दुबई की शहज़ादी, एक पूर्व फ़्रांसीसी जासूस और 'आज़ादी' की ख़्वाहिश

  • 6 मई 2018
शेख़ लातिफ़ा इमेज कॉपीरइट SHEIKHA LATIFA

मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा है कि दुबई प्रशासन ग़ुमशुदा शहज़ादी शेख़ लातिफ़ा के बारे में दुनिया को जानकारी दे.

माना जा रहा है कि दुबई के शासक की बेटी शेख़ लातिफ़ा ने मार्च में देश छोड़ने का प्रयास किया था ताकि वो विदेश में आज़ाद ज़िंदगी बिता सकें.

लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि उनका विलासिता के साज़ोसामान से भरा समुद्री जहाज़ नोस्ट्रोमो, भारत के तट के पास इंटरसेप्ट कर लिया गया था.

इसके बाद उन्हें वापस दुबई ले जाया गया था.

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Image caption समुद्री जहाज़ नोस्ट्रोमो भारत के तट के पास इंटरसेप्ट कर लिया गया था, शेख़ लातिफ़ा इसी जहाज़ में थीं

'आपराधिक रिकॉर्ड'

इस घटना के बाद से राजकुमारी को सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है. दुबई प्रशासन का कहना है कि वो क़ानूनी कारणों की वजह से इस विषय बात नहीं कर सकते.

ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा है कि दुबई को राजकुमारी की लोकेशन और उनकी क़ानूनी स्थिति के बारे में बयान देना चाहिए.

संस्था ने कहा, "अगर प्रशासन ने राजकुमारी की लोकेशन और स्टेट्स ज़ाहिर नहीं की तो इसे उन्हें ज़बरदस्ती ग़ायब किया जाना माना जाएगा."

दुबई प्रशासन ने बीबीसी को बताया है कि जो लोग शेख़ लातिफ़ा के ग़ायब होने के दावे कर रहे हैं उनका रिकॉर्ड आपराधिक है.

Image caption शेख़ लातिफ़ा को स्काई डाइविंग का भी शौक था

कौन है शेख़ा लातिफ़ा?

शुक्रवार को बीबीसी के कार्यक्रम न्यूज़नाइट में इस सारे मामले पर एक विस्तृत रिपोर्ट दिखाई गई है.

शेख़ लातिफ़ा दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम की बेटी हैं.

ख़बरों के अनुसार उन्हें देश छोड़ने की कोशिश करते वक्त पकड़ लिया गया था.

न्यूज़नाइट कार्यक्रम के मुताबिक दुबई की राजकुमारी को भागने में एक पूर्व फ़्रांसीसी जासूस और फ़िनलैंड की एक मार्शल आर्ट ट्रेनर ने मदद की थी.

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Image caption शेख़ लातिफ़ा के पिता शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम

राजकुमारी का वीडियो संदेश

राजकुमारी को पहले ही शक था कि अगर उनकी योजना छिपी न रही, तो उनके लिए इसके परिणाम घातक हो सकते हैं.

उन्होंने एक वीडियो संदेश में इसकी ओर इशारा किया था.

वीडियो में राजकुमारी को ये कहते देखा जा सकता है, "मैं ये वीडियो बना रही हूं. हो सकता है ये मेरा आख़िरी वीडियो हो. अगर आप मेरा ये वीडियो देख पा रहे हैं तो मैं बता दूं कि या तो अब तक में मर गई हूं या बहुत ही ख़राब हालत में हूं."

ये वीडियो राजकुमारी के दोस्तों ने रिलीज़ किया है.

ग़ायब होने से पहले फ़िल्माए गए वीडियो को सार्वजनिक करने का मक़सद, संयुक्त अरब अमीरात की सरकार पर दवाब डालना है.

वीडियो में राजकुमारी आगे कहती हैं, "मेरे पिता को सिर्फ़ अपनी साख की परवाह है."

लेकिन हालात हमेशा ऐसे नहीं थे. शेख़ लातिफ़ा एक लोकप्रिय राजकुमारी थीं. उन्हें स्काई डाइविंग का भी शौक था.

