क्या रुकने वाला था मार्टिन लूथर किंग का ऐतिहासिक भाषण?

अमरीका में काले यानी अफ़्रीकी मूल के नागरिकों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले मार्टिन लूथर किंग जूनियर का जन्म 15 जनवरी 1929 और मृत्यु चार अप्रैल 1968 को हुई थी. आगे पढ़िए, किंग के ऐतिहासिक भाषण 'आई हैव ए ड्रीम' की कहानी...

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मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने 28 अगस्त, 1963 को अमरीका के लिंकन स्मारक पर क़रीब दो लाख लोगों के सामने अपना ऐतिहासिक भाषण 'आई हैव ए ड्रीम' (मेरा एक सपना है) दिया था.

इस भाषण से पहले तब की अमरीकी सरकार में खलबली मची हुई थी. अमरीकी प्रशासन को डर था कि इस भाषण के बाद अमरीका में गोरों और कालों के बीच नस्ली हिंसा फैल सकती है.

मार्टिन लूथर किंग ने यह भाषण काले लोगों के अधिकारों के लिए संघर्षरत विभिन्न संगठनों के संयुक्त रूप से बुलाए गए 'मार्च ऑन वॉशिंगटन फ़ॉर जाब्स एंड फ़्रीडम' (नौकरी और स्वतंत्रता के लिए वॉशिंगटन चलो रैली) में दिया था.

काले लोग काफ़ी समय से अमरीकी समाज में बराबरी के अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे थे. सिर्फ़ 1963 में ही मई से अगस्त महीने के बीच 200 शहरों में 1,340 से ज़्यादा प्रदर्शन हुए थे.

कई जगहों पर नस्ली तनाव देखा जाने लगा था. लेकिन कई दूसरी जगहों पर इस तरह का कोई तनाव नहीं था.

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किंग का ऐतिहासिक भाषण

किंग ने अपना ऐतिहासिक भाषण लिकंन स्मारक की सीढ़ियों पर दिया था.

कई प्रमुख संगठनों के शामिल होने से वॉशिंगटन में होने वाली इस रैली में भारी भीड़ जुटने की संभावना थी. तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति जॉन एफ़ केनेडी को भी इस रैली के हिंसक होने की आशंका थी.

राष्ट्रपति के सलाहकार इस बात से भी डरे हुए थे कि रैली के बाद काले नेता अपनी अतार्किक मांगें लेकर ओवल ऑफ़िस (राष्ट्रपति का कार्यालय) पहुंच सकते हैं.

और अगर ये नेता ओवल ऑफ़िस से निराश लौटे तो रैली का मिज़ाज तुरंत बदल जाएगा. केनेडी ने रैली के लिए राष्ट्रपति का संदेश भेजने से भी परहेज़ किया.

उन्हें डर था कि उनके संदेश का भी उल्टा असर हो सकता है. हालांकि वो इस बात पर तैयार हो गए कि रैली के बाद वो काले नेताओं के प्रतिनिधि मंडल से व्हाइट हाउस में मिलेंगे ताकि उनके ख़िलाफ़ काले लोगों की नाराज़गी को कम किया जा सके.

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जब मुक्त होकर बोले किंग

जून के मध्य में जब इस रैली के बारे में प्रशासन को पता चला तो उसकी पहली प्रतिक्रिया थी कि भीड़ को बलपूर्वक तितर-बितर कर दिया जाएगा. उन्हें पूरा विश्वास था कि वो ताक़त के दम पर इस रैली को क़ाबू करने में सफल हो जाएंगे.

इस रैली के हिंसक हो जाने की आशंकाओं को लेकर इसके आयोजक भी चिंतित थे. इस रैली के प्रमुख आयोजनकर्ता बेयार्ड रस्टीन ने प्रशासन के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया था कि यह रैली शांतिपूर्ण रहे.

प्रशासन और आयोजकों में इस बात पर सहमति बन गई थी कि प्रदर्शनकारी सूर्यास्त के बाद सड़कों पर नहीं रहेंगे.

मार्टिन लूथर किंग के पहले से तैयार भाषण के प्रति जनता में खास उत्साह नहीं दिखा, तब उन्होंने मुक्त रूप से बोलना शुरू किया.

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अस्पतालों को किया गया था अलर्ट

संघीय जांच एजेंसी (एफ़बीआई) को राष्ट्रपति ने सतर्क और चुस्त रहने के लिए कह दिया था.

एफ़बीआई इस बात की पड़ताल कर रही थी कि कौन-कौन से काले कार्यकर्ता वॉशिंगटन पहुंच रहे हैं और इन नेताओं में से किनका कम्युनिस्ट संगठनों से संबंध रहा है.

वॉशिंगटन पुलिस भी इस प्रदर्शन के कई हफ्तों पहले से संभावित हिंसा को लेकर चौकस हो गई थी. पुलिस ने 72 स्थानों की पहचान कर ली थी जहाँ ज़्यादा ध्यान दिए जाने की ज़रूरत थी.

पुलिस को इस बात से राहत मिली थी कि लिंकन स्मारक तीन तरफ़ पानी से घिरा है. माहौल को देखते हुए पुलिस वॉशिंगटन के हर कोने की सुरक्षा को लेकर सतर्क थी.

