सियासी सलाह देने वाली कंपनी कैम्ब्रिज एनालिटिका बंद होगी

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फ़ेसबुक के डेटा के सहारे अमरीकी चुनावों में कथित तौर पर डॉनल्ड ट्रंप की मदद करने वाली कंपनी कैम्ब्रिज एनालिटिका बंद होने जा रही है.

राजनीतिक पार्टियों को परामर्श देने वाली कंपनी कैम्ब्रिज एनालिटिका पर करीब 8.7 करोड़ फ़ेसबुक यूजर के डेटा चोरी का आरोप है.

कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर जारी एक बयान में कहा है कि हालांकि उस पर लगे आरोप आधारहीन हैं, पर ग्राहक न होने की वजह से उसे अपना व्यवसाय बंद करना पड़ रहा है.

इस कंपनी पर आरोप है कि उसने फ़ेसबुक से चुराये डेटा का इस्तेमाल 2016 में हुए अमरीकी चुनावों को प्रभावित करने के लिए किया था.

ब्रिटेन के चैनल 4 के एक वीडियो में कंपनी के अधिकारी यह कहते हुए देखे गए कि ये साज़िश और रिश्वतखोरी की मदद से नेताओं को बदनाम करते हैं.

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भारत में क्रैम्ब्रिज एनालिटिका के तार

भारत में क्रैम्ब्रिज एनालिटिका एससीएल इंडिया से जुड़ा है. इसकी वेबसाइट के मुताबिक़ यह लंदन के एससीएल ग्रुप और ओवलेनो बिज़नेस इंटेलिजेंस (ओबीआई) प्राइवेट लिमिटेड का साझा उपक्रम है.

कैम्ब्रिज एनालिटिका स्कैंडल सामने आने के बाद फ़ेसबुक के संस्थापक मार्क ज़करबर्ग ने स्वीकार किया था कि उनकी कंपनी से "ग़लतियां हुई हैं."

उन्होंने ऐसे इंतज़ाम करने का आश्वासन दिया था जिनसे थर्ड-पार्टी ऐप्स के लिए लोगों की जानकारियां हासिल करना मुश्किल हो जाए.

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'आधारहीन आरोप'

कंपनी बंद होने के कारणों के बारे में जब बीबीसी ने कैम्ब्रिज एनालिटिका की प्रवक्ता क्लारेंस मिचेल से पूछा तो उन्होंने हमें कंपनी की वेबसाइट पर छपा बयान पढ़ने को कहा.

कंपनी की बेवसाइट पर मौजूद बयान में कहा गया है, "बीते कई महीनों से कैम्ब्रिज एनलिटिका पर कई आधारहीन आरोप लगे हैं और कंपनी की कोशिशों के बावजूद उसे उन गतिविधियों के लिए बदनाम किया गया जो कानूनी रूप से सही हैं. ये गतिविधियां सियासी और कॉमर्शियल क्षेत्र में ऑनलाइन विज्ञापनों का स्वीकार्य हिस्सा रही हैं."

"हमें अपने कर्मचारियों पर पूरा भरोसा है कि वो हमेशा नैतिक और कानूनी रूप से सही क़दम उठाते रहे हैं. मीडिया कवरेज की वजह से कंपनी के लगभग सभी ग्राहक और सप्लायर ग़ायब हो गए हैं. इसकी वजह से ये फ़ैसला लिया गया है कि अब इस व्यवसाय में ऑपरेट करना आर्थिक रूप से फ़ायदे का सौदा नहीं रह गया है."

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