सीरिया पर हमले से जुड़े ये 7 बड़े सवाल

  • 14 अप्रैल 2018
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अमरीका ने फ्रांस और ब्रिटेन के साथ मिलकर शनिवार को सीरिया के कई इलाकों पर मिसाइल से हमला किया.

ख़बरों में बताया गया है कि ये हमले सीरिया में पिछले हफ्ते हुए रासायनिक हमले की प्रतिक्रिया के रूप में किए गए.

इन हमलों का जहां फ्रांस और ब्रिटेन ने समर्थन किया है वहीं रूस ने इस पर विरोध दर्ज कराया है. इसके साथ ही चीन ने भी इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है.

इन हमलों के बीच कुछ सवाल हैं, जो सीरिया हमले से जुड़े हुए हैं.

1- सीरियाई शहर डूमा पर क्यों हुआ हमला?

फ़रवरी माह में सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद ने पूर्वी गूटा में विद्रोही लड़ाकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करते हुए उन्हें खदेड़ने के मकसद से एक अभियान की शुरुआत की थी. इस अभियान में 1700 नागरिकों के मारे जाने की खबरें आईं.

मार्च में सेना ने इस इलाके को तीन टुकड़ों में बांट दिया. सबसे बड़ा इलाका डूमा का था जहाँ 80 हज़ार से लेकर डेढ लाख लोग रह रहे थे. अन्य दो स्थानों पर रह रहे विद्रोहियों ने अपना इलाका छोड़ना शुरू कर दिया, लेकिन डूमा पर जाएश अल-इस्लाम ने अपना नियंत्रण बरकरार रखा.

इसके बाद 6 अप्रैल को सरकार के साथ हुई बातचीत के बाद इस इलाके में हवाई हमले किए गए.

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2- सात अप्रैल को क्या हुआ था?

डूमा पर हवाई हमले लगातार दूसरे दिन भी जारी रहने की खबरें आती रहीं. इसमें दर्जनों नागरिकों के मारे जाने और घायल होने की खबरें भी आईं.

इसके साथ ही इस इलाके में संदिग्ध रासायनिक हमले की खबर ने सभी को हैरान कर दिया. वायलेशन डोक्यूमेंटेशन सेंटर (वीडीसी) के कार्यकर्ताओं ने बताया कि सीरिया में अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन किया गया है. इसमें बताया गया कि सीरियाई वायु सेना की तरफ से केमिकल पदार्थ युक्त दो बम डूमा के इलाके में गिराए गए.

वीडीसी के अनुसार पहला बम शाम 4 बजे उत्तर पश्चिम डूमा की ओमल इब्न अल-खत्तब सड़क पर एक बेकरी पर को निशाना बनाकर गिराया गया, जबकि दूसरा पूर्वी इलाके में शहीद चौक के पास ही शान 7.30 बजे गिराया गया.

इन हमलों में सैकड़ों लोगों के घायल होने की खबरें मिली, जिनमें अधिकतर बच्चे और महिलाएं थीं.

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3-कितने लोग मारे गए?

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार उन्हें स्थानीय स्वास्थ्य संबंधी पार्टनर से जानकारी मिली कि प्रभावित इलाके में ख़तरनाक केमिकल की चपेट में आने से 43 लोगों की मौत हुई है.

वहीं, सीरिया की सिविल डिफेंस और सैम्स के अनुसार 42 लोग अपने घरों में मृत पाए गए. मरने वालों की संख्या 150 से ज़्यादा बताई गई है.

ब्रिटेन स्थित निगरानी समूह सीरियन ऑब्जर्वेट्री फॉर ह्यूमन राइट्स ने बताया कि हवाई हमलों में 6 और 7 अप्रैल को 100 से अधिक लोगों की मौत हुई. इनमें से 21 लोगों कि मौत सांस लेने में हुई तकलीफ से हुई.

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4- रासायनिक हमले की पहचान कैसे?

विशेषज्ञों का कहना है कि वीडियो और फोटो के आधार पर यह बता पाना नामुमकिन है कि किसी व्यक्ति की मौत रसायनिक हमले में हुई या नहीं. इस बात का पुख्ता तौर पर पता लगाने के लिए लैब में सैम्पल का परीक्षण करना होगा.

