उर्दू प्रेस रिव्यू: पाकिस्तान की परेड में पहली बार शामिल हुआ भारत, संदेश क्या

  • 25 मार्च 2018
पाकिस्तान का राष्ट्रीय दिवस इमेज कॉपीरइट NARINDER NANU/AFP/Getty Images

पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते विवादास्पद पुलिस अधिकारी राव अनवार की गिरफ़्तारी, पाकिस्तान का 'नेशनल डे' और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का बयान सुर्ख़ियों में रहा.

पाकिस्तान हर साल 23 मार्च को अपना 'नेशनल डे' (राष्ट्रीय दिवस) मनाता है.

साल 1940 को इसी दिन मुस्लिम लीग पार्टी ने लाहौर में एक प्रस्ताव पास किया था जिसमें भारत से अलग एक आज़ाद देश बनाने की बात कही गई थी जिसे बाद में पाकिस्तान का नाम दिया गया था.

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राष्ट्रीय दिवस पर हुई ख़ास पहल

अख़बार 'एक्सप्रेस' के मुताबिक़ 78वें 'नेशनल डे' के मौके पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने भारत का नाम लिए बग़ैर कहा कि एक पड़ोसी मुल्क के ग़ैर-ज़िम्मेदाराना रवैये से पूरे क्षेत्र की शांति दाव पर लग गई है.

उन्होंने कहा, "शांति की इच्छा को हमारी कमज़ोरी न समझा जाए. पाकिस्तान कश्मीरियों की हिमायत (समर्थन) जारी रखेगा. आज़ादी की तहरीक (आंदोलन) को ताक़त के बल पर नहीं दबाया जा सकता."

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पाकिस्तानी सेना

अख़बार 'जंग' के मुताबिक़ पाकिस्तान विदेश विभाग के प्रवक्ता मोहम्मद फ़ैसल ने ट्वीट कर कहा है कि भारत ने अगर कोई ग़ैर-ज़िम्मेदाराना क़दम उठाया तो पाकिस्तान उसका मुनासिब जवाब देगा.

एक तरफ़ जहां पाकिस्तानी नेताओं ने अपने राष्ट्रीय दिवस के मौक़े पर भारत के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी की वहीं दूसरी तरफ़ पाकिस्तानी सेना ने दोनों देश के बीच संबंध सुधारने के लिए एक अनोखा क़दम उठाया.

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क्षेत्र में शांति

अख़बार 'एक्सप्रेस' के अनुसार इस्लामाबाद परेड ग्राउंड में हुए पाकिस्तानी सेना की परेड में भारतीय उच्चायोग के राजनयिकों और आला अधिकारियों को भी बुलाया गया था.

अख़बार के अनुसार पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा की निजी इच्छा पर भारतीयों को परेड में शामिल होने की दावत दी गई थी.

अख़बार का कहना है कि दोनों देशों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है.

अख़बार के अनुसार इस क़दम से पाकिस्तान ने भारत को संदेश देने की कोशिश की है कि वो क्षेत्र में शांति चाहता है.

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Image caption पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश साक़िब निसार

चीफ़ जस्टिस का बयान

इस अवसर पर पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश साक़िब निसार का बयान भी सारे अख़बारों में छाया हुआ है.

अख़बार 'दुनिया' के अनुसार मुख्य न्यायाधीश साक़िब निसार ने एक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि उनके होते हुए सिर्फ़ क़ानून का राज चलेगा और तानाशाही के बारे में कोई सपने में नहीं सोच सकता.

उनका कहना था, "मुल्क में सिर्फ़ एक ही शासन प्रणाली है और वो है लोकतंत्र, लोकतंत्र और सिर्फ़ लोकतंत्र. इसे पटरी से नहीं उतरने देंगे."

पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों को विश्वास दिलाते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "अल्पसंख्यक न्यायपालिका की जान हैं जिनके अधिकारों की सुरक्षा हमारी ज़िम्मेदारी है."

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Image caption पुलिस अधिकारी अनवार राव

पुलिस अधिकारी राव अनवार की गिरफ़्तारी

दो महीने से फ़रार सिंध पुलिस के पूर्व एसएसपी ने आख़िरकार बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सरेंडर किया जिसके फ़ौरन बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया.

राव अनवार पर आरोप है कि उन्होंने कराची में 27 साल के नक़ीबुल्लाह महसूद और उनके तीन साथियों को तालिबान चरमपंथी बताकर फ़र्ज़ी मुठभेड़ में मार दिया था.

लेकिन जब नक़ीबुल्लाह के परिवार वालों ने विरोध प्रदर्शन किया तो जांच हुई जिसमें नक़ीबुल्लाह को बेगुनाह पाया गया.

अदालत ने उनके ख़िलाफ़ वॉरंट जारी किया, लेकिन वो दो महीने से फ़रार थे.

अख़बार 'जंग' के मुताबिक़ उन्हें गिरफ़्तार कर कराची ले जाया गया है. 58 साल के राव अनवार ने अपने 35 साल के पुलिस करियर में 444 लोगों को मुठभेड़ में मारा है.

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Image caption नक़ीबुल्लाह महसूद

हुसैन हक़्क़ानी के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज

'रोज़नामा ख़बरें' के अनुसार मेमोगेट मामले में पाकिस्तान ने अमरीका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत रह चुके हुसैन हक़्क़ानी को अमरीका से गिरफ़्तार कर पाकिस्तान लाने के लिए इंटरपोल से मदद मांगी है.

हक़्क़ानी पाकिस्तान नहीं जाते हैं, लेकिन वो भारत समेत दुनिया भर के कई देशों में आज़ादी के साथ घूमते हैं.

लेकिन अब पाकिस्तान ने उनकी गिरफ़्तारी के लिए मुहिम तेज़ कर दी है.

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