कैंसर के नाम पर बटोरे पैसे, अब जाना पड़ेगा जेल

  • 12 अप्रैल 2018
धोखा, ऑस्ट्रेलिया इमेज कॉपीरइट Facebook

बीमारी के नाम पर आर्थिक मदद मांगने वाले बहुत से विज्ञापन आपने भी देखे होंगे. आसपास शायद कई ऐसे लोगों से मिले भी होंगे, लेकिन क्या जितने लोग मदद मांगते हैं, उन सभी पर भरोसा कर लेना चाहिए?

ऑस्ट्रेलिया की ये कहानी पढ़ने के बाद शायद आप पहले से कहीं अधिक सतर्क हो जाएं. ऑस्ट्रेलिया की एक लड़की ने कैंसर की बात कहकर अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से पहले तो पैसे बटोरे और उसके बाद उन पैसों को मौज-मस्ती में ख़र्च कर दिया.

बाद में सोशल मीडिया से पता चला कि कैंसर की बात झूठी थी. इसके बाद उस महिला को गिरफ़्तार कर लिया गया है और तीन महीने की सज़ा सुनाई गई है.

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24 साल की हना डिकन्सन ने अपने माता-पिता से कहा कि उन्हें इलाज कराने के लिए विदेश जाना होगा जिसके लिए उन्हें पैसे चाहिए.

कोर्ट के अनुसार, इसके बाद उनके माता-पिता ने अपने बहुत से परिचितों से आर्थिक मदद ली. उन्हें क़रीब 21 लाख रुपये की मदद मिली. एक ओर जहां ये आर्थिक मदद इलाज के लिए दी गई थी वहीं डिकन्सन ने इन पैसों का ज़्यादातर हिस्सा घूमने और लोगों से मिलने-जुलने में ख़र्च किया.

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मामले की सुनवाई कर रहे एक जज ने डिकन्सन की इस हरकत को घिनौना बताया.

मेलबर्न मजिस्ट्रेट कोर्ट में सुनवाई के दौरान डिकन्सन को धोखाधड़ी के सात मामलों के तहत दोषी पाया गया. सुनवाई के दौरान मजिस्ट्रेट डेविड स्टारवैगी ने कहा कि डिकन्सन ने कई लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाया है.

उन्होंने कहा कि डिकन्सन के इस काम से मानवीयता और लोगों के भरोसे को धक्का लगा है. ये वे लोग हैं जो मेहनत करते हैं और उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई को किसी के इलाज के लिए दान दिया था.

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कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा गया कि एक शख़्स जो खुद कैंसर के इलाज के बाद अस्पताल से घर लौटा था उसने डिकन्सन को क़रीब पांच लाख रुपये दिए. इसके अलावा एक अन्य शख़्स ने उन्हें चार अलग-अलग मौकों पर पैसे दिए.

धोखाधड़ी का ये मामला तब सामने आया जब आर्थिक मदद करने वाले एक शख़्स ने डिकन्सन की कुछ तस्वीरें फ़ेसबुक पर देखीं. इसके बाद उसने पुलिस को इसके बारे में सूचित किया.

डिकन्सन के वक़ील बेवर्ली लिंडसे ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान सेलिब्रिटी ब्लॉगर बेले गिब्सन का उदाहरण दिया जिन्होंने ब्रेन कैंसर होने का झूठा बोला था और बाद में सच सामने आने के बाद उन पर क़रीब दो करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया.

लिंडसे ने डिकन्सन का पक्ष रखते हुए कहा कि उन्हें लिंडसे की तुलना में कम पैसे मिले थे.

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हालांकि जज ने अपना फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि इन दोनों मामलों की कोई तुलना नहीं है. साथ ही ये अदालत की ज़िम्मेदारी है कि वो ये सुनिश्चित करे कि भविष्य में ऐसा कोई मामला सामने न आए.

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