कैसे पता चलेगा कि उत्तर कोरिया सचमुच परमाणु हथियार खत्म कर रहा है

  • 21 मई 2018
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उत्तर कोरिया ने कहा है वो इसी हफ़्ते विदेशी पत्रकारों की मौजूदगी में अपने न्यूक्लियर टेस्ट साइट्स को नष्ट करना शुरू करेगा.

लेकिन हक़ीक़त में एक देश को अपने परमाणु हथियार ख़त्म करने के लिए क्या करना होता है?

उत्तर कोरिया के उत्तर-पूर्वी पहाड़ी क्षेत्र में प्योंगयांग का परमाणु परीक्षण केंद्र पंग्गी-री कॉम्प्लेक्स है. साल 2006 से यहां छह परमाणु परीक्षण किए जा चुके हैं.

उत्तर कोरिया का कहना है कि इसे ख़त्म करने के लिए 'तकनीकी कदम' 23 से 25 मई के बीच अपनाए जाएंगे.

पंग्गी-री कॉम्प्लेक्स उत्तर कोरिया का परमाणु परीक्षण स्थल है, जहां मैंटप पहाड़ों के नीचे एक सुरंग है.

ऐसा बताया जाता है कि परमाणु परीक्षणों के चलते ये जगह आशिंक रूप से ध्वस्त हो चुका है.

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Image caption पंग्गी-री कॉम्प्लेक्स की सैटेलाइट तस्वीर

दावे की पुष्टि कैसे होगी

उत्तर कोरिया का कहना है कि विदेशी नीतियों पर नज़र रखने वाले दक्षिण कोरिया और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों को बुलाने का मक़सद उनके 'पारदर्शी तरीकों' को दिखाना है.

उन्हें ये दिखाया जाएगा कि सुरंग नष्ट किए जा रहे हैं और निगरानी केंद्र बंद कर दिया गया है. ये स्पष्ट नहीं है कि विशेषज्ञों को भी इसके लिए बुलाया गया है या नहीं.

परमाणु हथियारों को ख़त्म करने के आकलन के लिए यह ज़रूरी समझा जाता है.

कॉम्प्रिहेंसिव न्यूक्लियर टेस्ट बैन ट्रिटी ऑर्गेनाइजेशन (सीटीबीसीओ) को अगर बुलाया जाता है तो इस बात की पुष्टि हो सकेगी की वो जगह परमाणु परीक्षण के लिए पूरी तरह खत्म किया जा चुका है.

संयुक्त राष्ट्र से समर्थन प्राप्त इस संगठन का मक़सद पूरी दुनिया में परमाणु परीक्षण पर प्रतिबंध लगाना है.

ये अपने तरीकों से सुनिश्चित करता है कि परीक्षण पूरी तरह बंद हो चुके हैं. इसके विशेषज्ञ परमाणु परीक्षण स्थलों को पूरी तरह खत्म किए जाने पर तकनीकी फैसले देते हैं.

क्या इससे समस्या का समाधान होगा?

समारोह के बाद सैटेलाइट तस्वीरों का सरकारें इस्तेमाल करेगी और स्वतंत्र विशेषज्ञ इसकी निगरानी करेंगे.

नई बिल्डिंग और उपकरण ये इशारा करते हैं कि उत्तर कोरिया परीक्षण की योजना इसे दोबारा शुरू करने की है.

लेकिन अगर ऐसा होता है तो अंडरग्राउंड परीक्षणों को छिपाना मुश्किल होगा क्योंकि इससे भूकंप जैसे हालात उत्पन्न होते हैं.

पंग्गी-री को खत्म करने की उत्तर कोरिया की सोच यह दर्शाती है कि उन्हें यह लगता है कि उनके परमाणु कार्यक्रम का उचित विकास हो चुका है और पूर्ण परीक्षण की अब कोई ज़रूरत नहीं है.

इस जगह को बंद करने का फ़ैसला पूरी तरह परमाणु हथियारों को ख़त्म करने की दिशा में पहला कदम ही माना जाएगा क्योंकि यहां के परमाणु कार्यक्रम ज़रूरत के हिसाब से विकसित किए जा चुके हैं.

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परमाणु परीक्षणों पर विराम

उत्तर कोरिया कई तरह के इंतजाम कर चुका है जहां यूरेनियम और प्लूटोनियम को समृद्ध किया जा सकता है. इनका इस्तेमाल परमाणु हथियारों को बनाने में किया जाता है.

इनमें से योंगब्योन न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स एक है, जहां यूरेनियम खानों के साथ-साथ सेंटरीफ्यूज, परमाणु रिएक्टर और रिप्रोसेसिंग के काम हो सकते हैं.

इसके अलावा, उत्तर कोरिया के पास इंटर बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम है, जिसके जरिए हथियारों को इस्तेमाल किया जा सकता है.

हालांकि कुछ वक्त पहले कोरियाई देशों के बीच हुए मुलाकात में उत्तर कोरिया ने इस बात की घोषणा की थी कि वह परमाणु परीक्षणों पर विराम लगा चुका है.

उत्तर कोरिया के 'परमाणु हथियारों को खत्म' करने की प्रतिबद्धता अमरीका के लंबे समय से की जा रही मांग से अलग है.

अमरीका इसके 'पूरी तरह खत्म करने, दोबारा नहीं बनाए जाने वाले और इसकी पुष्टि' की मांग करता रहा है.

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पुष्टि करने में सालों लगेंगे

हालांकि उत्तर कोरिया का पंग्गी-री को खत्म करना भी अस्थिरता को कम करेगा.

साल 1994 में 'अग्रीड फ्रेमवर्क' नाम के संगठन ने अपनी जांच में ये पाया था कि तेल और हल्के पानी वाले परमाणु रिएक्टरों के बदले उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु कार्यक्रम रोक दिए थे.

परमाणु तकनीक के उपयोग की देखरेख करने वाली संस्थान द इंटरनेशनल एटोमिक एनर्जी एजेंसी ने निरीक्षण कर के सफलतापूर्वक यह सत्यापित किया था कि उत्तर कोरिया परमाणु सामग्री का इस्तेमाल हथियारों को बनाने के लिए नहीं कर रहा है.

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इसे दोबारा शुरू नहीं किया जा सकता था पर साल 2002 में समझौता खत्म होने के बाद प्योंगयांग ने इसकी घोषणा की थी कि वो योंगब्योन को फिर से शुरू करने जा रहा है.

2005 में उत्तर कोरिया ने कहा था कि 'आत्मरक्षा' के लिए वो परमाणु हथियार बनाए हैं.

भविष्य में किसी तरह के परमाणु हथियारों को खत्म करने के फ़ैसले को बेहतर निगरानी की जरूरत होगी.

पंग्गी-री एक सप्ताह में भले ही खत्म हो जाए पर पूरी तरह परमाणु हथियारों के खत्म होने की पुष्टि करने में सालों लग जाएंगे.

(लेखिका मिडिलबरी इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंटरनेशनल स्टडीज़ में रिसर्च असिस्टेंट हैं)

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