उत्तर कोरियाई मिसाइल की पहुंच ब्रिटेन के तटों तक

किम जोंग-उन

ब्रिटिश सांसदों का कहना है कि उत्तर कोरिया की बैलिस्टिक मिसाइल 6 से 18 महीनों के भीतर ब्रिटेन के तटों तक पहुंच सकती है.

हाउस ऑफ़ कॉमन की डिफेंस सेलेक्ट कमेटी की रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं है कि उत्तर कोरिया इन मिसाइलों के साथ परमाणु हथियार भी भेज सकता है.

उत्तर कोरिया से ख़तरे की आशंकाओं को लेकर जांच कर रहे सांसदों का कहना है कि ऐसा कोई हमला होने की गुजांइश बहुत कम है.

उनका कहना है कि उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग-उन भले ही क्रूर हैं लेकिन अक्लमंद भी हैं.

रिपोर्ट में लिखा है-'वह अपने से पहले के कम्युनिस्ट नेताओं की तरह ही निर्मम हैं लेकिन अक्लमंद हैं और उन्हें परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से रोका जा सकता है."

उत्तर कोरिया अब तक 6 परमाणु परीक्षण कर चुका है और उसके पास बैलिस्टिक मिसाइल है जो जानकारों के मुताबिक पूरे अमरीका को अपने दायरे में ले सकती है. उत्तर कोरिया कहता है कि बैलिस्टिक मिसाइल के बाद उसने परमाणु देश बनने का अपना मिशन पूरा कर लिया है.

हालांकि पिछले महीने ही कई देशों के महीनों के विरोध और दबाव के बाद किम जोंग-उन ने कहा कि वे परमाणु हथियारों को हटाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और एक अभूतपूर्व कदम लेते हुए अमरीका के राष्ट्रपति ट्रंप से बातचीत के लिए भी राज़ी हो गए.

इमेज कैप्शन,

उत्तर कोरिया ने पिछले साल जुलाई में अपनी पहलीअन्तरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया

युद्ध में ब्रिटेन देगा अमरीका का साथ

इन सभी हालिया घटनाओं के बाद भी सांसदों की रिपोर्ट कहती है कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियारों को नहीं छोड़ेगा और जल्द ही अपने विरोधी देशों को परमाणु हथियारों से डराने की कोशिश करेगा.

सांसदों की कमेटी का कहना है कि ब्रिटेन पर परमाणु हमले की आशंका बेहद कम है क्योंकि उत्तर कोरिया का ध्यान अमरीका को धमकाने पर है.

रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर कोरिया ये अच्छी तरह जानता है कि परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से उसे विनाशकारी परिणाम झेलने होंगे.

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि अगर क्षेत्र में ऐसा कोई सैन्य संघर्ष होता है तो ब्रिटेन चुपचाप नहीं देखेगा और अमरीका की मदद करेगा.

सांसदों की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि उत्तर कोरिया ब्रिटेन पर साइबर हमला करवा सकता है.

ये अनुमान है कि पिछले साल मई में 'वानाक्राई' साइबर हमले के पीछे उत्तर कोरिया का हाथ था जिसने एनएचएस अस्पताल और दुनिया के कई बैंकों और बड़े बिज़नेस संस्थानों को प्रभावित किया था जिससे अरबों डॉलर को नुकसान हुआ.

कमेटी के अध्यक्ष जुलियान लुईस ने कहा कि उत्तर कोरिया से ख़तरा तेज़ी से बढ़ रहा है और इसलिए ब्रिटेन को अपनी सुरक्षा पर ज़्यादा खर्च करने की ज़रूरत है.

उन्होंने बीबीसी से कहा कि वे चाहते हैं कि साइबर और परमाणु ख़तरों से निबटने के लिए ब्रिटेन की सुरक्षा पर जीडीपी का 3 फीसदी ख़र्च हो जो फ़िलहाल 2 फीसदी है.

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