ओसामा बिन लादेन की 'हिफ़ाज़त' करने वाले को जर्मन सरकार दे रही है मदद

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Image caption सामी ए. पर जर्मनी में क़रीबी से निगरानी रखी जाती है

ओसामा बिन लादेन की कथित तौर पर कभी हिफ़ाज़त करने वाले एक व्यक्ति को जर्मनी की सरकार मदद के तौर पर उसे 95 हज़ार रुपए प्रति महीना दे रही है.

घोर दक्षिणपंथी पार्टी 'अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी' के पूछे जाने पर यह आंकड़ा वहां की एक क्षेत्रीय सरकार ने जारी किया है.

मदद पा रहा व्यक्ति ट्यूनीशिया का नागरिक है और जर्मनी में 1997 से रह रहा है. उनका नाम सामी ए बताया गया है.

गोपनीय कारणों से जर्मनी की मीडिया में व्यक्ति का पूरा नाम प्रकाशित नहीं किया गया है.

हालांकि, सामी ए ने जिहादियों से किसी तरह के संबंध से इनकार किया है. उन्हें प्रताड़ना का सामना न करना पड़े, इस डर से उन्हें वापस ट्यूनीशिया नहीं भेजा गया था.

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ओसामा बिन लादेन अल कायदा जिहादी नेटवर्क का संचालन करते थे और साल 2001 में अमरीका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले को अंजाम दिया था.

दस साल बाद 2011 में उन्हें अमरीकी सैनिकों के एक विशेष दल ने पाकिस्तान में गोली मार दी थी.

9/11 हमले में शामिल कम से कम तीन आत्मघाती पायलट उत्तर जर्मनी के हमबर्ग से चलने वाले अलक़ायदा के एक नेटवर्क के सदस्य थे.

जर्मनी में साल 2015 में आतंकवाद विरोधी जांच में पेश हुए गवाहों के मुताबिक़, सामी ए साल 2000 में अफ़ग़ानिस्तान में कई महीनों तक ओसामा बिन लादेन के बॉडीगार्ड रहे थे.

सामी ए ने इस आरोप से इनक़ार किया था लेकिन जजों ने गवाहों की बात पर विश्वास जताया था.

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टेक्निकल कोर्स की पढ़ाई की

साल 2006 में इस बात की भी जांच की गई थी कि सामी ए का अलक़ायदा से कथित संबंध था लेकिन उन पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई थी.

सामी ए जर्मनी मूल की अपनी पत्नी और चार बच्चे के साथ बोकम शहर में रहते हैं. यह शहर पश्चिमी जर्मनी में स्थित है.

साल 1999 में अस्थायी तौर पर रहने की इजाज़त मिलने के बाद उन्होंने कई टेक्निकल कोर्स की पढ़ाई की और 2005 में वो बोकम चले गए.

साल 2007 में उनके शरण के आवेदन को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया गया था कि वह सुरक्षा के लिए ख़तरा हैं.

उन्हें हर दिन पुलिस स्टेशन में हाज़िरी लगानी होती है.

जर्मनी की सरकार के मुताबिक़, उत्तर अफ़्रीका में संदिग्ध जिहादियों को यातनाओं का शिकार होना पड़ता है. इसलिए ट्यूनीशिया और पड़ोसी अरब देश प्रवासियों के लिए सुरक्षित देशों की सूची में शामिल नहीं हैं.

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