कौन हैं पुतिन के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलने वाले रूसी पत्रकार आर्काडी बाबचेंको

  • 31 मई 2018
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Image caption आर्काडी बाबचेंको ने अपनी जान पर ख़तरा बताते हुए रूस छोड़ दिया था

यूक्रेन की पुलिस ने कहा था कि उन्हें राजधानी कीव में रूस के पत्रकार आर्काडी बाबचेंको की गोलियों से छलनी लाश मिली है.

ये ख़बर आने के कुछ ही घंटों बाद 41 साल के आर्काडी बाबचेंको ज़िंदा एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में सबके सामने आ गए.

बाबचेंको की पत्नी ने कहा था कि उन्हें वो घर के बाहर ख़ून में लथपथ मिले थे.

उनकी पत्नी ने बताया था कि आर्काडी बाबचेंको ब्रेड खरीदने के लिए घर से निकले थे, जब वो वापस आए तो किसी ने उनपर पीछे से गोलियां चला दीं और अस्पताल ले जाते हुए एम्बुलेंस में उनकी मौत हो गई.

यूक्रेन कीव की पुलिस के प्रमुख एंड्रिए ने स्थानीय प्रेस से बात करते हुए आशंका जताई थी कि बाबचेंको की हत्या उनके काम की वजह से की गई है.

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Image caption यूक्रेन की पुलिस का मानना था कि आर्काडी बाबचेंको को उनके काम की वजह से मारा गया

पुतिन के मुखर आलोचक

पुलिस ने मामले की जांच शुरू करने की बात भी कही थी. बाबचेंको को दिसंबर 2016 में जान से मारने की धमकियां मिलने लगी थीं.

उस वक्त उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट लिखा था, जिसमें उस साल हुए रूस के एक सैन्य प्लेन क्रैश का ज़िक्र था.

ये प्लेन एक सैन्य गायक मंडली को सीरिया ले जा रहा था, लेकिन रास्ते में काले समुद्र में गिर गया. बाबचेंको ने अपनी फेसबुक पोस्ट में रूस को आक्रमणकारी कहा था.

एक ब्रितानी अख़बार के मुताबिक पिछले साल बाबचेंको ने ये कहते हुए रूस छोड़ दिया था कि अब वो "वहां सुरक्षित महसूस नहीं करते."

रूस छोड़ने के बाद पहले वो प्राग चले गए. लेकिन बाद में वो यूक्रेन चले गए, जहां वो एक लोकल टीवी चैनल एटीआर के साथ एंकर के तौर पर काम करने लगे.

बाबचेंको रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के मुखर आलोचक रहे हैं. वो यूक्रेन और सीरिया में रूस की सैन्य कार्रवाई के खिलाफ भी बोलते रहे हैं.

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'यूक्रेन के दोस्त'

बाबचेंको जब 18 साल की उम्र में लॉ की पढ़ाई कर रहे थे, तब उन्हें रूस की आर्मी में शामिल होने के लिए कहा गया.

उस दौरान उन्होंने 1994 और 2000 में दो युद्धों में भी हिस्सा लिया. इस युद्ध में दोनों ओर से हज़ारों लोगों की जान गई थी.

उन्होंने युद्ध के अपने अनुभवों के आधार पर 'द वार ऑफ सोल्जर' नाम की किताब लिखी.

इसके बाद वो पत्रकार बन गए और कई मीडिया संस्थानों के साथ मिलकर काम करते रहे. वो कई बार बीबीसी के लिए भी लिख चुके हैं.

यूक्रेन के प्रधानमंत्री वोलोड्मीर ग्रोसमैन ने बाबचेंको को यूक्रेन का ऐसा 'सच्चा दोस्त' बताया था, जो दुनिया को रूस के आक्रामक रवैये से वाकिफ करा रहा है."

ग्रोसमैन ने कहा था कि बाबचेंको के "हत्यारों को सज़ा मिलनी ही चाहिए."

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'झूठी ख़बर' पर यूक्रेन की निंदा

हत्या की जांच को जल्द पूरा करने की मांग

रूस के विदेश मंत्री ने बाबचेंको की हत्या के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि इस तरह के आरोप रूस के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा हैं.

उन्होंने कहा था कि हम चाहते हैं कि यूक्रेन की सरकार बाबचेंको की हत्या की जांच को जल्द से जल्द पूरा करे.

उन्होंने पत्रकार के परिवार और दोस्तों के प्रति अपनी संवेदना भी प्रकट की थी. हाल के सालों में यूक्रेन की राजधानी कीव में कई पत्रकारों पर जानलेवा हमले हुए हैं.

उनमें से ज़्यादातर रूस के आलोचक थे.

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Image caption बाबचेंको रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के मुखर आलोचक रहे हैं

बाबचेंको ने अपनी आखिरी फेसबुक पोस्ट में लिखा था कि जब वो चार साल पहले की एक घटना को याद करते हैं तो खुद को बहुत खुशनसीब महसूस करते हैं.

उस दिन वो यूक्रेन के सैनिकों के साथ एक विमान में सवार होकर यूक्रेन के एक युद्धग्रस्त क्षेत्र में जाने वाले थे.

लेकिन कम जगह होने की वजह से उन्हें विमान में नहीं चढ़ने दिया गया. रास्ते में इस विमान पर रूस समर्थित विद्रोहियों ने हमला कर दिया था.

ये विमान क्रेश हो गया और 14 लोग मारे गए. बाबचेंको ने लिखा था, "मैं खुशनसीब था, मुझे लगता है कि मुझे एक नया जन्म मिला है."

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