ब्लॉग: कम से कम 'वियतनाम की जंग' तो ना कहो

वियतनाम संग्रहालय

वियतनाम वॉर या अमरीकी वॉर? या फिर केवल नज़रिये का फ़र्क़ है?

बचपन से सुनते आ रहे हैं कि वियतनाम में 1955 से 1975 तक चलने वाला भयानक युद्ध "वियतनाम वॉर" था. स्कूलों की पुस्तकों में, मीडिया और इतिहास में भी इस जंग को वियतनामी युद्ध के नाम से जाना जाता है.

लेकिन वियतनाम में इसे अमरीकी वॉर कहा जाता है.

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वियतनाम ने नहीं, अमरीका ने की थी चढ़ाई

ग़ौर से सोचें और पूरी जानकारी हासिल करें तो वियतनामियों के तर्क में दम नज़र आएगा.

सच तो ये है कि वियतनाम ने अमरीका पर हमला नहीं किया था बल्कि अमरीका ने वियतनाम पर चढ़ाई की थी. तो ये जंग अमरीकियों की हुई ना?

हो ची मिन्ह सिटी में 'वियतनाम वॉर' से सम्बंधित एक विशाल युद्ध अवशेष संग्रहालय है जहाँ 99 प्रतिशत पर्यटक अमरीकी मिलेंगे. आधे बूढ़े और आधे युवा.

बुज़ुर्ग ये देखने आते हैं कि उस समय अमरीकी सेना में काम करने वाले उनके रिश्तेदारों के बारे में कुछ और जानकारी मिले.

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हमारे पुरखे इतने कठोर हो सकते हैं?

युवा शायद ये देखने आते हैं कि उनके पूर्वजों और नेताओं ने बेक़ुसूर लोगों पर किस तरह के ज़ुल्म ढाए.

रिचर्ड पेन्स नाम के एक युवा ने युद्ध की चंद तस्वीरों को देख कर कहा, "हमारे लोग इतने कठोर हो सकते हैं, ये यहाँ आकर पता चला."

दूसरी तरफ़ हमारे साथ एक वियतनामी युवा था जो हमारे लिए ट्रांसलेटर का काम कर रहा था. कुछ देर हमारे साथ संग्रहालय में रहा और फिर अचानक कहने लगा कि उसकी तबीयत ख़राब हो रही है.

बाद में उसने बताया कि वो अंदर नहीं जाता है. अंदर लगी तस्वीरों और हथियारों को देखकर उसे अमरीकियों की 'हैवानियत' का पूरा अहसास होने लगता है.

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मुश्किल अनुभव है संग्रहालय में काम करना

थाई नाम का 32 साल का यह वियतनामी युवा 1975 में समाप्त हुए युद्ध के 10 साल बाद पैदा हुआ फिर भी उस पर इसका गहरा असर है.

मैंने वहां मौजूद टूरिस्ट गाइड और कर्मचारियों से पूछा कि क्या वे संग्रहालय में काम करने के बाद मानसिक रूप से ठीक रह पाते हैं तो उनमें से कुछ ने कहा कि वो पेशेवर सोच के साथ काम करते हैं.

हालांकि उन्होंने पिछले कुछ कर्मचारियों के बारे में बताया जिन पर इसका बुरा असर हुआ और उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी.

जंग को पीछे छोड़ चुके हैं वियतनामी लोग

हालांकि वियतनामियों के दिलों में अब अमरीकियों के लिए नफ़रत नहीं है.

संग्रहालय की पहली मंज़िल के दरवाज़े के बाहर रखी प्रतिमा के हाथ में एक कबूतर है जो अमन और शांति का पैग़ाम देता है.

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तस्वीरों में क़ैद है अमरीका की ज़्यादतियां

वियतनाम के इस संग्रहालय में मज़बूत दिल वाले ही जा सकते हैं. अंदर तस्वीरों के ज़रिये अमरीकी फौजियों की ज़्यादतियां दिखाई गयी हैं.

रासायनिक गैस का इस्तेमाल करके पूरी फ़सल बर्बाद करना, इन गैसों को गांव वालों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल करना, पूछताछ के दौरान थर्ड डिग्री मेथड का खुलेआम इस्तेमाल करना और बेदर्दी से और क़रीब से वियतनामियों को गोलियों से भून डालना, ये कुछ ऐसी घटनाएं हैं जिनसे अमरीका भी अब शर्मिंदा है.

युद्ध के बाद अनेक तरह के पदार्थों और गैसों के इस्तेमाल के कारण अगली नस्ल अपाहिज पैदा हुई. इसकी दर्जनों तस्वीरें वहां लगी हैं. महिलाओं के ख़िलाफ़ अत्याचार की मिसालें तस्वीरों में हैं.

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अमरीका ने पूरे देश को ख़त्म कर दिया था

यानी कि हर वो जुर्म जो इंसान के ख़िलाफ़ किए जा सकते हैं वे अमरीकियों ने वियतनाम में किए हैं. थाई ने कहा अमरीका ने पूरे देश को ही नष्ट कर दिया था.

वहां अंग्रेज़ी बोलने वाली एक पर्यटक ने तबाही की इन तस्वीरों को देख कर कहा कि "आज का वियतनाम राख के ढेर से उठा है. आज वियतनाम काफ़ी हद तक खुशहाल है, देश में बुनियादी ढाँचे खड़े हैं और लोग विदेश की यात्राएं करने लगे हैं."

लेकिन सबसे अहम ये कि वो वियतनाम वॉर को पीछे छोड़ चुके हैं और अमरीकियों को माफ़ कर चुके हैं. उनकी केवल यही दरख़्वास्त है कि उस युद्ध को 'वियतनाम वॉर' न कहा जाए.

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भारत को कितना जानते हैं वियतनाम के लोग?

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