मोदी की ज़ुबानी, सर्जिकल स्ट्राइक की कहानी

  • 19 अप्रैल 2018
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भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को पाकिस्तान को नाम लिए बिना चेतावनी दी और कहा, "टेररिज़्म एक्सपोर्ट करने वालों को पता होना चाहिए कि अब हिंदुस्तान बदल चुका है."

ब्रिटेन की राजधानी लंदन में वेस्टमिंस्टर के सेंट्रल हॉल में 'भारत की बात, सबके साथ' कार्यक्रम में भारतीय समुदाय से रूबरु हुए प्रधानमंत्री मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, "ये मोदी है, उसी भाषा में जवाब देना जानता है. "

भारतीय सेना ने सितंबर 2016 में दावा किया था कि उसने पाकिस्तान के साथ लगती नियंत्रण रेखा के पास सर्जिकल स्ट्राइक की हैं. तब पाकिस्तानी सेना ने भारत के दावों का खंडन करते हुए कहा था कि कि कार्रवाई नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी तक सीमित थी.

सर्जिकल स्ट्राइक पर बुधवार को पूछे गए सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "भारत का चरित्र अजेय रहने का है. विजयी रहने का है लेकिन किसी के हक़ को छीनना ये भारत का चरित्र नहीं है. लेकिन जब कोई टेररिज़्म एक्सपोर्ट करने का उद्योग बनाकर बैठा हो, मेरे देश के निर्दोष नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया जाता हो, युद्ध लड़ने की ताक़त नहीं है. पीठ पर वार करने के प्रयास होते हों तो ये मोदी है, उसी भाषा में जवाब देना जानता है."

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मोदी ने आगे कहा, "हमारे जवानों को टैंट में सोए हुए रात को कुछ बुजदिल आकर उनको मौत के घाट उतार दें आप में कोई चाहेगा मैं चुप रहूं. क्या उनको ईंट का जवाब पत्थर से देना चाहिए कि नहीं देना चाहिए और इसलिए सर्जिकल स्ट्राइक किया. मुझे अपनी सेना पर गर्व है. जवानों पर गर्व है. जो योजना बनी थी उसको शत प्रतिशत इम्पलिमेंट किया और सूर्योदय होने से पहले वापस लौटकर आ गए."

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये भी कहा कि दुनिया को जानकारी देने के पहले भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में पाकिस्तान को बताया था.

उन्होंने कहा, "हमारी नेक दिली देखिए, मैंने हमारे अफसरों से कहा कि आप हिंदुस्तान को पता चले उससे पहले पाकिस्तान की फौज को फोन करके बता दो. आज रात हमने ये किया है.

ये लाशें वहां पड़ी होंगी तुम्हे समय हो तो जाकर वहां से ले आओ. हम सुबह 11 बजे से उनको फोन लगा रहे थे वो फोन पर आने से डर रहे थे वो आ नहीं रहे थे. 12 बजे वो फोन पर आए. तब जाकर हमने दुनिया को बताया कि भारत की सेना का ये अधिकार था न्याय प्राप्त करने का और हमने ये किया. "

चोगम (कॉमनवेल्थ हेड्स ऑफ़ गवर्नमेंट मीटिंग) सम्मेलन में हिस्सा लेने लंदन पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने 'भारत की बात, सबके साथ' कार्यक्रम में मोदी ने कई मुद्दों पर अपनी बात रखी. उन्होंने अपनी सरकार की योजनाएं गिनाईं. मोदी ने कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में दुनिया में 'भारत एजेंडा सेट कर रहा है'.

