क्या अमरीका और चीन कारोबारी जंग की तरफ़ बढ़ रहे हैं!

  • 22 मार्च 2018
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अमरीका की डोनल्ड ट्रंप सरकार चीन पर प्रतिबंध लगाने की योजना बना रही है क्योंकि उसे लगता है कि चीन अमरीका की बौद्धिक सम्पदा की चोरी कर रहा है.

ट्रंप प्रशासन ने गुरुवार को कहा कि ये कदम इसलिए उठाना पड़ रहा है क्योंकि इस मुद्दे पर सालों तक बातचीत के बाद भी कोई बदलाव नहीं आया है.

इस कार्रवाई में बाक़ी चीज़ों के साथ-साथ चीन पर टैरिफ़ भी लगाया जा सकता है. चीन का कहना है कि वह भी जवाब देने के लिए तैयार है.

अमरीकी मीडिया की ख़बरों के मुताबिक ट्रंप सरकार चीन पर 30-60 अरब डॉलर के शुल्क और चीन के निवेश पर नियंत्रण लगाने के बारे में सोच रही है.

अमरीका अपनी शिकायतें विश्व व्यापार संगठन में भी ले जा सकता है.

अमरीका के लिए व्यापारिक मध्यस्थता करने वाले रॉबर्ट लाइटहाइज़र ने बुधवार को सांसदों को बताया कि अमरीका की मंशा चीन पर अधिकतम दबाव बनाने और अमरीकी उपभोक्ताओं पर कम से कम दबाव रखने की है.

रॉबर्ट लाइटहाइज़र ने कहा कि बौद्धिक संपदा को सुरक्षित रखना अमरीकी अर्थव्यवस्था के लिए बहुत ज़रूरी है.

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क्यों लगाया जाएगा टैरिफ़?

अमरीकी व्यापार विभाग के अधिकारी ने कहा, "अमरीका के पास सबूत हैं कि चीन ऐसे अमरीकी फ़र्म की तलाश में है जो उनके साथ पार्टनरशिप कर चीन के बाज़ार में उतर सके और फिर अमरीका पर तकनीक भेजने का दबाव बनाया जा सके."

"अमरीका को इस बात के भी सबूत मिले हैं कि चीन अमरीका के महत्वपूर्ण उद्योगों में निवेश को नुक़सान पहुंचा रहा है और साइबर अटैक भी करवाता है."

ये सब बातें उस जांच से सामने आई हैं जिसके आदेश राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले साल अगस्त में दिए थे.

व्यापार क़ानून के सेक्शन 301 के हिसाब से सरकार के पास अधिकार है कि वह उन देशों पर एकतरफ़ा प्रतिबंध लगा सकती है जो व्यापार में गड़बड़ी कर रहे हैं.

डोनल्ड ट्रंप ने चीन के मुकाबले अपने व्यापार घाटे को लेकर कई बार आवाज़ उठाई है.

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चीन ने क्या कहा?

गुरुवार को चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि वह भी इन नए शुल्कों का जवाब देने के लिए तैयार है.

"चीन चुपचाप बैठकर अपने हक़ और हितों का नुक़सान होते नहीं देखेगा और इनके बचाव के लिए हर ज़रूरी कदम उठाएगा."

वॉल स्ट्रीट जरनल के मुताबिक चीन भी अमरीका पर शुल्क लगाकर इसका जवाब देने की सोच रहा है.

इसका मतलब है कि चीन अमरीका के कृषि आयात पर भी शुल्क लगा सकता है. कृषि प्रधान राज्यों में डोनल्ड ट्रंप का वोट बेस है.

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Image caption रॉबर्ट लाइटहाइज़र

क्या अमरीका में इस फैसले के लिए समर्थन है?

अमरीका में ये चिंता बढ़ रही है कि चीन तकनीक इसलिए खोज रहा है ताकि उसका इस्तेमाल सैन्य कार्रवाई के लिए कर सके.

अमरीकी संसद क़ानून लाने की भी तैयारी कर रही है जिससे सरकार की विदेशी व्यापार सौदों को जांचने की शक्ति बढ़ेगी क्योंकि हाल ही में अमरीकी कंपनियों के विदेशी खरीदारों के ज़रिए अधिग्रहण का ख़तरा बढ़ गया है.

लेकिन कई राजनेताओं, उद्योगों और व्यापारियों ने इस फ़ैसले का विरोध होने की भी चिंता जताई है.

