सीरिया युद्ध में ये हथियार निभाएंगे अहम रोल

  • 13 अप्रैल 2018
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Image caption डोनल्ड ट्रंप ने सीरिया को चेतावनी दी है

सीरिया की राजधानी दमिश्क के नज़दीक कथित रासायनिक हमले के जवाब में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने रूस से कहा है कि वह अपने सहयोगी सीरिया पर मिसाइल हमले के लिए 'तैयार' रहें.

ऐसे संकेत मिले हैं कि हमले की योजना अमरीका ने तैयार की है जिसमें ब्रिटेन और फ़्रांस का सहयोग हो सकता है. इसमें लंबी दूरी के ऐसे हथियार होंगे जो युद्धपोतों या पनडुब्बियों से दागे जा सकेंगे.

इसमें ऐसे लड़ाकू विमान भी हो सकते हैं जो सीरिया में हवा से ज़मीन पर हथियार दाग़ सकते हैं या फिर रिमोट से संचालित ड्रोन का भी प्रयोग हो सकता है.

हालांकि, रूसी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि ऐसी किसी भी मिसाइल को गिरा दिया जाएगा और जहां से यह दाग़ी जाएंगी उस जगह को भी निशाना बनाया जाएगा.

लेकिन वह कौन-से हथियार हैं जिनका मुख्य पक्ष इस्तेमाल करेंगे और रूस और सीरिया इसका जवाब कैसे देंगे?

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Image caption अमरीका के एफ़-16 लड़ाकू विमान की होगी बड़ी भूमिका

अमरीका: 600 अरब डॉलर रक्षा बजट

अमरीका का निर्देशित मिसाइल विध्वंसक यूएसएस डोनल्ड कुक इस समय भूमध्य सागर में तैनात है और वह अपनी क्रूज़ मिसाइलों से सीरिया के रासायनिक केंद्रों पर हमला कर सकता है.

इस तरह की प्रतिक्रिया से अमरीका के लड़ाकू जहाज़ों के गिराए जाने का डर भी कम किया जा सकेगा.

दो साल पहले पूर्वी भूमध्य सागर में तैनात अमरीकी नौसेना के युद्धपोत से कुल 59 टोमहॉक मिसाइलें सीरिया के होम्स प्रांत के शयरात सैन्य हवाई अड्डे पर दागी गई थीं.

अमरीका का कहना था कि सैन्य हवाई अड्डे पर रासायनिक हथियार रखे गए थे जिसका प्रयोग विद्रोहियों के कब्ज़े वाले क्षेत्र पर किया गया था.

टोमाहॉक मिसाइल काफ़ी कम ऊंचाई पर जाती है जिससे उसे पकड़ पाना काफ़ी मुश्किल है.

Image caption टोमाहॉक क्रूज़ मिसाइल

अमरीकी नौसेना के पास खाड़ी में युद्धपोतों पर अच्छे ख़ासे लड़ाकू विमानों का बेड़ा है. हालांकि, वह तुरंत सीरिया के हवाई क्षेत्र में घुसने का ख़तरा नहीं ले सकता है.

मध्य पूर्व में अमरीका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा क़तर में है जहां उसके पास एफ़-16 और ए-10 जैसे लड़ाकू विमान हैं. इनका एक साथ काफ़ी तेज़ी से इस्तेमाल किया जा सकता है.

एफ़-16 को दुनिया का सबसे विश्वसनीय और प्रभावी सैन्य विमानों में से एक समझा जाता है. इसकी रेंज तकरीबन 2,000 मील की है जो किसी दूसरे लड़ाकू विमान की तुलना में युद्ध क्षेत्र में काफ़ी देर तक टिक सकता है.

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Image caption सी-17 परिवहन विमान में छोटे विमान ले जाए जा सकते हैं

अमरीका के पास लंबी दूरी के सबसोनिक बी-52 बमवर्षक विमान भी हैं, जिनका इस्तेमाल इससे पहले भी इस क्षेत्र में हो चुका है.

उत्तरी सीरिया में तुर्की की सीमा पर कुर्द शहर कोबाने में अमरीका पहले भी सी-130 और सी-17 सैन्य परिवहन विमान से जवान और सामान पहुंचा चुका है.

यह विमान काफ़ी बड़े हैं जिसमें छोटे विमान और हेलिकॉप्टर रखे जा सकते हैं और हवा में लड़ाकू विमानों में तेल भरने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.

रूस: 69 अरब डॉलर रक्षा बजट

किसी भी हमले की सूरत में अमरीका को दी गई रूस की चेतावनी पर ज़रूर सवाल उठते हैं कि वह कैसे जवाब देगा. लेकिन उसके एस-400 वायु रक्षा प्रणाली का अभी भी इस्तेमाल नहीं किया गया है.