आसमान से कूदने से पहले वो अक्सर अपने आप को अपने वतन के झंडे में लपेट लेती थीं. अपने स्काई डाइविंग के वीडियो में वो ख़ुश दिखती हैं.

Image caption राजकुमारी की दोस्त और मार्शल आर्ट्स ट्रेनर टीना

सोने के पिंजरे में क़ैद पंछी

लेकिन हक़ीक़त इससे कहीं दूर और डरावनी थी.

उनकी एक दोस्त ने बीबीसी को बताया कि वो सोने के पिंजरे में क़ैद पंछी की तरह थीं.

उनकी ये हैं मित्र हैं फ़िनलैंड की नागिरक और मार्शल आर्ट ट्रेनर मित्र टीना योहियानेन.

टीना ने न्यूज़नाइट को बताया, "लातिफ़ा अपनी ज़िंदगी खुलकर जीना चाहती थीं. राजकुमारी ने साल 2002 में भी भागने की कोशिश की थी. तब उन्हें पकड़ कर जेल में डाल दिया गया था. लातिफ़ा ने साढ़े तीन साल जेल में बिताए थे. "

Image caption पूर्व फ़्रांसीसी जासूस अर्वे ज़बेयर की योजना अंडरवॉटर टॉरपीडो का इस्तेमाल करने की थी. लेकिन राजकुमारी के पास इससे आसान प्लान था

एक पूर्व फ़्रांसीसी जासूस

पिछले साल की गर्मियों में राजकुमारी ने फ़्रांस की जासूसी सेवा के पूर्व अधिकारी से संपर्क साधा.

अर्वे ज़बेयर नाम का ये एजेंट ख़ुद भी कई साल पहले भेष बदलकर दुबई से भागा था. तब दुबई में ज़बयेर पर ग़बन का आरोप लगा था.

ज़बेयर ने बीबीसी को बताया, "शुरू में वो भी वही रास्ता अपनाने वाली थीं जो मैंने अपनाया था. मैंने कहा पहले आपको अंडरवॉटर टॉरपीडो और नेवी सील जैसे कपड़ों का इस्तेमाल करना सीखना होगा. इसके बाद लातिफ़ा ने कोई 30 हज़ार डॉलर ख़र्च कर ये सारा सामान ख़रीदा."

लेकिन बाद में लातिफ़ा ने भागने का ये रास्ता छोड़ दिया.

भागने का प्लान

राजकुमार ने एक आसान-सी योजना चुनी. वो अपनी मित्र टीना योहियानेन के साथ कार में सीमा पार कर ओमान पहुंचीं.

वहां से वो एक छोटी नाव में सवार हुईं, जो उन्हें अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में खड़े नोस्ट्रोमो नाम के एक लग्ज़री यॉट तक ले गई.

नोस्ट्रोमो पर पूर्व फ़्रांसीसी जासूस ज़बेयर पहले से ही उनका इंतज़ार कर रहे थे. वहां से इस जहाज़ ने भारत का रुख़ किया.

मार्च में संयुक्त राज्य अमीरात के निवेदन पर इंटरपोल ने एक नया रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया.

ये नोटिस ऊपर बताई गई कहानी की तस्दीक करता है. हालांकि रेड कॉर्नर नोटिस में कहा गया कि लातिफ़ा अपनी मर्ज़ी से नहीं गई हैं बल्कि उन्हें अग़वा कर लिया गया है.

Image caption राजकुमारी और उनकी मार्शल आर्ट ट्रेनर कार से ओमान आईं और वहां से छोटी नाव में सवार होकर अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र की ओर निकल गईं

जीपीएस से ट्रैकिंग बंद

इसके बाद कहानी धुंधली पड़ जाती है और इससे तथ्यों को परखना मुश्किल होता जाता है.

पकड़े जाने के डर से नोस्ट्रोमो का पब्लिक ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर दिया गया था. इस वजह से आगे के रास्ते के बारे में सार्वजनिक रिकॉर्ड नहीं है.

लेकिन बीबीसी को नोस्ट्रोमो के सैटेलाइट कम्यूनिकेशन सिस्टम का डेटा मिला है. इस डेटा में जहाज़ को गोवा के तट के क़रीब तक पहुंचते हुए देखा जा सकता है.

