पुलिसवाली जिसने अपने बचपन के रेपिस्ट को जेल में डाला

  • 21 जून 2018
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Image caption फोटोग्राफर पीड़िता के माता-पिता का दोस्त था. जब दोनों परिवार नदी किनारे कैंपिंग करने जाते थे तब उसने घनी झाड़ियों का फायदा उठाकर बच्ची का यौन शोषण किया.

नौ साल की वो बच्ची बहुत बातूनी थी. उसके पास कई गुड़िया थीं और वो अपनी पक्की सहेली के साथ 'घर-घर' खेला करती थी.

उसे साइकिल चलाना बहुत पसंद था. टीवी के अलावा उसके पास कोई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट नहीं था.

उस फोटोग्राफर की उम्र 39 साल थी. वो शादीशुदा था. प्रकृति से उसे ख़ास लगाव था. ख़ूब घूमता-फिरता था. समुद्र तटों, नदियों और घुमक्कड़ी के बारे में अपनी बतकही से वह आसानी से लोगों का भरोसा जीत लेता था.

तबाता (बदला हुआ नाम) की उस फोटोग्राफर से पहली मुलाक़ात साल 2002 की गर्मियों में हुई. वह तबाता के माता-पिता का दोस्त था. उसने दो साल तक तबाता से बलात्कार किया.

आखिरी बार यौन शोषण के 12 साल बाद दोनों एक बार फिर मिले.

इस बार तबाता के एक हाथ में बंदूक थी. उसने फोटोग्राफर की बांह कसकर पकड़ी और हथकड़ियां लगाकर उसे जेल में ले गई. उसे जेल में बंद करके बाहर से ताला लगाया और फिर राहत की एक लंबी सांस ली जैसे कोई सिलसिला ख़त्म कर दिया हो.

तबाता अब 26 साल की हैं और पुलिस अधिकारी बन गई हैं. वह दक्षिणी ब्राज़ील के सेंता कैतेरीना प्रांत में तैनात हैं. 21 दिसंबर 2016 का वो दिन उनके ज़ेहन में ताज़ा है.

तबाता ने उस शख़्स को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया जिसने बचपन में उनका कई बार यौन शोषण किया था.

पहली बार किसी पत्रकार से बात करते हुए उन्होंने बीबीसी ब्राज़ील को अपनी कहानी बताई. तबाता कहती हैं कि उन्होंने बोलने का फैसला इसलिए किया ताकि वो दूसरी महिलाओं को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित कर सकें.

नदी किनारे कैंपिंग से शुरू हुआ शोषण

तबाता के पिता की फोटोग्राफर से जब पहचान हुई तो वह नौ साल की थीं.

कुछ ही समय में फोटोग्राफर उनका पारिवारिक मित्र बन गया. गर्मियों में दोनों परिवारों ने नदी किनारे कैंपिंग की योजना बनाई और हर हफ्ते कैंपिंग के लिए जाने लगे.

तबाता उस अच्छे वक्त को याद करती हैं जब वो नदी में नहाया करती थीं और खूब मज़े करती थीं.

दोनों परिवार कार से जाया करते थे, जंगलों के ऊबड़-खाबड़ रास्तों से गुज़रते हुए प्रकृति का आनंद लेते थे और खुले आसमान के नीचे ठंडी हवा में सोते थे.

कैंपिग का सिलसिला शुरू हुए कुछ ही हफ्ते हुए थे कि वो फोटोग्राफर तबाता का शोषण करने लगा.

वो कहती हैं, "मुझे ये सब परेशान कर रहा था, लेकिन मुझे तब नहीं पता था कि जो मेरे साथ हो रहा है, वह अपराध है."

"मैंने अपने परिवार को उस वक्त कुछ नहीं बताया, लेकिन आज सोचती हूं कि मैंने ऐसा क्यों किया."

तबाता की एक आठ साल की सौतेली बहन भी थी, लेकिन वो कैंपिंग के लिए उनके साथ नहीं आती थी.