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भारत के बढ़ते रुतबे का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, "पिछली बार माल्टा में हुए कॉमनवेल्थ समिट में मैं नहीं जा सकता था. इस बार स्वयं प्रिंस चार्ल्स आए थे सिर्फ मुझे व्यक्तिगत निमंत्रण देने के लिए. इतना ही क्वीन ने मुझे स्वयं पर्सनल चिट्ठी लिखी कि इस बार तो आपको रहना ही है. ये मोदी का विषय नहीं है. ये भारत का प्रोफाइल है. "

ढाई घंटे से ज़्यादा वक़्त तक चले कार्यक्रम का संचालन मशहूर गीतकार प्रसून जोशी ने किया. कार्यक्रम की रूपरेखा ऐसी बनाई गई थी जिसमें प्रसून जोशी ने उनसे अपने और लोगों के भेजे सवालों को लेकर बात की.

इससे पहले नरेंद्र मोदी ने ब्रितानी प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे और महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय से मुलाकात की.

नरेंद्र मोदी की लंदन यात्रा के दौरान उन्हें विरोध प्रदर्शनों का भी सामना करना पड़ा. पिछले दिनों भारत में कठुआ और उन्नाव में हुई रेप की घटनाओं और पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के मामले में अभी तक इंसाफ़ न मिलने को लेकर लोगों ने लंदन की सड़कों पर प्रदर्शन किए और मोदी विरोधी नारे लगाए.

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'भारत की बात, सबके साथ' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन की मुख्य बातें:

