रहा था और जिससे सऊदी अरब को चावल की सप्लाई की गारंटी मिली हुई थी.

सऊदी अरब में मोहम्मद हुसैन अल अमौदी की गिरफ़्तारी की प्रतिक्रिया इथियोपिया में भी हुई. सत्तारूढ़ पार्टी ने इसे एक नुक़सान बताया था तो वहां की विपक्षी पार्टी ने उनके हिरासत में लिए जाने पर असंतोष जाहिर किया था.

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क्यों बदल रहा है सऊदी अरब

वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी लॉ स्कूल के विज़िटिंग प्रोफ़ेसर हिनुक गबीसा कहते हैं कि इथियोपिया में मोहम्मद हुसैन अल अमौदी की मौजूदगी या गैरहाजिरी से बहुत फ़र्क़ पड़ता है.

प्रिंस अल वलीद बिन तलाल की तरह ही मोहम्मद हुसैन अल अमौदी भी क्लिंटन फ़ाउंडेशन को लाखों डॉलर चंदा देते हैं.

पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन मोहम्मद हुसैन अल अमौदी के प्राइवेट जेट से साल 2011 में इथोपिया का दौरा कर चुके हैं. इसे लेकर अमरीका में बहस भी छिड़ी थी.

वो पहला मौका नहीं था जब मोहम्मद हुसैन अल अमौदी को लेकर अमरीका में विवाद हुआ था. वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले के तीन साल बाद मोहम्मद हुसैन अल अमौदी पर चरमपंथी गतिविधियों के लिए पैसा मुहैया कराने का आरोप लगा था.

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