पब्लिक टेलीफ़ोन से धंधा करने वाला एक दिन बना अरबपति

  • 26 मई 2018
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जब वो 19 साल का था, उसे फ़ोन पर इंग्लिश कोर्स बेचने की नौकरी मिली थी. परेशानी यह थी कि उसके घर में फ़ोन नहीं था, पर उसने यह फ़ैसला किया कि वो यह काम करेगा और अपने लक्ष्यों से पीछे नहीं हटेगा.

फ्लावियो अगस्तो दा सिल्वा उस वक्त रियो डी जेनेरियो में रहते थे और उनके मां-बाप के पास टेलीफ़ोन लाइन नहीं थी.

1991 में ब्राजील में टेलीफ़ोन लाइन लेना अमीरी की निशानी होती थी और इसके लिए करीब 65 हज़ार रुपये चुकाने होते थे. उनके परिवार के पास इतना पैसा नहीं था, अगर होता भी तो इसे लगाने की वेटिंग लिस्ट दो साल की थी.

उस समय की अधिकांश आबादी के लिए मोबाइल फ़ोन दूर की कौड़ी थी. फ्लावियो अगस्तो ने अपनी नौकरी बचाने के लिए दूसरा रास्ता निकाला.

उन्होंने सैंटोस ड्युमोन्ट एयरपोर्ट का पब्लिक टेलीफ़ोन इस्तेमाल करने की सोची और धीरे-धीरे एयरपोर्ट का टर्मिनल उनका नया ऑफिस बन गया.

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शुरुआत

आज फ्लावियो अगस्तो का अपना स्कूल है, जिसका नाम उन्होंने वाइज अप एजुकेशन रखा है. इस स्कूल का वार्षिक कारोबार 772 करोड़ रुपये का है और आज वो करीब दो हज़ार करोड़ रुपये के मालिक हैं.

46 साल के यह उद्यमी कहते हैं, "मुझे कोई संदेह नहीं है कि उस एयरपोर्ट पर मैंने अपना लक्ष्य हासिल किया."

जब फ्लावियो अगस्तो ने फोन पर बेचने की शुरुआत की, उन्हें यह महसूस हुआ कि उनके अंदर एयरपोर्ट की शोर में भी इंग्लिश कोर्स बेचने की कला है.

कुछ समय बाद ही वो कंपनी के कॉमर्शियल डायरेक्टर बन गए और चार साल बाद उन्होंने खुद का स्कूल शुरू करने का फ़ैसला किया.

वो कहते हैं, "मैंने महसूस किया कि मैं तैयार था. जिस कंपनी में काम कर रहा था, वो कोर्स में बेहतरी के लिए ज़रूरी निवेश को तैयार नहीं थी."

"मैं प्रोडक्ट को जानता था और मैं ये भी जानता था कि मैं उसे बेहतर कर सकता हूं."

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आसान नहीं थे रास्ते

हालांकि ये सब करना फ्लावियो के लिए आसान नहीं था. उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा.

पहली चुनौती ये थी कि उन्हें अंग्रेजी नहीं आती थी. उन्हें अंग्रेजी के कुछ शब्द ही मालूम थे.

दूसरी चुनौती ये थी कि फ्लावियो को बैंक से लोन तक नहीं मिला था और उन्हें बाज़ार से अधिक ब्याज़ दरों पर कर्ज लेना पड़ा.

फ्लावियो ने वाइज अप बिजनेस इंग्लिश स्कूल की स्थापना की और उन्होंने टारगेड ऑडिएंस उन्हें बनाया, जो अन्य कंपनियों के निशाने पर नहीं थे.

उस समय ऐसी अधिकतर कंपनियां बच्चे और देश से बाहर घूमने जाने वालों को अपना ग्राहक बनाते थे.

फ्लावियो ने नौकरी ढूंढ रहे युवाओं को अपना ग्राहक बनाया.

वो कहते हैं, "उस समय विदेशी कंपनियां ब्राजील आ रही थी और इसलिए अंग्रेजी उनकी नौकरियों में चयन के लिए ज़रूरी होने वाला था."

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फुटबॉल क्लब में निवेश

साल 1995 में ब्राजील की अर्थव्यवस्था बुरे दौर से गुजर रही थी. महंगाई की दर 148 फ़ीसदी थी, बावजूद इसके पहले साल उनके स्कूल में एक हज़ार युवाओं ने एडमिशन लिया.

तीन साल बाद फ्लावियो ऐसे 24 स्कूलों के मालिक हो गए. ये स्कूल विभिन्न शहरों में शुरू किए गए थे.

अपने बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने 2012 में फ्रेंचाइज मॉडल की शुरुआत की, जिसके बाद उनकी कंपनी के 400 ब्रांच खोले गए.

इसके बाद फ्लावियो ने कुछ नया करने का फ़ैसला किया. उन्हें लगा कि उन्होंने कंपनी उस ऊंचाई पर पहुंचा दिया है, जैसा वो चाहते थे. उन्होंने अपनी कंपनी को ब्राजील के एक समूह अब्रील को 1,640 करोड़ रुपये में बेच दिया.

एक साल बाद 2013 में उन्होंने ऑर्लांडो सिटी फुटबॉल क्लब 820 करोड़ रुपये निवेश किया. यह निवेश सॉकर लीग में टीम के शामिल होने से कुछ दिन पहले किया गया था.

हाल के सालों में क्लब की वैल्यू बढ़ी है और आज इसकी कीमत करीब साढ़े तीन हज़ार करोड़ रुपये आंकी गई है.

पर उन्होंने निवेश के लिए ऑर्लांडो को ही क्यों चुना? ऐसा उन्होंने इसलिए किया क्योंकि ऑर्लांडो ब्राजील के लोगों की पसंदीदा जगह है.

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फिर वाइज अप का क्या हुआ?

जिस कंपनी ने इसे खरीदा था, वो इसे चला नहीं पाई और उनके मालिकों ने इसे आधी कीमत पर फ्लावियो को वापस बेचने की पेशकश की.

उन्होंने दोबारा इसे ख़रीदा और आज इस कंपनी के 440 स्कूल हो चुके हैं. फ्लावियो ने 2020 तक लातीन अमरीका में एक हज़ार ब्रांच खोलने का लक्ष्य रखा है.

व्यापार विश्लेषक रिचर्ड मोट्टा कहते हैं कि फ्लावियो एक "बोल्ड व्यापारी" के रूप में जाने जाते हैं, जो अपनी कंपनी को अपनी दूरदर्शी सोच से आगे ले जाते हैं.

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