पोप की पाठशाला में जादू-टोने की ट्रेनिंग

  • 17 अप्रैल 2018
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दुनिया भर के कैथोलिक समुदाय की भारी मांग पर वेटिकन ने अपने दरवाज़े जादू-टोने के एक सालाना कोर्स के लिए खोल दिए हैं.

लगभग 50 देशों के 250 पादरी जादू-टोना सीखने के लिए रोम का रुख़ कर रहे हैं.

इस कोर्स में शैतानी ताक़तों को पहचानना, साथ पादरियों के अनुभवों को सुनना और प्रेतात्माओं से निजात पाने के अनुष्ठान सीखना शामिल है.

एक्सॉर्सिज़म यानी जादू-टोना फ़िल्मों और आम ज़िंदगी में अपने चित्रण के कारण काफ़ी विवादास्पद रहा है.

इसके अलावा कई धार्मिक संप्रदायों में इसके दुरूपयोग की भी ख़बरे आती रही हैं.

हफ़्ते भर चलने वाले इस कोर्स का नाम है, 'एंटाइटल्ड एक्सॉर्सिज़म एंड द प्रेयर ऑफ़ लिबरेशन.' ये कोर्स 2005 में शुरू हुआ था. इसकी फ़ीस करीब 24,000 रुपये है.

कोर्स में जादू-टोने के धार्मिक, मनोवैज्ञानिक और मानवशास्त्रीय पहलुयों पर ज़ोर दिया जाता है.

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क्यों बढ़ रही है मांग

कई देशों के कैथोलिक पादरियों का कहना है कि उनके पास भूत-प्रेत के वश में होने की शिकायत करने वालों लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है.

एक अनुमान के अनुसार इटली में हर साल करीब पांच लाख लोग जादू-टोने की मदद लेते हैं.

एक ईसाई थिंक टैंक थियोस ने साल 2017 में कहा था कि ब्रिटेन में भी इसका चलन बढ़ता जा रहा है.

गेरी थॉमस एक अमरीकी पादरी हैं जो बीते 12 साल से जादू-टोना कर लोगों की मदद का दावा करते हैं.

उनका कहना है कि ईसाई धर्म में आ रहे पतन की वजह से अंधविश्वास और कुरितियां बढ़ रही हैं.

बेनिनो पलिला नाम के एक इतालवी पादरी ने वेटिकन न्यूज़ को बताया कि टैरट कार्ड्स बगैरहा के बढ़ते चलन की वजह से जादू-टोने की मांग भी बढ़ी है.

तो किसी के शरीर से प्रेत का नियंत्रण कैसे हटाया जाता है?

इस प्रक्रिया में कुछ ख़ास प्रार्थनाएं जिनके ज़रिए ईसा मसीह का नाम लेकर भूत-प्रेतों को शरीर छोड़ने को कहा जाता है.

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कब भगाते हैं पादरी भूत-प्रेत?

साल 1999 में करीब 400 बाद कैथोलिक चर्च में पहली बार जादू-टोने के नियमों को अपडेट किया था.

इन नियमों में प्रेतों के असर और शारीरिक/मनोवैज्ञानिक बिमारियों को अलग-अलग किया गया था.

यही कराण है फ़ादर थॉमस जैसे पादरी कैथोलिक डॉक्टरों, मनोवज्ञानिकों और मनोरोग चिकित्सकों की एक टीम के साथ काम करते हैं.

वो कहते हैं कि किसी इलाज में जादू-टोना आख़िरी हथियार है.

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कैसे भगाते हैं भूत?

कैथोलिक डॉट ओआरजी के मुताबिक़ पादरी को इसके लिए ख़ास किस्म के कपड़े पहनने होते हैं. सफेद चोंगा और जामुनी रंग का स्टोल.

जिस व्यक्ति पर भूत का साया हो, उसे बांधा जा सकता है और उस पर पवित्र जल का इस्तेमाल किया जा सकता है.

पादरी भूत भगाने की प्रक्रिया में पीड़ित शख़्स पर कई बार क्रॉस का निशान बनाएगा.

इसमें पादरी ईसाई धर्म के संतों का ध्यान और प्रार्थना करेगा, बाइबल के उन अंशों का पाठ करेगा जिससे ईसा मसीह ने लोगों के भीतर से शैतान को निकाला था.

पादरी ईसा मसीह का नाम लेकर पीड़ित शख़्स में मौजूद शैतान को ईश्वर के समक्ष समर्पण करने और चले जाने के लिए कहता है.

जब पादरी को ये भरोसा हो जाएगा कि जादू-टोने की प्रक्रिया कारगर रही है तो वो पीड़ित व्यक्ति को भविष्य में ऐसी किसी परेशानी से बचाने के लिए ईश्वर से प्रार्थना करेगा.

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इस पर एतराज़ क्या है?

जादू-टोने के तौर-तरीकों की दुनिया भर में आलोचना होती है. ये चिंता जाहिर की जाती है कि कई तरह के धार्मिक रीति-रिवाज़ों में बच्चों पर इसका इस्तेमाल किया जाता है.

कई बार जादू-टोने के दौरान लोगों की मौत भी हो जाती है. कमज़ोरी, मिर्गी या पागलपन के मरीज़ों के ग़लत इलाज का ख़तरा हो सकता है.

अगर इन बीमारियों से जूझ रहे लोगों को के लक्षणों को कोई सुपरनैचुरल चीज़ समझ लिया जाए तो मुमकिन है कि उनका इलाज ही न कराया जाए.

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