सांसद एरिक पॉलसन ने रॉबर्ट लाइटहाइज़र से कहा, "मैं बिल्कुल चीन के बौद्धिक संपदा के उल्लंघन को रोकने और उन्हें ज़िम्मेदार ठहराने के पक्ष में हूं, लेकिन हमें सिर्फ़ उसी पर केंद्रित होना चाहिए जो हम चीन में बदलते देखना चाहते हैं, ख़ुद के पैर पर कुल्हाड़ी नहीं मारनी चाहिए."

लाइटहाइज़र ने माना कि जवाबी कार्रवाई भी हो सकती है और ख़ासकर अमरीका के कृषि उद्योग पर इसका असर पड़ सकता है. लेकिन उन्होंने कहा कि अमरीका फिर भी कार्रवाई करने से नहीं चूकेगा.

"मुझे नहीं लगता कि इस आशंका की वजह से हम अपनी बौद्धिक संपदा के लिए कदम नहीं उठाएंगे, लेकिन हम हर चीज़ को उचित तरीके से सोच-विचार कर करने की कोशिश कर रहे हैं."

"अगर चीन जवाबी कार्रवाई करेगा तो अमरीका अपने किसानों के साथ खड़ा होने के लिए कदम उठाएगा."

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ट्रंप ने अब तक व्यापार क्षेत्र में क्या कदम उठाए?

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने मार्च में एक विवादास्पद फ़ैसले पर मुहर लगाई जिसके बाद स्टील और एल्यूमीनियम के आयात पर दूसरे देशों को शुल्क देना पड़ेगा. कनाडा और मेक्सिको को इससे छूट दी गई है. यूरोपीय संघ भी छूट मिलने की उम्मीद में बैठा है.

जनवरी में ट्रंप ने वॉशिंग मशीन और सोलर पैनलों के आयात पर भी टैक्स लगाए जिससे चीन और दक्षिण कोरिया में नाराज़़गी बढ़ी. इसके अलावा 12 देशों के मुफ्त व्यापार सौदे की पार्टनरशिप से भी अमरीका को बाहर खींच लिया.

साथ ही कनाडा और मेक्सिको के साथ नॉर्थ अमरीकन फ़्री ट्रेड एग्रीमेंट (एनएएफटीए) पर भी दोबारा समझौता किया जा रहा है जिसे लेकर ट्रंप कहते रहे हैं कि ये अमरीका में मैन्युफ़ैक्चरिंग क्षेत्र में नौकरियां कम करने का कारण रहा है.

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क्या व्यापार युद्ध हो सकता है?

चीन ने पहले कहा है कि व्यापार युद्ध में किसी की जीत नहीं होगी.

उसने दोनों देशों को शांति बनाए रखने के लिए भी कहा था और इस बात के संकेत दिए थे कि वह अमरीका की संतुष्टि के लिए उम्मीद से ज़्यादा बदलाव करने को तैयार है.

ट्रंप ने एक बार ट्वीट किया था कि व्यापार युद्ध अच्छे हैं और उन्हें जीतना भी आसान है.

लेकिन अमरीका की वित्त सचिव स्टीवन न्यूचीन ने कहा कि राष्ट्रपति व्यापार युद्ध शुरू करने की कोशिश नहीं कर रहे हैं.

रॉयटर्स न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक अमरीका की इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की सबसे बड़ी कंपनी 'बेस्ट बाय' ने चीन की कंपनी ह्युवेई से स्मार्टफ़ोन खरीदने बंद कर दिए हैं.

इसके बाद दूसरी टेलीकॉम कंपनियों एटीएंडटी और वेरीज़ोन ने भी ह्युवेई से संबंध खत्म कर लिए जब अमरीका ने चीन सरकार से उसकी क़रीबी पर चिंता जताई.

बेस्ट बाय ने इन दावों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है.

इस बीच बुधवार को विश्व व्यापार संगठन ने कहा कि अमरीका ने उसके चीनी उत्पादों पर एंटी-सब्सि़डी टैरिफ़ के फ़ैसले पर अब तक पूरी तरह अमल नहीं किया है.

चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि विश्व व्यापार संगठन के फ़ैसले के बाद ये साबित हो गया कि अमरीका ने डब्लूटीओ के नियमों का बार-बार उल्लंघन किया है और व्यापार मामलों के निवारण के लिए बने नियमों का ग़लत इस्तेमाल किया है.

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