लेकिन उसके बाद सैटेलाइट ट्रैकर भी बंद हो जाता है. फ़्रांसीसी जासूस ने बताया कि ओमान से भारत की तरफ़ जाते वक्त ही कुछ नावों ने उनका पीछा शुरू कर दिया था.

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Image caption दुबई शहर

और फिर चार मार्च का वो दिन...

इस साल चार मार्च को राजकुमारी की दौड़ का अंत हो गया. ज़बेयर डेक पर थे. राजकुमारी अपनी दोस्त टीना के साथ नीचे अपनी केबिन में थीं.

टीना बताती हैं, "मैंने कुछ शोर-सा सुना. जहाज़ के डेक से गोली चलने की आवाज़ आने लगी. बाद में मुझे पता चला कि ये आवाज़ दरअसल 'स्टन ग्रेनेड्स' की थी."

आगे की कहानी ज़बेयर की ज़ुबानी, "मैं बाहर खड़ा था. मुझे लगा कि कुछ तो गड़बड़ है. तभी मैंने देखा एक नाव तेज़ गति से हमारी ओर बढ़ रही है. उस नाव पर सवार सैनिकों ने हमारी तरफ़ बंदूकें तान रखी थी. उनके चेहरे पर साफ़ लिखा था कि वो हमें मारने वाले हैं."

हेलीकॉप्टर की आवाज़ और स्टन ग्रेनेड

टीना कहती हैं कि नीचे केबिन में राजकुमारी और वो एक बाथरूम में छिप गईं और एक-दूसरे से लिपट गईं. वो कह रही थी कि कोई मुझे वापस ले जाने आया है.

"इसके बाद हम केबिन से बाहर आ गए. बाहर आते ही मुझे धक्का देकर ज़मीन पर गिरा दिया गया. और मेरे हाथ मेरी पीठ पर बांध दिए गए."

इसके बाद फ़्रांसीसी जासूस ने लातिफ़ा के चीखने-चिल्लाने की आवाज़ें सुनीं. उन्होंने सुना कि लातिफ़ा कह रही थीं कि वो वापस जाने के बजाय, इसी जहाज़ पर मरना पसंद करेंगी.

पांच मिनट बाद हेलीकॉप्टर आया और राजकुमारी को लेकर उड़ गया.

यहां कहानी में एक नया मोड़ आता है.

'कमॉन लातिफ़ा, लेट्स गो होम'

शिप पर सारी बात अरबी में न होकर अंग्रेज़ी में हो रही थी. ज़बेयर का कहना है कि नोस्ट्रोमो पर पहला क़दम रखने वाले नाविक अमीराती नहीं बल्कि भारतीय थे.

"पहले मुझे नहीं पता चला कि वो इंडियन हैं, लेकिन बाद में मैंने देखा कि उनकी नाव पर इंडियन कोस्ट गार्ड लिखा है."

और वो राजकुमारी से कह रहे थे - 'कमॉन लातिफ़ा, लेट्स गो होम'

ज़बेयर ने लातिफ़ा को ये भी कहते सुना कि वो राजनीतिक शरण लेना चाहती है. भारत सरकार ने इस बारे में बीबीसी के सवाल पर कोई टिप्पणी नहीं दी है.

जब हेलीकॉप्टर नोस्ट्रोमो से लातिफ़ा को लेकर उड़ गया तो जहाज़ पर अमीराती सैनिक आए और उसे लेकर दुबई की ओर निकल पड़े.

टीना और ज़बेयर भी साथ थे. एक हफ़्ते तक धमकियों और पूछताछ के बाद दोनों को छोड़ दिया गया.

कुछ बदलाव आएगा?

उस दिन के बाद से लातिफ़ा ग़ायब है. उन्हें किसी ने नहीं देखा और न ही किसी ने उनसे बात की है.

उसके दोस्तों ने वीडियो जारी किया है उसके आख़िर में लातिफ़ा को ये कहते हुए सुना जा सकता है, "मुझे उम्मीद है कि ये मेरी ज़िंदगी का नया चैप्टर होगा जहां मुझे चुप नहीं रहना होगा. अगर मैं नहीं छूट सकी तो भी चाहूंगी कि इस सबसे कोई सकारात्मक बदलाव आएगा."

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