किम जोंग उन के इस उत्तर कोरिया को कितना जानते हैं आप

  • 22 अप्रैल 2018
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हालांकि उत्तर कोरिया में ज़्यादातर लोग ग़रीबी में जी रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यहां एक मध्य वर्ग भी बढ़ रहा है जो ख़ाली वक़्त में मज़े के लिए पैसे खर्च करता है.

इस तबके को डॉल्फिन एक्वेरियम से शॉपिंग सेंटर तक पसंद है. उत्तर कोरिया के धनी वर्ग के बीच हम देख सकते हैं कि कैसे उनकी पसंद और मांग बदल रही है.

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जब जैडेन (बदला हुआ नाम) ने पहली बार इंटरनेट इस्तेमाल किया तो वो पूरी तरह से अभिभूत थे. उन्होंने कहा, ''मुझे इंटरनेट से जो सूचनाएं मिलीं वो आंखें खोलने वाली थीं. मेरे लिए हर दिन चौंकाने वाला था क्योंकि यह दुनिया बिल्कुल अलग थी. मैंने कभी नहीं सोचा था कि चीज़ें वाक़ई ऐसी हैं. मुझे ग़ुस्सा भी आ रहा था और उदास भी था.''

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Image caption प्योंगयांग के वाटर पार्ट में लोग

जैडेन पांच साल पहले उत्तर कोरिया से दक्षिण कोरिया भाग गए थे. उत्तर कोरिया में ऐसे लोगों की छोटी तादाद है जो अपने मुल्क से भागने में कामयाब रहते हैं. जो भागने में सफल होते हैं उन्हें आज़ाद दुनिया देखने का मौक़ा मिल जाता है. ये काम ज़्यादातर युवा करते हैं.

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जैडेन ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया से अंग्रेज़ी भाषा सीखने के लिए कोर्स पूरा किया है. यहां उन्होंने यूट्यूब और विदेशी न्यूज़ वेबसाइट को भी पहली बार देखा.

जैडेन के लिए यह सब कुछ पहली बार था क्योंकि उत्तर कोरिया दुनिया का सबसे बंद देश है जहां बुनियादी आज़ादी भी बाधित है. उत्तर कोरिया में विदेशी मीडिया पर पूरी तरह से पाबंदी है.

हालांकि जैडेन जब उत्तर कोरिया में भी रह रहे थे तो इन पाबंदियों को चुनौती देते हुए प्रतिबंधित मनोरंजन के माध्यमों तक अपनी पहुंच बना लेते थे.

जैडेन कहते हैं, ''मैं ख़ाली वक़्त में फुटबॉल खेलता था. इसके साथ ही कंप्यूटर गेम या फ़िल्में देखता था. हालांकि इतनी पाबंदियां हैं कि आप बहुत कुछ कर नहीं सकते हैं. ज़्यादातर फ़िल्मों और गेम्स पर यहां पाबंदी है पर मैंने इन पाबंदियों को चालाकी से तोड़ा था.''

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कुछ गोपनीय मनोरंजन

दिलचस्प है कि यहां विदेशी मनोरंजन के लिए एक समृद्ध बाज़ार है. 'नॉर्थ कोरिया कॉन्फिडेंशियल' के सह-लेखक जेम्म पियर्सन का कहना है कि ज़्यादातर उत्तर कोरियाई छुपकर विदेशी मीडिया देखते हैं. उनका कहना है कि ये दक्षिण कोरियाई ड्रामा ख़ूब पसंद करते हैं. इस तरह के शो से दैनिक जीवन के रूटीन को त्याग सरहद तोड़ने का दबाव बनता है.

हालांकि इतनी भी आज़ादी नहीं है कि आप उत्तर कोरिया में मनोरंजन के सभी माध्यमों या विषयों को छुपकर देख सकते हैं. यहां तक कि उत्तर कोरिया के धनाढ्य तबके में भी ख़ाली वक़्त को लेकर उनकी धारणा बदल रही है.

कोरियाई डिवेलपमेंट इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के अनुसार उत्तर कोरिया में शॉपिंग मॉल्स, स्पोर्ट्स और सांस्कृतिक केंद्रों के निर्माण कार्य जमकर हुए हैं. इस रिपोर्ट के अनुसार जो उत्तर कोरियाई राजधानी प्योंगयांग में रहते हैं उनके लिए खाली वक़्त काटने के लिए ढेर सारे विकल्प हैं.