सीरिया में रूसी विमानों को गिरा देने के बाद कई स्तर पर लड़ाकू विमान विरोधी प्रणाली को लगाया गया था, जिसका इस्तेमाल अभी तक बचाव के तौर पर होता था.

यह तीन प्रकार की मिसाइलों को छोड़ सकता है और कहा जाता है कि 250 मील की दूरी में यह हर विमान और मिसाइल को उलझा सकता है. साथ ही यह सीरिया के एक बड़े हिस्से को कवर करता है.

Image caption एस-400 रक्षा प्रणाली

1 से लेकर 4 तक के चरण बताते हैं कि एस-400 प्रणाली कैसे किसी चीज़ को पहचानती है और उसे निशाना बनाती है. यह एक साथ 12 मिसाइलें दाग सकती है और एक बार में छह निशाने लगा सकती है.

इसके अलावा रूस के पास सीरिया में सुखोई-24, सुखोई-25 लड़ाकू विमानों समेत कई परिवहन, जासूसी विमान और हेलिकॉप्टर हैं.

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Image caption एमआई-24 हिंद हेलिकॉप्टर के लिए रूस कथित तौर पर शयरात एयरबेस इस्तेमाल कर रहा है

इसमें से अधिकतर मैमीम एयरबेस पर तैनात हैं. यह एयरबेस विद्रोहियों के ख़िलाफ़ हमले का रूस का मुख्य बेस है.

रूसी सेना कथित तौर पर शयरात एयरबेस को एमआई-24 और एमआई-35 लड़ाकू हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल कर रहा है.

हालिया रिपोर्टों के अनुसार, सीरिया के तटीय शहर टारटूस के नौसैनिक बेस से रूस अपने युद्धपोतों को हटा चुका है.

ब्रिटेन: 50 अरब डॉलर रक्षा बजट

बीबीसी के जेम्स लेंसडेल का कहना है कि ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय रूस में अपने संसाधन तैनात करने के लिए तैयार है.

इसमें से अधिकतर विमान साइप्रस में तैनात हैं जिन्हें किसी भी वक़्त बुलाया जा सकता है.

Image caption ब्रिटेन की मध्य पूर्व में सैन्य ताक़त

ब्रिटिश सेना के पास बेस में आठ सुपरसोनिक टॉर्नेडो तैनात हैं. इसके अलावा इस क्षेत्र में ब्रिटेन की रॉयल वायुसेना के टाइफ़ून विमान संचालित होते रहे हैं और हाल के सालों में इराक़ से कई हमले किए गए हैं.

यह विमान पेववे-4 लेसर निर्देशित बम और ब्रिमस्टोन मिसाइल का प्रयोग किया जाता है. ब्रिमस्टोन हवा से ज़मीन पर मार करने वाली रडार आधारित मिसाइल है जिसका वज़न 49 किलो है और इसकी दूरी 1.8 मील तक है.

ब्रिटेन की मध्य पूर्व में मानवरहित विमानों का बेड़ा है जिसमें 10 रिपर ड्रोन हैं. इनका प्रयोग इराक़ और सीरिया के मिशन में होता रहा है.

फ़्रांस: 34 अरब डॉलर रक्षा बजट

इस क्षेत्र में इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ अभियान में फ़्रांस की नौसेना ने परमाणु शक्ति से संपन्न एक युद्धपोत को लगाया था लेकिन अभी इसकी मरम्मत जारी है.

38 हज़ार टन का यह पोत फ़्रांस का इकलौता ऐसा पोत है जिस पर से मिसाइल और बम दागे जा सकते हैं और इस पर 1,900 से अधिक जवान रह सकते हैं.

साथ ही फ़्रांस ने कई मिराज और राफ़ेल लड़ाकू विमानों को जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात में तैनात किया है. इसका इस्तेमाल सीरिया और इराक़ में तथाकथित इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ किया गया था.

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Image caption सीरिया के पास रूस की एस-22 मिसाइल प्रणाली है

सीरिया: दो अरब डॉलर रक्षा बजट

हालिया इसराइली हमलों से सीरिया की हवाई रक्षा प्रणाली को काफ़ी नुकसान पहुंचा है लेकिन इसके पास अभी भी ऐसी तकनीक़ है जो किसी भी विमान और मिसाइल के लिए ख़तरा हैं.

फ़रवरी में विमान विरोधी मिसाइल एफ़-16 पर दागी गई थी जिसके कारण उत्तरी इसराइल में एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था.

इस प्रणाली में उनके पास एस-200 जैसी मिसाइलें हैं. साथ ही एसए-22 और एसए-17 जैसे रूसी हथियारों से उसने अपनी तकनीक को उन्नत किया है.

एस-200 मिसाइल तरल पदार्थ से भरी होती है जो रडार से संचालित होती है.

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