  • बलात्कार की घटनाओं पर : किसी छोटी बालिका पर बलात्कार होता है. कितनी दर्दनाक घटना है ? लेकिन क्या हम ये कहेंगे कि तुम्हारी सरकार में इतने होते थे. मेरी सरकार में इतने होते हैं. बलात्कार बलात्कार होता है. एक बेटी के साथ अत्याचार कैसे सहन कर सकते हैं? मैंने लाल किले से नए सिरे से इस विषय को प्रस्तुत किया था. मैंने कहा कि बेटी शाम को देर से आती है तो हर मां-बाप पूछते हैं कि कहां गई थी. बेटियों को तो सब पूछ रहे हो कभी बेटों को तो पूछो कहां गए थे? ये पाप करने वाला किसी का तो बेटा है?
  • विदेश नीति पर : जो सच है वो डंके की चोट पर बोलना. जो सच है हिम्मत के साथ उसके साथ चलना. ये सामर्थ्य हिंदुस्तान ने दिखाया है. आप कल्पना कर सकते हैं आज़ादी के 70 साल तक हिंदुस्तान का प्रधानमंत्री इसराइल न जाए. कौन सा दवाब था? हिंदुस्तान में दम होना चाहिए कि जब हिंदुस्तान डंके की चोट पर कहे कि जब मुझे इसराइल जाना है मैं सीधा इसराइल जाऊंगा और जिस दिन मुझे फ़लस्तीन जाना होगा, उस दिन मैं हिम्मत के साथ फलस्तीन जाऊंगा. मैं सऊदी अरब भी जाऊंगा. जरुरत है तो मैं ईरान भी जाऊंगा. जब मैं चुनाव लड़ रहा था तो मेरी एक विषय पर भरपूर आलोचना होती थी. विदेश नीति बिल्कुल नहीं समझ पाएगा. ये देश का भट्टा बिठा देगा लेकिन आज चार साल बाद कोई ये सवाल नहीं उठा सकता है. उसका कारण मोदी नहीं है. मोदी को सवा सौ करोड़ देश वासियों की ताकत पर भरोसा है. मोदी को हिंदुस्तान की महान परंपराओं पर आस्था है. मुझे विश्वास है कि मैं दुनिया को भारत का सत्य समझा सकता हूं.
  • किसानों की आय के मुद्दे पर : हमने ठान लिया है कि हम 2022 तक देश के किसान की इनकम डबल करना चाहते हैं. उसके लिए उसकी लागत कम होनी चाहिए. हमारे देश में मैं जब मुख्यमंत्री था उस समय मैंने प्रधानमंत्री को जो सबसे ज्यादा चिट्ठियां लिखी हैं वो एक ही बात पर लिखी हैं. हमारे राज्य में यूरिया की जरूरत है हमें यूरिया का कोटा बढ़ा दीजिए. यूरिया के लिए लोग दो दो दिन तक कतार में खड़े रहते थे. मैंने आने के बाद कोई नए कारखाने नहीं लगाए लेकिन सिर्फ मैंने एफिशिएंसी में परिवर्तन किया. ईमानदारी को बल दिया. बिना नया कराखाना लगाए 20 लाख टन यूरिया का उत्पादन बढ़ गया.
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  • देश की समस्याओं पर : मेरे भीतर एक भरपूर विश्वास है कि मेरे देश में अगर लाखों समस्याएं हैं तो सवा सौ करोड़ समाधान भी हैं. गरीबी हटानी है तो गरीबों को शक्तिशाली बनाकर हटा सकते हैं न कि गरीबों को फीड करके हटा सकते हैं. उनको शक्ति देने के लिए जो कुछ करना पड़े करना चाहिए.
  • केंद्र सरकार पर : पहले जितना काम होता था आज तीन गुना होने लगा. रेल की पटरी डालनी हो, रेल की डबल लाइन करनी हो. सोलर एनर्जी लगानी हो. टॉयलेट बनाने का काम हो. देशवासियों को अपेक्षा है क्योंकि भरोसा है. गत दस साल में काम किस प्रकार होता था उसको देखेंगे तो पता चलेगा कि चार साल में कैसे कैसे हुआ. आपको आसमान ज़मीन का अंतर दिखेगा. अगर आपके पास नीति स्पष्ट हो, नीयत साफ हों, इरादे नेक हों और सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय करने का इरादा हो तो इसी व्यवस्था के तहत आप इच्छित परिणाम ले सकते हैं. सरकार ने ही देश चलाना है ये जो अहंकार है, उसे सरकारों को छोड़ देना चाहिए जनता जनार्दन ही शक्ति है उन्हें लेकर चलें. हम चाहें जैसा परिणाम जनता लाकर दे देगी.
  • दुनिया को योगदान पर : अगर दुनिया ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज की चिंता करती है तो भारत इंटरनेशल सोलार एलायंस का सोल्यूशन लेकर आया है. दुनिया टेररिज़्म से परेशान है तो भारत मानवतावादी शक्तियों को एक करके लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास करने वाले लोगों को एक करके भारत ने इसको लीड किया है. भारत ट्रेंड सेटर बन रहा है. भारत एजेंडा सेट कर रहा है. भारत अपना प्रोफाइल नए विश्वास के साथ पैदा कर पा रहा है.
  • दुनिया टेररिस्म से परेशान है ये मानवता के खिलाफ लड़ाई है. सभी मानवतावादी शक्तियों को एक होना चाहिए और भारत ने इसे लीड किया है.
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  • मोदी केयर पर : बच्चों को पढ़ाई, युवा को कमाई, बुजुर्गों को दवाई. ये चीजे हैं जो हमें एक स्वस्थ समाज के लिए चिंता करनी चाहिए. एक बीमारी पूरे परिवार को तबाह करके चली जाती है. पूरे हेल्थ सेक्टर में हम एक होलिस्टिक एप्रोच के साथ काम कर रहे हैं. मूल इच्छा है कि मैं अपने देश वासियों की केयर करूं.
  • जन भागेदारी पर : 1857 से 1947 तक का (वक्त) लें. आज़ादी का संघर्ष किसी भी कोने में रूकी नहीं था. आज़ादी की बात रूकी नहीं थी. लेकिन महात्मा गांधी ने पूरी भावना को नया रूप दे दिया. उन्होंने जन सामान्य को (आज़ादी के संघर्ष से) जोड़ा. महात्मा गांधी ने आज़ादी को जन आंदोलन से जोड़ा. गांधी जी ने एक साथ हिंदुस्तान के हर कोने-कोन में कोटि कोटि जन को खड़ा कर दिया, जिससे आज़ादी पाना आसान हो गया. मैं समझता हूं कि विकास भी जन आंदोलन बन जाना चाहिए.
  • भारतीय लोकतंत्र की ताकत पर: ये भारत के लोकतंत्र की ताकत है, भारत के संविधान का सामर्थ्य है वरना जो जगह कुछ परिवारों के लिए रिजर्व रहती है और लोकतंत्र में जनता जनार्दन ईश्वर का रूप है अगर वो फ़ैसला कर ले तो एक चाय बेचने वाला भी उनका प्रतिनिधि बनकर रॉयल पैलेस में हाथ मिला सकता है.
  • परिश्रम की शक्ति पर : सवा सौ करोड़ देशवासियों ने मुझे क्यों यहां बिठाया है. ना मेरी कोई जाति है और न मेरा कोई वंशवाद है. मेरे पास पूंजी एक ही है कठोर परिश्रम. मेरे पास पूंजी है प्रामाणिकता है. मेरे पास पूंजी है सवा सौ करोड़ देशवासियों का प्यार. मुझे ज्यादा से ज्यादा मेहनत करनी चाहिए. मैं देशवासियों को कहना चाहूंगा कि आप भी मुझे अपने जैसा मान लो. मैं वही हूं जो आप हैं. मेरे भीतर एक विद्यार्थी है. मैं शिक्षकों का आभारी हूं जिन्होंने मेरे भीतर के विद्यार्थी को कभी मरने नहीं दिया. मुझे जो दायित्व मिलता है मैं सीखने की कोशिश करता हूं. मैंने देशवासियों से कहा था कि मैं गलतियां कर सकता हूं लेकिन बद इरादे से कभी ग़लत नहीं करूंगा.
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  • विपक्ष पर : मैं मानता हूं कि ये लोकतंत्र की ब्यूटी है. लोकतंत्र में अगर विरोध नहीं होता है, आलोचना नहीं होती है तो वो लोकतंत्र कैसे हो सकता है. मैं मानता हूं कि मोदी सरकार की भरपूर आलोचना होनी चाहिए. क्रिटिसिज़्म से तपकर ही डेमोक्रेसी निखरती है. सरकार को भी सतर्क रखती है. आलोचना को मैं सौभाग्य मानता हूं. दुर्भाग्य ये है कि आलोचना के लिए बहुत रिसर्च करना पड़ता है. आज ऐसी आपाधापी का समय है कि बहुत कम लोग ऐसा कर पाते हैं. आलोचना ने उस मर्यादा को छोड़कर एलिगेशन (आरोपों) का रूप ले लिया है. एक तंदुरुस्त लोकतंत्र के लिए आलोचना को पुरस्कृत करना चाहिए और एलिगेशन से बचना चाहिए.