"वो मेरे पिता के ज़्यादा क़रीब नहीं थी क्योंकि वो उनकी सौतेली बेटी थी. वो घर पर रहकर ही टीवी देखती थी या पढ़ाई करती थी."

कच्ची उम्र में सयानापन, मतलब बच्चियों के यौन शोषण का ख़तरा बढ़ा

'कहीं पिता उसकी हत्या न कर दें'

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Image caption 9 से 11 साल की उम्र तक बच्ची का रेप होता रहा

तबाता के मुताबिक, फोटोग्राफर ने उनके कमज़ोर होने, कैम्प के अकेलेपन और पेड़ों के बीच अंधेरे का फायदा उठाया.

वो बताती हैं, "एक बार मैं कैंपिंग के दौरान पानी लेने गई थी तो रास्ते में उसने मेरा शोषण किया. मैं मुश्किल से हाथ छुड़ाकर वहां से भागी. मेरे माता-पिता ने पूछा कि तुम उससे पहले क्यों आ गईं? उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका भरोसेमंद इंसान उनकी बेटी के साथ ये सब कर सकता है."

जब शोषण की घटनाएं अकसर होने लगीं तो तबाता के लिए बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया. वह अपने पिता को सब कुछ बता देना चाहती थीं.

वो कहती हैं, "मेरे पिता हमेशा तनाव में रहते थे और मुझे डर था कि मेरे सच बताने पर कहीं वो उस फोटोग्राफर की हत्या न कर दें. फिर उन्हें जेल हो जाती. हज़ारों बाते चल रहीं थीं मेरे दिमाग में. एक डर ये भी था कि मेरे माता-पिता मेरा यक़ीन करेंगे या नहीं."

'मां को बस बताने ही वाली थी, लेकिन'

फोटोग्राफर अकसर उनके घर आने लगा, ये देखने कि तबाता कब अकेली रहती हैं.

उसने देखा कि तबाता की बहन पढ़ने में व्यस्त रहती है और उनकी मां रात को काम करती है. वो ये भी जानता था रात में उनके पिता कब फ़ुटबॉल खेलते हैं, वो उस वक़्त का फायदा उठाता और तबाता का यौन शोषण करता.

"वो कहता था, बस थोड़ा-सा, बस थोड़ा-सा'. "वो कभी मुझे मारता नहीं था, वो मुझे कसकर पकड़ लेता था."

वो ढाई साल तक तबाता का यौन शोषण करता रहा.

ताबता कहती हैं कि 11 साल की उम्र तक मुझे समझ आने लगा कि वो मेरे साथ यौन अपराध कर रहा है. मैं उसका विरोध करने लगी, चिल्लाने लगी, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ.

एक दिन उसने अपनी मां को सबकुछ बताने की ठानी. लेकिन तभी पता चला कि उसकी मां को बायपोलर डिसऑर्डर (एक मानसिक रोग) हो गया है. तबाता ने उन्हें कुछ ना बताने का फैसला किया.

सौतेली बहन को बताया

उसी वक्त तबाता को एक और चौंकाने वाली खबर मिली. उसके पिता का फोटोग्राफर की पत्नी के साथ अफेयर चल रहा था.

जब इस बात का पता दोनों परिवारों को चला तो दोस्ती ख़त्म हो गई और शोषण का सिलसिला भी.

तबाता ने अपनी पक्की सहेली को सब कुछ बताया और उससे इसे राज़ बनाए रखने का वायदा लिया.

वो मुश्किल वक्त था. तबाता को शारीरिक और मानसिक रूप से बीमार मां को संभालना था. वह अपनी बहन से भी बात करना नहीं चाहती थी क्योंकि दोनों के बीच बहुत अच्छे संबंध नहीं थे.

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Image caption फोटोग्राफर को साढ़े सात साल की सज़ा सुनाई गई, लेकिन एक साल बाद ही रिहाई हो गई

लेकिन मां की बीमारी दोनों सौतेली बहनों को करीब ले आई. तबाता ने 2006 में अपनी बहन को आपबीती बताने का फैसला किया.

