चीन के वुहान में मिले मोदी-जिनपिंग

  • 27 अप्रैल 2018
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Image caption चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिले नरेंद्र मोदी

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन के दौरे पर चीन में हैं जहां उन्होंने शुक्रवार को राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाक़ात की.

हालांकि प्रधानमंत्री बनने के बाद से नरेंद्र मोदी की ये चौथी चीन यात्रा है लेकिन इससे पहले दोनों नेता कभी ऐसी 'अनौपचारिक शिखर वार्ता' के लिए नहीं मिले हैं.

पीएम मोदी ने कहा कि ऐसी अनौपचारिक मुलाक़ातें होती रहनी चाहिए. साथ ही उन्होंने शी जिनपिंग को अगले साल भारत आने का न्योता दिया.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ "मोदी ने कहा कि मुझे उम्मीद है ऐसी अनौपचारिक मुलाक़ातें दोनों देशों के बीच परंपरा बन जाएं. मुझे ख़ुशी होगी अगर 2019 में ऐसी मुलाक़ात भारत में हो सके."

चीन के हुबेई प्रांत की राजधानी वुहान में हुई इस 'अनौपचारिक मुलाक़ात' में शी जिनपिंग ने कहा कि "हम आने वाले समय में भारत और चीन के बीच सहयोग का तेज़ और सुनहरा भविष्य देखते हैं."

इससे पहले शी जिनपिंग पीएम मोदी को हुबेई के म्यूज़ियम ले गए जहां चीनी कलाकारों ने भारत के प्रधानमंत्री के स्वागत में सांस्कृतिक कार्यक्रम किया.

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नरेंद्र मोदी ने शी जिनपिंग को गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए धन्यवाद दिया.

डीडी न्यूज़ के मुताबिक़ मोदी ने कहा कि भारत और चीन की अर्थव्यवस्था दुनिया के बाक़ी देशों के लिए काफ़ी अहम हैं और दोनों देश दुनिया में शांति क़ायम करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.

नरेंद्र मोदी इससे पहले एक बार द्विपक्षीय वार्ता के लिए, 2016 में जी-20 सम्मेलन और 2017 में ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन गए थे.

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Image caption शी जिनपिंग पीएम मोदी को हुबेई के प्रांतीय म्यूज़ियम ले गए

हालांकि, इन तमाम दौरों के बाद भी बीते साल दोनों देशों के संबंधों में कई बार खटास देखने को मिली.

चीन ने न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में भारत के दाखिल होने का विरोध किया. जैश ए मोहम्मद के नेता मसूद अज़हर को संयुक्त राष्ट्र के जरिए आतंकवादी घोषित कराने की भारत की कोशिश को भी चीन ने वीटो किया था. भूटान सीमा पर डोकलाम में दोनों देशों के बीच करीब 73 दिन तक तनातनी की स्थिति बनी रही.

भारत और चीन की गिनती एशिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में होती है. भारत चीन की महात्वाकांक्षी वन बेल्ट वन रोड परियोजना का हिस्सा नहीं है. लेकिन इसके बाद भी दोनों देश व्यापारिक क्षेत्र में विस्तार की बड़ी संभावना देखते हैं.

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मोदी के दौरे के पहले भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज शंघाई को-ओपरेशन ऑर्गानाइज़ेशन (एससीओ) की बैठक में हिस्सा लेने के लिए चीन में थीं. उन्होंने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की. सुषमा के दौरे को प्रधानमंत्री मोदी के दौरे की तैयारी के तौर पर देखा गया था.

मोदी इस साल जून में भी चीन में होंगे. वो शंघाई को-ओपरेशन ऑर्गनाइजेशन सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. लेकिन उस सम्मेलन में आठ देशों के प्रतिनिधि होंगे. ऐसे में मोदी को जिनपिंग से बातचीत का ज़्यादा वक़्त नहीं मिल सकेगा. इसी वजह से ये मुलाक़ात अहम मानी जा रही है.

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