दस देश जो अपनी आय का बड़ा हिस्सा सेना पर खर्च करते हैं

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साल 2017 में पूरी दुनिया के देशों का सैन्य खर्च कुल 1700 अरब डॉलर तक पहुंच गया. इसमें से सिर्फ़ अमरीका ही एक देश था जिसने 610 अरब डॉलर अपनी सेना पर खर्च किया. वहीं चीन ने बीते साल 12 अरब डॉलर और रूस ने 13.9 अरब डॉलर अपने सेना के लिए खर्च किए.

ये माना जा सकता है कि दुनिया की बड़ी आर्थिक शक्ति अपनी सेना और रक्षा मामलों में सबसे अधिक खर्च करती है. लेकिन जानकार मानते हैं कि देश के जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पाद के आधार पर ये तीनों मुल्क उस सूची में सबसे ऊपर जगह नहीं बनाते जो अपने देश की अधिकतर आय अपनी सेना पर खर्च करते हैं.

दुनिया के देशों के सैन्य खर्चे पर नज़र रखने वाली संस्था स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी सीप्री की जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार साल 2017 में अमरीका ने अपनी आय यानी अपने जीडीपी का केवल 3.1 फीसदी हिस्सा अपनी सेना पर खर्च किया.

चीन और रूस की बात करें तो चीन ने अपनी जीडीपी का 1.9 फीसदी और रूस ने 4.3 फीसदी हिस्सा सैन्य खर्च किया है. इन आंकड़ों के अनुसार इस सूची में ऊपर से 20 देशों में भी अमरीका शामिल नहीं है.

तो क्या भारत उन 10 देशों की लिस्ट में है जो अपनी जीडीपी के प्रतिशत के हिसाब सैन्य साज़ो-सामान पर मोटी रकम ख़र्च करते हैं?

एक नज़र इस लिस्ट पर -

10- बहरीन

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बहरीन एक द्वीपसमूह है जिस पर सुन्नी राजा का शासन और यहां सेना में भी ऊंचे पदों पर भी राजवंश के परिवार के लोग काबिज़ हैं.

लेकिन इसके 14 लाख नागरिक शिया मुसलमान हैं. ये यहां पर जारी तनाव का अहम कारण रहा है.

2011 में अरब स्प्रिंग के दौरान यहां प्रदर्शनकारी सरकार में अधिक भागीदारी की मांग कर रहे थे. इस दौरान प्रदर्शनकारियों पर नियंत्रण पाने के लिए गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल की सशस्त्र बलों को तैनात किया गया था.

2017 में बहरीन ने 1.396 अरब डॉलर अपनी सेना के लिए खर्च किए जो प्रति व्यक्ति 936 डॉलर हैं और जीडीपी का 4.1 फीसद है.

9- रूस

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1997 में रूस ने अपनी जीडीपी का 4.3 फीसद हिस्सा सेना पर खर्च किया लेकिन 1998 में उसने ये खर्च कम किया और मात्र जीडीपी का 3.0 फीसद ही सेना को दिया.

इसके बाद से सेना पर रूस का खर्च हर साल थोड़ा-थोड़ा बढ़ता रहा और साल 2016 तक ये जीडीपी का 5.5 फीसद हो गया, लेकिन 2017 में रूस ने फिर इसे घटा कर 4.3 फीसद कर दिया है.

सीप्री के मुख्य जांचकर्ता सीमोन वेज़मैन के अनुसार रूस 2014 के बाद से आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा है और इसका परिणाम सैन्य खर्चे में कटौती करना हो सकता है. अपनी सेना का आधुनिकीकरण फिलहाल रूस की प्राथमिकता है.

8- लेबनान

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लेबनान मध्यपूर्व के उन 6 देशों में शामिल है जिनके पास सबसे अधिक सैन्य साजो सामान है. 1975 से 1990 के बीच देश एक लंबे गृहयुद्ध से जूझता रहा है जिसके बाद से देश के भीतर गहरे मतभेद पैदा हुए हैं.

इसकी घरेलू और विदेश नीती पर उसके पड़ोसी सीरिया और कथित इस्लामी समूह हिज़बुलला का काफी प्रभाव रहा है.

2017 में लेबनन ने 2.411 अरब डॉलर अपनी सेना के लिए खर्च किए जो जीडीपी का 4.5 फीसदी है.

7- इसराइल

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1948 में बने इसराइल के संबंध अपने पड़ोसी मुल्कों से तनावपूर्ण रहे हैं. इसके एक तरफ सीरिया है तो दूसरी तरफ लेबनन के हिज़बुल्ला मिलिशिया हैं जिन्हें ईरान का समर्थन प्राप्त है.

ईरान सीरियाई सरकार का समर्थन करता है जो रूस और तुर्की के साथ मिल कर वहां इस्लामिक स्टेट को खदेड़ने के काम में लगी है. इसराइल सीरिया पर अमरीकी हमले का समर्थन करता है और असद सरकार का समर्थन नहीं करता.

2017 में इसराइल ने 16.489 अरब डॉलर अपनी सेना के लिए खर्च किए जो जीडीपी का 4.7 फीसदी है.

6- जॉर्डन

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साल 1946 में जॉर्डन आज़ाद हुआ और तब से ले कर अब तक यहां के हालात संघर्षपूर्ण ही रहे हैं. 1967 में जॉर्डन ने इसराइल के ख़िलाफ़ 6 दिन के युद्ध किया जिसके बाद इसके वेस्ट बैंक और पूर्वी येरूशलम पर अपना नियंत्रण खो दिया. 1948 में हुए अरब-इसराइल युद्ध के बाद इन इलाकों पर जॉर्डन का कब्ज़ा था.