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सुंदरीकरण परियोजना

उत्तर कोरिया पर सैटलाइट इमेज के ज़रिए सालों तक निगरानी रखने वाले एक रिसर्चर कर्टिस मेल्विन का कहना है कि प्योंगयांग में कई वाटर पार्क हैं और एक डॉल्फिन एक्वेरियम है. उत्तर कोरिया में बाज़ार का विस्तार हुआ है. परिवहन व्यवस्था, आधारभूत ढांचा और अक्षय ऊर्जा को लेकर ख़ूब काम किए गए हैं. कार्टिस का कहना है कि ये चीज़ें एक दशक पहले तक नहीं थीं.

इन सारे बदलावों से पता चलता है कि उत्तर कोरिया में लोगों की ज़िंदगी में कैसे बदलाव आए हैं. कार्टिस का कहना है कि उत्तर कोरिया में सुख-सुविधा के साधन बढ़े हैं.

उन्होंने कहा, ''2011 में जब किम जोंग-उन ने अपने पिता की मौत के बाद सत्ता संभाली तो उन्होंने निर्माण और सुंदरीकरण के काम तेज़ी से शुरू किए. इसके साथ ही लोगों के जीवन स्तर में बदलाव आए हैं. प्योंगयांग में विकास के इन कामों से उसके तेवर में बदलाव आए हैं.''

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कार्टिस का कहना है कि किम जोंग-उन ने कंस्ट्रक्शन की कई परियोजनाओं को अंजाम दिया. इनमें नए हाउसिंग प्रोजेक्ट, एक डॉल्फिन एक्वेरियम, नए शॉपिंग मॉल, खेल को बढ़ावा के लिए कई निर्माण, नए पार्क, वाटर पार्क, 3डी सिनेमा और एक स्की रिसॉर्ट शामिल हैं. इसी तरह के कई काम प्योंगयांग से बाहर भी हुए हैं.

किम की सोच क्या

ऐसे में सवाल उठता है कि किम जोंग-उन ने सुख-सुविधा के ये काम क्यों करवाए? यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफ़ोर्निया में सेंटर फोर कोरियन स्टडीज के स्कॉलर एंड्री अब्राह्मियन का कहना है कि यह प्योंगयांग के आधुनिकीकरण का हिस्सा है और किम इसे 21वीं सदी की राजधानी के रूप में दुनिया के सामने पेश करना चाहते हैं.

एंड्री का कहना है कि इन कामों में बहुत पैसे खर्च नहीं हुए होंगे क्योंकि इनमें इस्तेमाल होने वाले मटीरियल्स देश के ही थे और काम सेना ने करवाया है. सुख-सुविधाओं के इन साधनों का निर्माण एक सकारात्मक क़दम है, लेकिन इनसे फ़ायदा देश के छोटे तबके को ही होना है.

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एक अलग दुनिया

उत्तर कोरिया में असमानता की खाई काफ़ी गहरी है. अर्थव्यवस्था में गति का ज़रिया भी सैन्य गतिविधियां ही हैं. इसका मतलब यह हुआ कि प्योंगयांग में आधुनिक सुख-सुविधाओं का आनंद वो ही तबका उठा पाएगा जिसके पास पैसा है.

एंड्री कहते हैं कि अगर आप ख़ास हैं तो स्क्वैश खेल सकते हैं, योग क्लास में जा सकते हैं, अच्छे रेस्ट्रॉन्ट में खाना खा सकते हैं. इसके लिए आपको प्योंगयांग में होना होगा और जेब में पैसे होने चाहिए. हालांकि प्योंगयांग में इन चीज़ों का होना भी कम मायने नहीं रखता है.

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जेम्स पियर्सन का कहना है कि उत्तर कोरिया के ग्रामीण इलाक़ों की तस्वीर बिल्कुल अलग है. जेम्स ने कहा, ''प्योंगयांग के बाहर लोगों का जीवन काफ़ी मुश्किल है. इनकी ज़िंदगी काफ़ी मुश्किल है. बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है. किसानों की हालत ठीक नहीं है. ज़्यादातर लोग पीने के साफ़ पानी से महरूम हैं. बिजली नहीं है. प्योंगयांग की तुलना में इनका जीवन काफ़ी मुश्किल है.''

जैडेन भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि उत्तर कोरिया में ग़रीबों और अमीरों के बीच की खाई काफ़ी गहरी है. जैडेन कहते हैं, ''कुछ लोग डिनर रेस्ट्रॉन्ट में करने की क्षमता रखते हैं, लेकिन ज़्यादातर आबादी पेट भरने के लिए संघर्ष कर रही है.''

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