क्यों ट्रेंड कर रहे हैं रघुराम 'रॉकस्टार' राजन

Raghuram Rajan
Image caption रघुराम राजन, भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर

भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन फिर से चर्चा में हैं.

ऐसा नहीं है कि शिकागो यूनिवर्सिटी में अपनी प्रतिष्ठित प्रोफ़ेसर की नौकरी छोड़ वो दोबारा भारत लौट रहे हैं.

दरअसल ब्रिटेन के फ़ाइनैंशियल टाइम्स अख़बार में छपी ख़बर के मुताबिक़ बैंक ऑफ़ इंग्लैंड के नए गवर्नर की रेस में शुमार नामों में राजन का नाम भी है.

बैंक के मौजूदा चेयरमैन माइक करनी का कार्यकाल 2019 में ख़त्म हो रहा है और नए प्रमुख की खोज शुरू हो रही है.

अख़बार ने जिन छह नामों का ज़िक्र किया है उनमें रघुराम राजन के अलावा सैनटैंडर बैंक चीफ़, भारतीय बूल की ब्रितानी महिला श्रीति वडेरा भी हैं.

हालांकि अख़बार ने ये भी लिखा है कि रघुराम राजन के ख़िलाफ़ एक ही बात कही जा सकती है, "राजन ने कोई संकेत नहीं दिया है कि उन्हें ये नौकरी चाहिए".

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Image caption फाइनैंशियल टाइम्स अखबार

कौन हैं रघुराम राजन

रघुराम राजन ने 2013 में भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर का पदभार संभाला था.

इससे पहले भी वे शिकागो यूनिवर्सिटी के बूथ बिज़नेस स्कूल में प्रोफ़ेसर थे जहाँ वे आरबीआई का कार्यकाल पूरा कर लौट गए.

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जन्मे 55 साल के रघुराम राजन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) नई दिल्ली, भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) अहमदाबाद और मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी के छात्र रह चुके हैं.

एक छात्र के रूप में वह हर जगह गोल्डमेडलिस्ट रहे हैं और बतौर आरबीआई गवर्नर उन्होंने भारत में सोने के आयात को नियंत्रित करने के अलावा नोटबंदी का दौर भी देखा था.

उनके कार्यकाल में नॉन परफ़ॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए), बैंकों की अंडर कैपिटलाइज़ेशन और रुपया को बचाने जैसे फ़ैसलों पर प्राथमिकता दी गई और उस दौरान विदेशी मुद्रा कोष भी 100 अरब डॉलर बढ़ा था.

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Image caption बैंक ऑफ़ इंग्लैंड

आरबीआई गवर्नर बनने के पहले वे भारत के वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार के रूप में भी काम कर चुके थे.

दूसरा कार्यकाल मिलने या न मिलने के कयासों के बीच राजन ने 2016 में ही घोषणा की थी कि वो उसी साल सितंबर में कार्यकाल ख़त्म होने के बाद पद से हट जाएंगे.

हालांकि उन्होंने कहा था कि जब भी देश को उनकी सेवा की ज़रूरत होगी, वो इसके लिए तैयार रहेंगे.

घोषणा के समय रघुराम राजन ने कहा था कि वो गवर्नर बने रहने के लिए 'तैयार' थे, लेकिन 'गहन चिंतन और सरकार से चर्चा' के बाद उन्होंने ये क़दम उठाया.

ग़ौरतलब है कि रघुराम राजन उन चुनिंदा लोगों में से थे जिन्होंने 2008 की आर्थिक मंदी की भविष्यवाणी की थी.

भारतीय अर्थजगत को संभालने के लिए उनकी तारीफ़ भी की जाती है जो वर्तमान में दुनिया की सबसे तेज़ उभरती अर्थव्यवस्थाओँ में एक है.

अभी तक रघुराम राजन की तरफ़ से एफ़टी अख़बार में छपी इस खबर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

उधर ब्रिटेन पिछले कई दशकों में सबसे बड़े आर्थिक फ़ैसले के बाद की तैयारी में है.

ब्रेक्सिट यानी यूरोपीय संघ से अलग होने का समय नज़दीक आ रहा है और इसके चलते बैंक ऑफ़ इंग्लैंड के प्रमुख की कुर्सी बेहद अहम है.

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