1984 में जॉर्डन ने इसराइल के साथ शांत समझौता कर लिया लेकिन कथित इस्लमिक स्टेट के कारण देश के भीतर तनाव जारी रहा.

2017 में जॉर्डन ने 1.939 अरब डॉलर अपनी सेना के लिए खर्च किए जो जीडीपी का 4.8 फीसदी है.

5- अल्जीरिया

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अल्जीरिया फ्रांस का उपनिवेश हुआ करता था. आज़ादी की एक लंबी लड़ाई के बाद 1962 में ये देश आज़ाद हो गया लेकिन देश के भीतर हिंसा थमी नहीं.

हिंसा का एक बड़ कारण धार्मिक और समाज के भीतर मौजूद आज़द ख्याल समुदायों के बीच का तनाव था.

1992 में सैन्य सरकार वाले अल्जीरिया में बहु-पार्टी चुनावों को रद्द कर दिया. इसके बाद 1992 से ले कर 1998 के बीच देश के भीतर हिंसक संघर्ष जारी रहे जिस कारण यहां एक लाख से अधिक लोगों की मौत हुई. तब से ले कर अब तक यहां इस्लामी चरमपंथियों के हमले आम हो गए हैं.

सिप्री के अनुसार अल्जीरिया ने 2017 में अपनी सेना पर 10.073 अरब डॉलर खर्च किए जो जीडीपी का 5.7 फीसदी हिस्सा है.

4. कुवैत

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17,818 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैले कुवैत की जनसंख्या करीब 30 लाख है. सऊदी अरब, ईरान और ईराक़ से घिरा ये छोटे से देश में संवैधानिक राजतंत्र है.

यहां अमरीकी सेना के कई सैन्य अड्डे हैं जो कथित इस्लामिक स्टेट से लड़ने वाली अंतरराष्ट्रीय गठबंधन सेना का हिस्सा हैं.

2017 में कुवैत ने अपनी सेना पर कुल 6.831 अरब डॉलर खर्च किए जो इसकी जीडीपी का 5.8 फीसदी हिस्सा है.

3. कांगो गणराज्य

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अपनी जीडीपी का 6.2 फीसदी हिस्सा अपनी सेना पर लगा कर अफ्रीकी देश कांगो गणराज्य इस सूची में शामिल हुआ है. कांगो ने 2017 में कुल 0.484 अरब डॉलर अपने सेना पर खर्च किया है.

कांगो देश के भीतर संघर्ष की स्थिति से जूझ रहा है और यहां के राष्ट्रपति डेनी सालो न्गुसो बीते लगभग तीन दशकों से सत्ता पर काबिज़ रहे हैं. इससे पहले वो सेना में रह चुके हैं.

2- सऊदी अरब

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2015 से सऊदी सरकार यमन में हूथी विद्रोहियों के ख़िलाफ़ संघर्ष में कई देशों की गठबंधन सेना का नेतृत्व कर रही है. यमन में ईरान हुथी विद्रोहियों का समर्थन कर रहा है. साथ ही सीरिया में कथित इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों को खदेड़ने की अंतरराष्ट्रीय मुहिम में भी सऊदी शामिल है.

सीप्री के आंकड़ों के अनुसार 2017 में सऊदी अरब ने 69.413 अरब डॉलर यानी अपनी जीडीपी का 10 फीसदी हिस्सा अपनी सेना के लिए खर्च किया.

1 - ओमान

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होमरुज़ की खाड़ी में मौजूद होने ओमान के पड़ोसी देश ईरान, सऊदी अरब और यमन हैं. बीते एक दशक में ओमान ने लगातार अपना सैन्य खर्च बढ़ाया है.

ये अब दुनिया का वो मुल्क बन गया है जो अपनी आय का सबसे बड़ा हिस्सा अपनी सना के लिए इस्तेमाल करता है.

2017 में इसने 8.686 अरब डॉलर अपनी सेना के लिए खर्च किए जो इसकी जीडीपी का 12 फीसदी है.

तो भारत कौन से नंबर पर है?

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भारत ने सेना के लिए अपनी जीडीपी का अब तक का सबसे बड़ा हिस्सा साल 1988 में खर्च किया था. ये आंकड़ा 3.7 फीसद का था.

इसके बाद से लगातार भारत ने सैन्य साजो सामान पर होने वाले खर्च के आंकड़े को कम किया है. 2007 में भारत ने जीडीपी का 2.3 फीसदी हिस्सा ही सेना के लिए खर्च किया था.

साल 2015 को छोड़ दें तो 2012 से ले कर 2017 तक भारत लगातार अपनी जीडीपी का 2.5 फीसदी हिस्सा सेना के लिए खर्च करता आ रहा है. 2015 में ये खर्च देश की जीडीपी का 2.4 फीसदी हिस्सा था.

(ये मुल्कों के कुल जीडीपी का सैन्य खर्चे का प्रतिशत मात्र है. इस सूची में शीर्ष पर रहने वाला देश ज़रूरी नहीं कि बड़ी सैन्य शक्ति हो बल्कि ये वो देश हैं जो अपने जीडीपी का बड़ा हिस्सा सैन्य साजो सामान पर खर्च करते हैं.)

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