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  • ऊर्जा कहां से आती है: इसके कई जवाब हो सकते हैं. मैं पिछले दो दशक से डेली वन केजी, टू केजी(एक किलो, दो किलो) गालियां खाता हूं. सीधी बात बताता हूं. मेरे लिए सवा सौ करोड़ देशवासी, मेरा परिवार है. मैं नहीं चाहता कभी किसी पर बोझ बनूं. ऐसे ही हंसते खेलते, बातें करते चला जाऊं किसी दिन. ज़िदगी में किसी पर बोझ न बनूं. इसलिए शरीर को फिट रखता हूं.
  • इतिहास रचने पर : आपको मालूम है कि वेद किसने लिखे थे. अगर इतने बड़े रचयिता का नाम मालूम नहीं है. इतिहास में कहीं दर्ज नहीं है. तो मोदी क्या है एक छोटी सी चीज है जी. इतिहास नाम दर्ज करने के लिए न तो मोदी पैदा हुआ है और न मोदी का वो मक़सद है. मकसद है तो मेरा देश अजर अमर है. दुनिया याद करे तो मेरे देश को याद करे. मेरे देश के लिए दुनिया गर्व से कहे ये एक देश है जो मानव कल्याण का रास्ता दिखा सकता है. हिंदुस्तान की छवि चमकाने में ज़िंदगी खपाने में मुझे इंट्रेस्ट है.

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