ट्रंप! तुमने गलती कर दी: ख़ामेनेई

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ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप पर पलटवार किया है और वो भी बेहद कड़े शब्दों के साथ.

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते से अमरीका को अलग करने की घोषणा के बाद ख़ामेनेई ने कहा, ''ट्रंप, तुमने गलती कर दी.''

ईरान के सर्वोच्च नेता ख़ामेनेई ने ट्रंप की घोषणा को बहुत ही गिरा हुआ बताया जिसका कोई महत्व नहीं है.

ईरान की संसद में परमाणु समझौते की एक कॉपी भी जलाई गई, सांसदों ने अपने हाथों में बैनर पकड़े हुए थे और वे 'अमरीका मुर्दाबाद' के नारे लगा रहे थे.

इससे पहले ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने ये भरोसा दिलाया कि उनका देश बहुराष्ट्रीय परमाणु समझौते पर 'डटा' रहेगा.

ईरानी राष्ट्रपति ने शिकायत भरे लहजे में कहा कि अमरीका अंतरराष्ट्रीय समझौते की अपनी प्रतिबद्धता पर कायम नहीं रहता है.

ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा, ''अमरीका ने बता दिया है कि वो अपने कहे का सम्मान नहीं करता. मैंने ईरान के आणविक ऊर्जा संगठन को आदेश दिया है कि यूरेनियम के औद्योगिक स्तर पर संवर्धन का काम शुरू करने की तैयारी करे.''

उन्होंने कहा कि वो अपने सहयोगियों और परमाणु समझौते में शामिल अन्य देशों के साथ बातचीत के लिए ''कुछ हफ़्ते ही'' इंतज़ार करेंगे.

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Image caption ईरान की संसद में ट्रंप के फ़ैसले का विरोध किया गया

ईरान पर प्रतिबंध

उधर अमरीका ने कहा है कि ईरान पर दोबारा आर्थिक प्रतिबंध तुरंत नहीं लगाए जाएंगे, बल्कि इसके लिए 90 और 180 दिन का इंतज़ार किया जाएगा.

अमरीका ने कहा है कि उन्हीं उद्योगों पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे जिनकी चर्चा 2015 के डील में की गई थी.

इनमें ईरान का तेल सेक्टर, विमान निर्यात, क़ीमती धातु का व्यापार और ईरानी सरकार के अमरीकी डॉलर ख़रीदने की कोशिशें शामिल हैं.

डोनल्ड ट्रंप ने पहले शिकायत की थी कि समझौता ईरान की परमाणु गतिविधियों पर एक नियत समय के लिए रोक लगाता है और ये मिसाइलों के विकास को रोकने में नाकाम रहा है. साथ ही इससे ईरान को 100 अरब डॉलर मिल गए जिसका इस्तेमाल उसने हथियार हासिल करने, चरमपंथ को बढ़ावा देने और पूरे मध्य पूर्व में दमन के लिए लिए किया.

ईरान के साथ परमाणु समझौते में शामिल रहे फ़्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन ने अमरीका के इस फ़ैसले पर खेद प्रकट किया है.

फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि फ़्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते को छोड़ने के अमरीका के फ़ैसले पर अफ़सोस ज़ाहिर करते हैं.

यूरोपीय संघ के विदेश मामलों के प्रमुख फ़ेडेरिका मोघेरिनी ने कहा कि संघ परमाणु समझौते को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध रहा है.

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क्या था समझौता

जुलाई 2015 में ओबामा प्रशासन में हुए इस समझौते के तहत ईरान पर हथियार ख़रीदने पर पाँच साल तक प्रतिबंध लगाया गया था, साथ ही मिसाइल प्रतिबंधों की समयसीमा आठ साल तय की गई थी.

बदले में ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम का बड़ा हिस्सा बंद कर दिया और बचे हुए हिस्से की निगरानी अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों से कराने पर राज़ी हो गया था.

समझौते पर दस्तख़त करने वाले ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने राष्ट्रपति ट्रंप से इस समझौते से अलग न होने की अपील की थी. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपने हाल की अमरीकी यात्रा के दौरान भी कहा था कि वे मानते हैं कि ईरान के साथ हुआ समझौता 'बेस्ट' नहीं था, लेकिन इसके अलावा कोई विकल्प भी नहीं था.

इन देशों ने ये संकेत भी दिया था कि राष्ट्रपति ट्रंप चाहे जो भी फ़ैसला करें, वे ईरान के साथ हुए तीन साल पुराने समझौते पर कायम रहेंगे.

ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी कह चुके हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ परमाणु समझौता खत्म किया तो अमरीका को ऐतिहासिक रूप से पछताना होगा.

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