हालांकि सीरिया सरकार की नाकेबंदी के चलते अंतरराष्ट्रीय संगठन डूमा में प्रवेश नहीं कर सकते.

ऑर्गेनाइजेशन फॉर द प्रोहिबिशन ऑफ केमिकल वेपन (ओपीसीडब्ल्यू) का कहना है कि एक मिशन के तहत उन्होंने डूमा के इलाकों में पीड़ित लोगों के सैम्पल लिए गए, इन सैम्पल के परीक्षण किए जा रहे हैं. इस ग्लोबल वॉचडॉग ने एक टीम सीरिया रवाना की है जो शनिवार से ही अपना काम शुरू करेगी.

एक अन्य संस्था यूओएसएसएम का कहना है कि पीड़ित लोगों के सैमप्ल में क्लोरीन के तत्व पाए गए हैं. यूओएसएसएम फ्रांस में काम करने वाले डॉक्टर रफेल पिट्टी ने बताया कि लोगों पर नर्व एजेंट के जरिए हमला किया गया, क्लोरीन के साथ सैरिन गैस का भी इस्तेमाल किया गया है.

इसके अलावा अमरीका और फ्रांस की कई अन्य जांच एजेंसियों ने अपने नतीजे में केमिकल हथियारों के इस्तेमाल की बात रखी है.

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5- क्या कहना है सीरियाई सरकार का?

सीरिया की सरकार लगातार रसायनिक हमले से इनकार करती आ रही है. उसका कहना है कि तमाम रिपोर्टों में झूठी खबरें सामने रखी जा रही हैं.

संयुक्त राष्ट्र में सीरिया के प्रतिनिधि बशर अल-जाफरी ने इस तरह की खबरों के लिए पश्चिमी देशों पर आरोप लगाया है. उनका कहना है कि इस तरह की खबरें फैलाकर पश्चिमी देश उनके खिलाफ कार्रवाई करने की ज़मीन तैयार कर रहे हैं जैसा कि अमरीका और ब्रिटेन ने 2003 में इराक़ में किया था.

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने 13 अप्रैल को कहा था कि उसके पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि कुछ बाहरी ताकतों ने सीरिया में रासायनिक हमलों की तैयारी की है.

हालांकि लावरोव ने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन रूसी विदेश मंत्री के प्रवक्ता मेजर जनरल इग्नर कोनश्नेकॉव ने इसके लिए सीधे ब्रिटेन पर आरोप लगाए.

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6- अंतरराष्ट्रीय समुदाय की कैसी प्रतिक्रिया?

अमरीकी राष्ट्रपति शुरुआत से ही इस बात पर सहमत थे कि सीरियाई सरकार ने डूमा पर रासायनिक हमला किया है और इसमें कई मासूम नागरिकों की जान गई है.

अमरीका के साथ ब्रिटेन और फ्रांस भी खड़े हैं. इन्हीं देशों ने मिलकर शनिवार को संयुक्त रूप से सीरिया पर हमला भी बोला.

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटारेस ने कहा है कि वे डूमा से आ रही खबरों से बेहद आहत हैं और उन्होंने चेतावनी दी है किसी भी गुट की तरफ से रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन माना जाएगा.

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7- इससे पहले कहां इस्तेमाल हुए रासायनिक हथियार?

अगस्त 2013 में सैरिन केमिकल युक्त रॉकेट पूर्वी और पश्चिमी गूटा में दागे गए थे. इस बात की पुष्टि संयुक्त राष्ट्र ने भी की थी.

पश्चिमी देशों का कहना था कि सीरियाई सरकार की तरफ से ही इस तरह के रासायनिक हमले किए गए हैं. वहीं राष्ट्रपति असद लगातार इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं, वहीं असद ने रासायनिक हथियारों के सम्मेलन में रासायनिक शस्त्रागार को खत्म करने पर सहमति जताई थी.

यूएन-ओपीसीडब्ल्यू के संयुक्त विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि अप्रैल 2017 में विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाके खान शेखून में सीरियाई सरकार ने रासायनिक हमला किया था जिसमें 80 से अधिक लोग मारे गए थे.

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