आयरलैंडः नए गर्भपात क़ानून का नाम भारतीय महिला के नाम पर रखने की मांग

  • 28 मई 2018
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Image caption अक्टूबर, 2012 में गर्भपात के बाद सविता हलप्पनवार की मौत हो गई थी

ये वो कहानी है जिसने एक आंदोलन को जन्म दिया और उनका चेहरा इस आंदोलन का प्रतीक बन गया.

आयरलैंड के एक अस्पताल में सविता हलप्पनवार की मौत अक्टूबर, 2012 में मिसकैरेज के बाद हुए इंफेक्शन की वजह से हो गई थी.

उनके परिवार ने बताया कि सविता ने मिसकैरेज के दौरान बच्चा गिराने के लिए कई बार अनुरोध किया था, लेकिन डॉक्टरों ने ये कहते हुए इससे इनकार कर दिया कि पेट में बच्चा अब भी ज़िंदा है.

सविता की मौत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी और आयरलैंड में गर्भपात क़ानून में बदलाव लाने के लिए एक अभियान चलाया गया.

आयरलैंड में क़ानून में बदलाव पर हुए जनमत संग्रह को मिले समर्थन के बाद उनके माता-पिता ने कहा कि अब सविता को शांति मिलेगी.

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Image caption सविता के माता-पिता अक्कामहादेवी यालगी और अंदानप्पा यालगी भारत में रहते हैं

आयरलैंड में जनमत संग्रह

25 मई को आयरलैंड में गर्भपात क़ानून को लेकर जनमत संग्रह कराया गया जिसमें लोगों ने गर्भपात क़ानून के बदलाव के समर्थन में वोट किया है.

सविता हलप्पनवार की मौत उनके शादी के चार साल बाद 28 अक्तूबर 2012 को हुई थी.

कर्नाटक के हुबली ज़िले के मूल निवासी उनके वैज्ञानिक पति प्रवीण हलप्पनवार आयरलैंड में छह सालों से रह रहे थे. सविता खुद डेंटिस्ट थीं.

ये उनका पहला बच्चा था और मौत के वक्त उनके गर्भ में 17 हफ्ते का भ्रूण था.

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सविता की आत्मा को 'शांति' मिलेगी

सविता की मौत का मामला वहां की अदालत में गया जहां ज्यूरी ने उसे 'चिकित्सकीय हादसा' करार दिया.

लेकिन उनके परिवार का कहना है कि अगर गर्भपात की अनुमति दी जाती तो सविता की जान बचाई जा सकती थी.

घटना के छह साल हो चुके हैं और अब आयरलैंड के गर्भपात के क़ानून में बदलाव का लोगों ने स्वागत किया है.

कर्नाटक के बेलगाम में रहने वाली सविता की मां अक्कामहादेवी यालगी ने क़ानून में बदलाव को 'जीत' बताया है.

अक्कामहादेवी यालगी ने कहा, "यह छह साल की लड़ाई थी और यह लड़ाई अब जीती जा चुकी है. अब उनकी आत्मा को शांति मिलेगी."

उन्होंने ने बीबीसी संवाददाता स्वाति पाटिल से कहा, "हम उन लोगों के आभारी हैं जिन्होंने मेरी बेटी के लिए लड़ाई लड़ी."

सविता के पिता अंदानप्पा यालगी ने अन्य मीडिया आउटलेट्स से कहा है कि वो नए क़ानून का नाम सविता के नाम पर रखने की मांग का समर्थन करते हैं.

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क़ानून में बदलाव क्यों नहीं हो रहा था?

आयरलैंड के क़ानून में परिवर्तन के लिए महिला संगठन लंबे समय से आवाज़ उठाते रहे हैं मगर बहुसंख्यक कैथोलिक समुदाय में ऐसे लोगों की बड़ी तादाद है जो हर हाल में गर्भपात के विरोधी हैं.

गॉलवे यूनिवर्सिटी में समाजशास्त्र की प्रोफ़ेसर रह चुकीं डॉक्टर नाटा डूवेरी ने तब बीबीसी को बताया था, "यह विशुद्ध रूप से वोट की राजनीति है. कोई भी राजनीतिक दल कैथोलिक समुदाय को नाराज़ नहीं करना चाहता."

"सभी इस मुद्दे पर ढुलमुल रवैया अपनाते हैं. ये दोहरे मानदंड हैं. वे अच्छी तरह जानते हैं कि लड़कियां गर्भपात के लिए ब्रिटेन जाएंगी मगर वे इस बारे में कुछ नहीं करते."

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