गज़ा सीमा पर फ़लस्तीनियों का प्रदर्शन, '16 की मौत'

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फ़लस्तीनी अधिकारियों का कहना है कि ग़जा-इसराइल की सीमा पर प्रदर्शन के दौरान इससाइली सेना की गोलियों से कम से 16 लोगों की मौत हो गई और सैंकड़ों लोग घायल हो गए.

हज़ारों की संख्या में प्रदर्शनकारियों छह हफ़्ते के विरोध प्रदर्शन की शुरूआत करते हुए सीमा की ओर मार्च कर रहे थे. इस विरोध प्रदर्शन को 'ग्रेट मार्च ऑफ रिटर्न' नाम दिया गया है.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ग़जा-इसराइल की सीमा पर प्रदर्शन के दौरान इसराइली सेना की गोलियों से मारे गए 16 फ़लस्तीनियों की मौत की जांच के आदेश दिए हैं. प्रदर्शन में सैकड़ों लोग घायल भी हुए हैं.

न्यू यॉर्क में एक आपातकालीन बैठक के दौरान संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी ने इसराइल से मानवीयता बनाए रखने का आग्रह किया और साथ ही ये भी कहा कि बल प्रयोग अंतिम विकल्प होना चाहिए.

फ़लस्तीनियों का ये प्रदर्शन दक्षिण गज़ा के ख़ान यूनिस के शहर समेत फ़लस्तीन-इसराइल सीमा से सटे कुल पांच इलाक़ों में आयोजित किया जा रहा है.

इसराइली सेना का कहना है कि सीमा से लगी कई जगहों पर "दंगों" की स्थिति थी जिससे निपटने के लिए "दंगा भड़काने वालों को निशाना बना कर" गोलियां चलाई गई थी.

बाद में इसराइल ने जानकारी दी कि उसने हमास समूह के इलाकों को निशाना बनाया है.

फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से 'फ़लस्तीनी लोगों को संरक्षण देने की मांग की है.'

उन्होंने कहा, " मैं आज मारे गए लोगों की पूरी जिम्मेदारी इसराइल प्रशासन पर डालता हूं."

छह सप्ताह तक चलने वाले इन प्रदर्शनों के लिए इसराइल की सीमा के नज़दीक फ़लस्तीनियों ने टेंट लगा दिए हैं.

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इसराइली सुरक्षाबल का कहना है कि फ़लस्तीन के साथ सटी उसकी सीमा पर बाड़े के पास 17,000 फ़लस्तीनी एकत्र हो गए हैं.

सुरक्षाबल ने अपने सोशल मीडिया चैनल पर बताया कि दंगाई भीड़ को तितर-बितर करने के लिए "लोगों को भड़काने वालों को निशाना बनाया गया", इनमें वो लोग शामिल हैं जो टायर जला रहे हैं और बाड़े की तरफ पेट्रोल बम और पत्थर फेक रहे हैं.

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फ़लस्तीन का कहना है कि उत्तरी गज़ा में जबालिया के नज़दीक और दक्षिण में रफ़ाह के नज़दीक इसराइली सेना के हमले में कई फ़लस्तीनी घायल हुए हैं.

इससे पहले फ़लस्तीनी स्वास्थ्य आधिकारियों ने कहा था कि प्रदर्शन शुरु होने से पहले इसराइल ने 27 साल के ओमर समूर को मार दिया था.

बीबीसी गज़ा संवाददाता रुश्दी अबालूफ़ ने ख़बर दी थी कि टैंक से चलाई गई गोलियां जिन दो लोगों को लगी हैं वो खेत में धनिया तोड़ रहे थे.

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'ग्रेट मार्च ऑफ़ रिटर्न' शुक्रवार 30 मार्च से शुरू हो रहा है. फ़लस्तीनी इस दिन को 'लैंड डे' के तौर पर मनाते हैं. साल 1976 में इसी दिन ज़मीन पर कब्ज़े को ले कर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान इसराइली सुरक्षाबलों में छह फ़लस्तीनियों को मार दिया था.

गज़ा सीमा के साथ-साथ नो-गो ज़ोन बनाया गया है. सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इसराइली सेना लगातार इसकी निगरानी करती है. इसराइल में चेतावनी दी है कि कोई भी इस ज़ोन में क़दम ना रखे.

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गज़ा पट्टी पर काम करने वाली फ़लस्तीनी चरमपंथी समूह हमास ने आरोप लगाया है कि इसराइल एक फ़लस्तीनी किसान को मार कर फ़लस्तीनियों को डराना चाहता है और कहना चाहता है कि वो इन प्रदर्शनों में हिस्सा ना लें.

इसराइली विदेश मंत्रालय ने कहा है, "इस विरोध प्रदर्शन के ज़रिए वो जानबूझ कर इसराइल के साथ झगड़ा बढ़ाना चाहता है" और "अगर किसी तरह की कोई झड़प हुई तो इसले लिए हमास और प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले फ़लस्तीनी संगठन ज़िम्मेदार होंगे."

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प्रदर्शनों के लिए फ़लस्तीनियों ने इसराइली सीमा के नज़दीक पांच मुख्य कैंप लगाए हैं. ये कैंप इसराइली सीमा के नज़दीक मौजूद बेट हनून से ले कर मिस्र की सीमा के नज़दीक रफ़ाह तक फैले हैं.

ये प्रदर्शन 15 मई को ख़त्म होंगे. इस दिन को फ़लस्तीनी नकबा यानी कयामत का दिन कहते हैं. साल 1948 में इसी दिन विवादित क्षेत्र इसराइल का गठन हुआ था और हज़ारों की संख्या में फ़लस्तीनियों को अपने घर से बेघर होना पड़ा था.

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Image caption किसान ओमर सोमर के रिश्तादार
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