प्रदर्शन के दौरान बहुत सी गिरफ़्तारियां होने की संभावना थी. स्थानीय न्यायधीशों की एक टीम को 24 घंटे तैयार रहने को कहा गया था. कोलंबिया के ज़िला कारागार से 350 क़ैदियों को जेल में जगह बनाने के लिए रिहा कर दिया गया.

अस्पतालों में होने वाले स्वैच्छिक ऑपरेशनों को टाल दिया गया ताकि 350 बिस्तर आपातकालीन स्थिति में संभावित मरीज़ों के लिए तैयार रहें. वॉशिंगटन के जनरल अस्पताल ने तो "राष्ट्रीय आपदा योजना" लागू करने की भी तैयारी कर रखी थी.

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शराब की बिक्री पर रोक

ऐतिहासिक भाषण के बाद मार्टिन लूथर किंग और उनके साथी लिंकन स्मारक से सीधे राष्ट्पति केनेडी से मिलने के लिए गए.

वॉशिंगटन में जन-जीवन पूरी तरह ठप हो गया था. सरकारी दफ़्तर बंद कर दिए गए थे. कर्मचारियों को घर पर ही रहने की सलाह दी गई थी.

वॉशिंगटन 24 घंटे तक शराब की बिक्री पर रोक लगा दी गई थी.

कई हफ्तों की तैयारी के बाद भी कोलंबिया में क़रीब-क़रीब मार्शल लॉ जैसी स्थिति थी. अमरीकी इतिहास में शांतिकाल में पहली बार इतनी सेना शहर में आने के लिए तैयार थी.

राजधानी के पास स्थित पांच सैनिक ठिकानों में सुगबुगाहट बढ़ गई थी. पूरी तरह हथियारबंद 4,000 सैनिकों को गुप्त नाम के साथ तैनाती के लिए तैयार रखा गया था.

30 हेलिकॉप्टर विशेष स्थिति में मदद करने के लिए उड़ान भर रहे थे. उत्तरी कैरोलाइना के फ़ोर्ट ब्रैग में 15,000 विशेष सुरक्षा बलों को भी ख़तरे का पहला अंदेशा होते ही राजधानी पहुंचने के लिए तैयार रखा गया था.

रैली के दौरान होने वाले भाषण के लिए भी प्रशासन ने बंदोबस्त कर रखा था. लिंकन स्मारक के पास ही एक अधिकारी को इस बात के लिए तैनात किया गया था कि ज़रूरत पड़ने पर वो भाषण के बीच में माइक को बंद कर सके या उसकी आवाज़ को नियंत्रित कर सके.

यह व्यवस्था भी की गई थी कि अगर भीड़ बेक़ाबू होकर मंच पर चढ़ने लगे तो भाषण को बंद करने के बाद महालिया जैकसन का गाना 'ही इज़ गॉट दि होल वर्ल्ड इन हिज़ हैंड' चला दिया जाएगा.

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'मार्टिन उन्हें सपने के बारे में बताओ..'

दोपहर में दो बजे के क़रीब जब किंग लिंकन स्मारक की सीढ़ियों पर जनता को संबोधित करने के लिए पहुंचे तो ओवल ऑफ़िस में राष्ट्पति केनेडी भी टेलीविज़न के सामने बैठे उनके भाषण का इंतज़ार कर रहे थे.

किंग जब भाषण देने के लिए आए तो उन्होंने वहां मौजूद भीड़ को देखा. चारों तरफ़ बस लोग ही लोग थे. वहां उपस्थित जनता नाच रही थी, गा रही थी, प्रार्थना कर रही थी, ख़ुशियां मना रही थी.

किंग ने पहले से तैयार किया गया भाषण देना शुरू किया लेकिन उनके भाषण के प्रति जनता में कोई ख़ास उत्साह नहीं दिख रहा था. तभी वहां मौजूद महालिया जैक्सन ने किंग से कहा, "मार्टिन उन्हें सपने के बारे में बताओ..."

महालिया चाहती थीं कि किंग अपने चिर परिचित खुले अंदाज़ में भाषण दें.

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किंग ने अपने भाषण के तैयार किए नोट्स किनारे रख दिए और बोले, "मेरे पास एक सपना है कि एक दिन यह देश उठेगा और अपनी जनता की वास्तविक आकांक्षाओं को पूरा करेगा."

किंग के इस अंदाज़ का उपस्थित जनता पर तत्काल असर हुआ. भाषण के साथ ही जनता चिल्ला रही थी, और सपने देखो, और सपने देखो.....

इस तरह 28 अगस्त, 1963 का दिन इतिहास में दर्ज हो गया. 28 अगस्त की शाम तक सिर्फ़ तीन गिरफ्तारियां हुई थीं और इनमें से किसी का भी संबंध इस प्रदर्शन से नहीं था.

भाषण के बाद किंग और उनके साथी लिंकन स्मारक से राष्ट्रपति केनेडी से मिलने सीधे व्हाइट हाउस गए. व्हाइट हाउस में किंग और उनके साथियों का स्वागत करते हुए केनेडी ने कहा, "मेरे पास एक सपना है."

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