नेटो ने निष्कासित किए सात रूसी राजनयिक

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नेटो के महासचिव येंस स्टोलटेनबर्ग ने सात रूसी राजनयिकों के निष्कासन की घोषणा की है.

उन्होंने कहा है कि तीन अन्य रूसी राजनयिकों की मान्यता की अर्ज़ी भी ख़ारिज कर दी गई है और ये फ़ैसला रूस को ये स्पष्ट संदेश देने के लिए किया गया है कि रूस जो व्यवहार कर रहा है उसे उसकी क़ीमत चुकानी पड़ेगी.

नेटो के इस फ़ैसले से पहले 27 देश भी बीते दो दिनों में 140 से ज़्यादा रूसी राजनयिकों को निष्कासित कर चुके हैं.

इन सभी देशों का मानना है कि ब्रिटेन में रह रहे पूर्व रूसी जासूस सर्गेई स्क्रिपल और उनकी बेटी यूलिया पर रूस ने 4 मार्च, 2018 को नर्व एजेंट से हमला करवाया.

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Image caption पूर्व रूसी जासूस सर्गेई स्क्रिपल और उनकी बेटी यूलिया

रूस इन सभी आरोपों को बेबुनियाद बताता रहा है. साथ ही रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ ने कहा है कि नेटो की इस प्रतिक्रिया के पीछे अमरीका की ब्लैकमेल करने की नीति है.

नेटो के रूसी राजनयिकों को निष्कासित करने के फ़ैसले के बाद नेटो में रूसी प्रतिनिधिमंडल अब एक तिहाई ही रह जाएगा.

नेटो ने और क्या कहा?

संस्था की प्रवक्ता ओआना लंगेस्चू ने बीबीसी से कहा है कि रूस के ख़तरनाक रवैये के जवाब में ये फ़ैसला लिया गया. उन्होंने कहा कि बीते सालों में रूस ने नेटो के कई सदस्य देशों को निशाना बनाया है.

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जासूस को लेकर ब्रिटेन और रूस आमने-सामने

उन्होंने कहा, "हमने क्राइमिया पर अवैध क़ब्ज़ा देखा है. पूर्वी यूक्रेन को लगातार अस्थिर किए जाते हुए देखा है. साथ ही आर्कटिक से लेकर मध्य-पूर्व और भूमध्यसागर तक सेना का बड़ा जमावड़ा भी देखा है. हमने साइबर हमलों के ज़रिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया में दख़ल भी देख लिया. इसलिए ये बीते कई सालों में स्थापित एक व्यापक पैटर्न बन गया है. इसलिए रूस के लिए ये संदेश ज़रूरी है."

अमरीका की प्रतिक्रिया?

इसी बीच व्हाइट हाउस ने कहा है कि बीस से अधिक पश्चिमी देशों से रूसी राजनयिकों को निकाले जाने के फ़ैसले का समर्थन बढ़ रहा है.

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क्या होता है नर्व एजेंट?

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता सारा हकाबी सांडर्स ने कहा, "हम पहले भी कह चुके हैं कि अमरीका रूस के साथ बेहतर रिश्ते स्थापित करना चाहता है, लेकिन रूस की सरकार को ये भी समझना होगा कि उसके अस्थिर करने वाले क़दमों के गंभीर परिणाम होंगे. लगातार बढ़ रहे इस अंतरराष्ट्रीय दबाव से ये और भी स्पष्ट हो गया है कि रूस के साथ रिश्ते तब ही बेहतर हो सकते हैं जब उसकी सरकार अपना रवैया बदल ले."

रूस का पक्ष

बीबीसी से बातचीत में रूस के राजनेता और विदेश मामलों की संघीय समिति के अध्यक्ष कॉन्सटेटिन कोसाचेव ने कहा है कि उन्हें लगता है कि ब्रितानी सरकार ने अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों को ब्लैकमेल कर राजनयिकों को निष्कासित करवाया है.

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कोसाचेव ने कहा कि अगर किसी को लगता है कि वो रूस की विदेश नीति को बदल सकते हैं, रूस के नेतृत्व को बदल सकते हैं, रूस के नागरिक समाज और सत्ता के बीच फ़ासला पैदा कर सकते हैं तो वो पूरी तरह ग़लत हैं और वो रूस को समझते ही नहीं.

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