पाकिस्तान: देखिए, भामला स्तूप में बुद्ध की दुर्लभ मूर्तियां

  • 1 मई 2018
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Image caption भामला स्तूप पाकिस्तान के उत्तरी-पश्चिमी में स्थित ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह ज़िले में है. भामला को साल 1929 में ब्रिटिश पुरातत्वविद् सर जॉन मार्शल ने खोजा था.
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Image caption पुरातत्वविदों का मानना है कि 2300 साल पहले इस क्षेत्र पर बौद्ध धर्म का नियंत्रण था. इस प्राचीन बौद्ध स्थल में बुद्ध के समय की लगभग 500 वस्तुएं मिली हैं.
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Image caption सभी मूर्तियों में से ये एकमात्र मूर्ति है जिसका सिर उसके स्थान पर बरकरार है. यहां मूर्ति को गैर-इस्लामी माना जाता है. और ऐसी धारणा है कि सिर को नष्ट करना एक महान काम है.
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Image caption भामला में स्थित 14 मीटर लम्बी बुद्ध की सोई हुई मूर्ति के अवशेष मिले हैं. ये तीसरी शताब्दी की है. पुरातत्वविदों का कहना है कि इस तरह की ये दुनिया की सबसे पुरानी मूर्ति है.
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Image caption ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह के पुरातत्व विभाग ने 2012 में इस इलाके में काम करना शुरू किया था. और तब इस बौद्ध मठ के बारे में पता चला. माना जाता है कि चौथी सदी के आसपास ये मठ बनाया गया था. भारत पर हमला करने के लिए जब हुन इस इलाके से आगे बढ़े थे तब उन्होंने इसे नष्ट कर दिया था.
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Image caption स्तूप खानपुर बांध के पास स्थित है. सरकार इसे लोकप्रिय पर्यटक स्थल बनाना चाहती है लेकिन यहां की खराब सड़कों की वजह से यहां पर्यटक आ नहीं पाते हैं.
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Image caption भमला स्तूप को यूनिस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में सूचीबद्ध किया गया है. यहां से खुदाई के समय मिली वस्तुओं को ज़िले के अलग-अलग संग्रहालयों में भेज दिया गया है. हाल के वक्त में ख़जाने की खोज करने वालों ने इसे तोड़ दिया था.

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