अमरीका ने पुतिन के करीबियों पर लगाए प्रतिबंध

  • 7 अप्रैल 2018
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अमरीका ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के 7 क़रीबियों और 17 वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों समेत कई कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला किया है. इन सभी पर 'पूरी दुनिया में हानिकारक गतिविधियां चलाने' का आरोप लगाया गया है.

अमरीका ने रूस के उच्च वर्ग से संबंधित 12 कंपनियों, सरकारी हथियार निर्यातक कंपनी और एक बैंक को भी प्रतिबंधित किया है.

ताज़ा फ़ैसले में अमरीका ने जिन लोगों को प्रतिबंधित किया है, उनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के बॉडीगार्ड, उनके दामाद, राष्ट्रपति के निकट सहयोगी और उनके नियंत्रण वाली कई कंपनियां शामिल हैं.

'प्रशासनिक क़दम'

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता सारा सैंडर्स ने कहा है कि इन प्रतिबंधों का मतलब यह नहीं है कि अमरीका ने रूस से अपने रिश्ते ख़त्म कर लिए हैं.

उन्होंने कहा,''आज ये जो प्रतिबंध लगाए हैं और साथ ही जो भी प्रशासनिक कदम उठाए गए गए हैं, उनमें कांग्रेस की मंजूरी का ध्यान रखा गया है. यह साबित करता है कि राष्ट्रपति की बात बिलकुल सही थी कि कोई भी रूस पर कठोर क़दम नहीं उठाता था."

सारा सैंडर्स ने कहा, "हम रूसी सरकार के साथ सकारात्मक रिश्ता चाहते हैं लेकिन यह तभी हो सकेगा जब उनकी तरफ़ से भी व्यवहार में बदलाव आए.''

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रूस का जवाब

अमरीका की तरफ़ से लगाए गए प्रतिबंधों के जवाब में रूस ने भी कड़े क़दम उठाने की धमकी दी है.

रूसी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि इस तरह के दबाव के आगे रूस अपने रास्ते से हटने वाला नहीं है. रूसी विदेश मंत्रालय ने अमरीका के क़दमों को मूर्खतापूर्ण बताया है, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध ख़राब होंगें.

वॉशिंगटन में मौजूद बीबीसी संवाददाता बारबरा प्लेट उशर ने कहा है कि अमरीका ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के ख़िलाफ़ अभी तक का सबसे आक्रामक कदम उठाया है.

अमरीका ने जिन लोगों पर प्रतिबंध लगाए हैं, उनमें सुलेमान करीमोव का नाम भी शामिल है. ये रूस के सबसे अमीर नागरिकों में से एक हैं. इनका परिवार रूस का सबसे बड़ा सोने का उत्पादक है.

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Image caption सुलेमान करीमोव

पिछले महीने ही अमरीका ने 19 रूसी नागरिकों को कथित तौर पर साइबर हमला करने और अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में हस्तक्षेप करने के आरोप में प्रतिबंधित कर दिया था.

इसके बाद रूस और ब्रिटेन के बीच चल रहे राजनीतिक गतिरोध में भी अमरीका ने ब्रिटेन का साथ देते हुए अपने देश में मौजूद कई रूसी राजनयिकों को निष्काषित कर दिया था.

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