उर्दू प्रेस रिव्यू: ‘हम नरेंद्र मोदी की गीदड़ भभकियों से नहीं डरते’

  • 22 अप्रैल 2018
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पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते पाकिस्तान की अंदरूनी सियासत के अलावा भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लंदन में दिया गया एक बयान भी सुर्ख़ियों में रहा.

सबसे पहले बात नरेंद्र मोदी के एक बयान की.

मोदी कॉमनवेल्थ देशों के प्रमुखों की बैठक में भाग लेने के लिए ब्रिटेन गए थे. इस दौरान उन्होंने लंदन में 'भारत की बात, सबके साथ' नाम के एक प्रोग्राम में भी हिस्सा लिया.

लंदन में वेस्टमिंस्टर के सेंट्रल हॉल में 'भारत की बात, सबके साथ' कार्यक्रम को आयोजित किया गया था. जाने माने गीतकार और सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी प्रधानमंत्री से अपने और पहले से तय लोगों के सवाल पूछ रहे थे.

सेंट्रल हॉल में भारतीय समुदाय के लोग शामिल थे. इस दौरान उनसे पाकिस्तान पर कथित सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में भी सवाल पूछा गया था.

मोदी की ज़ुबानी, सर्जिकल स्ट्राइक की कहानी

पाकिस्तान का जवाब क्या सिर्फ़ मोदी के पास है?

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भारतीय सेना ने सितंबर 2016 में दावा किया था कि उसने पाकिस्तान के साथ लगती नियंत्रण रेखा के पास सर्जिकल स्ट्राइक की है. तब पाकिस्तानी सेना ने भारत के दावों का खंडन करते हुए कहा था कि कार्रवाई नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी तक सीमित थी.

सर्जिकल स्ट्राइक पर पूछे गए सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "भारत का चरित्र अजेय रहने का है. विजयी रहने का है, लेकिन किसी के हक़ को छीनना ये भारत का चरित्र नहीं है. लेकिन जब कोई टेररिज़्म एक्सपोर्ट करने का उद्योग बनाकर बैठा हो, मेरे देश के निर्दोष नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया जाता हो, युद्ध लड़ने की ताक़त नहीं है. पीठ पर वार करने के प्रयास होते हों तो ये मोदी है, उसी भाषा में जवाब देना जानता है."

मोदी के इस बयान पर पाकिस्तान ने तीव्र प्रतिक्रिया दी है.

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भारत दहशतगर्दों की पीठ थपथपा रहा

अख़बार 'दुनिया' के मुताबिक़, पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डॉक्टर मोहम्मद फ़ैसल ने कहा कि भारत किसी भुलावे में न रहे, पाकिस्तान अपनी सुरक्षा करना जानता है.

प्रवक्ता का कहना था, "पाकिस्तान में भारतीय सर्जिकल स्ट्राइक का दावा झूठा, खोखला और बेबुनियाद है. बार-बार झूठ दोहराने से वो सच नहीं बन जाता.''

अख़बार 'नवा-ए-वक़्त' ने लिखा है, "मोदी की गीदड़ भभकियों से नहीं डरते. दुनिया जानती है दहशतगर्द और उसका सरगना कौन है. भारत पाकिस्तान में दहशतगर्दों की पीठ थपथपा रहा है. भारतीय जासूस कुलभूषण जाधव का पाकिस्तान की गिरफ़्त में होना इस बात का सबूत है.''

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Image caption पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद ख़ाक़ान अब्बासी

'रोज़नामा ख़बरें' के अनुसार पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने मोदी के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है.

अख़बार के अनुसार विदेश मंत्री का कहना था, "भारतीय प्रधानमंत्री का पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक करने का दावा अवाम का समर्थन हासिल करने का एक तरीक़ा है या फिर वो कश्मीर और भारत के दूसरे हिस्सों में ज़ुल्म और युद्ध अपराध की ज़िम्मेदार अपनी फ़ौज की ज़ुबान बोल रहे हैं."

मोदी के इस प्रोग्राम को अलग-अलग तरीक़ों से लगभग सारे अख़बारों ने कवर किया है.

अख़बार 'जंग' के मुताबिक़, प्रोग्राम के लगभग आख़िर में वहां मौजूद एक व्यक्ति ने मोदी से पूछा कि आप इतना काम कैसे कर लेते हैं, आप की सेहत का राज़ क्या है.

इसके जवाब में मोदी का कहना था, "मेरी सेहत का राज़ रोज़ाना दो किलो गाली खाना है और ये ख़ुराक़ मैं पिछले 20 सालों से ले रहा हूं.''

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नवाज़ की अपील ठुकराई गई

मोदी के अलावा अख़बारों में पाकिस्तान की अपनी राजनीति भी छाई रही.

पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ और उनकी बेटी मरियम नवाज़ ने नैब (नेशनल एकाउंटिबिलीटी ब्यूरो) अदालत में अर्ज़ी लगाई थी कि भ्रष्टाचार के एक मामले में उन दोनों को अदालत में हाज़िरी से सिर्फ़ एक हफ़्ते की मोहलत दे दी जाए.

लेकिन अदालत ने उनकी इस अपील को ठुकरा दिया है.

अख़बार 'एक्सप्रेस' के मुताबिक़, अदालत ने सिर्फ़ एक दिन शुक्रवार को ग़ैर-हाज़िर रहने की छूट दे दी और साथ में ये भी कहा कि शरीफ़ अगर अगली सुनवाई पर किसी मजबूरी के कारण अदालत में हाज़िर नहीं हो पाते हैं तो वह ग़ैर-हाज़िर रहने की अर्ज़ी पेश कर सकते हैं.

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