इसराइल और ईरान की लड़ाई: तीन बड़े सवाल

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सीरिया में ईरानी ठिकानों पर इसराइल की बमबारी के बाद ये आशंकाएं बढ़ गई हैं कि दो पुराने दुश्मनों के बीच हालात कभी भी बिगड़ सकते हैं.

इसराइल और ईरान के बीच जो हो रहा है, उसका अपना एक इतिहास है.

ये हालात क्यों और कैसे बने, बीबीसी ने अपने पाठकों को तीन सवालों के ज़रिये यह समझाने की कोशिश की है.

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क्या इसराइल और ईरान दुश्मन देश हैं?

साल 1979 में ईरान की क्रांति ने कट्टरपंथियों को सत्ता में आने का मौका दिया और तभी से ईरानी नेता इसराइल को मिटाने की बात करते रहे हैं.

ईरान, इसराइल के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता है और उसका कहना है कि इसराइल ने मुसलमानों की ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा कर रखा है.

दूसरी तरफ़, इसराइल भी ईरान को एक ख़तरे के तौर पर देखता है. उसने हमेशा ही ये कहा है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए.

मध्य-पूर्व में ईरान के बढ़ते असर से भी इसराइल के नेताओं की चिंताएं बढ़ जाती हैं.

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Image caption इसराइल की सेना गोलान पहाड़ी पर अपने कब्ज़े का बचाव करती है जिसकी सीमा सीरिया से लगती है

इसराइल-ईरान विवाद से सीरिया का क्या लेना-देना?

साल 2011 से ही सीरिया में जंग की स्थिति बनी हुई है और इसराइल बेचैनी से इसे देखता रहा है.

सीरिया में बशर अल असद की सरकार और उनका विरोध कर रहे विद्रोही लड़ाकों के बीच चल रहे संघर्ष से इसराइल ने दूरी बनाए रखी.

लेकिन, सीरिया में ईरान बशर अल असद की हुकूमत का समर्थन करता है. वो विद्रोहियों से सरकार की लड़ाई में बशर अल-असद का मदद कर रहा है.

ईरान ने वहां अपने हज़ारों लड़ाके और सैनिक सलाहकार भेजे हैं.

इसराइल को इस बात की भी चिंता है कि ईरान गुप-चुप तरीके से लेबनान में विद्रोहियों को हथियार दे रहा है.

लेबनान इसराइल का पड़ोसी देश है जिससे वो ख़तरा महसूस करता है.

इसराइल ने बार-बार ये कहा है कि वो सीरिया में ईरान को सैनिक अड्डे बनाने नहीं देगा जिनका इस्तेमाल उसके ख़िलाफ़ किया जा सकता है.

इसलिए सीरिया में जैसे-जैसे ईरान की मौजूदगी बढ़ रही है, वैसे-वैसे ईरानी ठिकानों पर इसराइल के हमले भी तेज़ होते जा रहे हैं.

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Image caption इसराइल के झंडे में आग लगाने की तैयारी करते ईरानी प्रदर्शनकारी

क्या ईरान और इसराइल के बीच कभी जंग हुई है?

नहीं. लेकिन ईरान उन गुटों का लंबे समय से समर्थन करता रहा है जो इसराइल को निशाना बनाते हैं. जैसे हिज्बुल्ला और फलस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास.

अगर कभी दोनों मुल्कों के बीच लड़ाई हुई तो दोनों ही पक्षों के लिए ये बड़े पैमाने पर बर्बादी की वजह बनेगी.

ईरान के पास लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम मिसाइलों का बड़ा जखीरा है और इसराइल की सरहदों पर भारी असलहों से लैस उसके सहयोगी.

इसराइल के पास भी एक ताक़तवर सेना है और माना जाता है कि उसके पास परमाणु हथियार भी हैं. इसराइल को संयुक्त राष्ट्र का भी जबर्दस्त समर्थन हासिल है.

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