तबाता के मुताबिक, "जब मैंने अपनी बहन को सब-कुछ बताया तो वह बहुत रोने लगी. उसने मेरे पिता को तुरंत फोन लगाया. मेरे पिता दो साल पहले मेरी मां से तलाक ले चुके थे. ऐसे में मुझे लगा कि क्या मुझे उन्हें ये सब बताना चाहिए. इससे मेरे परिवार की तकलीफें ही बढ़ेंगी."

तबाता सालों तक वो सब भुलाने की कोशिश करती रही, लेकिन डरावनी यादें कभी उनके दिमाग से न जा सकीं.

कई और पीड़ित

उन बुरी यादों से परेशान होकर उन्होंने अपने स्कूल के दोस्तों को सबकुछ बताने का फैसला किया.

2008 में जब वो 16 साल की थीं, तब उसकी एक दोस्त ने अपनी मां को उसके बारे में सबकुछ बता दिया. संयोग से उस लड़की की मां फोटोग्राफर को जानती थी. उसकी मां ने तबाता को मिलने के लिए बुलाया.

"उन्होंने मुझे बताया कि वो और भी कई लड़कियों को जानती है जिनका फोटोग्राफर ने यौन उत्पीड़न किया है. ये सुनकर मेरे होश उड़ गए. मुझे लगता था कि उसने यह सिर्फ़ मेरे साथ ही किया है. लेकिन उसने दूसरी कई लड़कियों की ज़िंदगी भी बर्बाद की थी."

यौन शोषण के सात साल बाद तबाता ने पुलिस में शिकायत की. पुलिस ने जांच शुरू तो की लेकिन जल्द ही केस बंद भी कर दिया.

तबाता एक वकील से मिली. लेकिन उसने ये कहते हुए केस लेने से इनकार कर दिया कि इसमें कोई दम नहीं है. उसने कहा, 'मामला पुराना है और मेरे पास कोई सबूत नहीं है.'

तबाता उस दिन ख़ूब रोईं. उन्हें लगा कि उनके मुजरिम को अब कभी सज़ा नहीं हो सकेगी.

कुछ वक्त बाद उन्हें किसी ने बताया कि एक व्यापारी की नौ साल की बेटी का भी उसी फोटोग्राफर ने शोषण किया था.

तबाता उसकी मां से मदद मांगने पहुंची.

"मैंने उन्हें कोर्ट में गवाही देने की अपील की. वो लोग मान गए." इसके बाद तबाता वकील के पास दोबारा गईं.

पब्लिक मिनिस्ट्री ने माना कि मुजरिम का बच्चों के यौन शोषण का रिकॉर्ड रहा है. एक साल बाद 2013 में कोर्ट में पहली सुनवाई हुई.

कोर्ट का फैसला

कोर्ट में सुनवाई के दौरान फोटोग्राफर ने आरोपों से इनकार किया. उसने कहा कि तबाता बदला लेने के लिए ये आरोप लगा रही है क्योंकि तबाता के पिता का उसकी पत्नी के साथ अफेयर था.

लेकिन कोर्ट ने फोटोग्राफर को दोषी पाया और साढ़े सात साल की सज़ा सुनाई.

24 साल की उम्र में तबाता ने सिविल पुलिस अकादमी का कोर्स पूरा कर लिया था और पुलिसकर्मी हो गई थीं.

22 दिसंबर 2016 को वो अपनी आठ-दस पुलिसकर्मियों की टीम के साथ फोटोग्राफर को गिरफ्तार करने पहुंची थी. वह एक नदी किनारे बने फार्म हाउस में छिपा हुआ था.

वो जानती थीं कि उनके संघर्ष ने उन्हें पुलिसकर्मी बनने के लिए प्रेरित किया. वो सारे बलात्कारियों को सलाखों के पीछे पहुंचाना चाहती थीं.

'12 सालों में 500 बच्चों का यौन शोषण'

बच्चे का यौन शोषण हो रहा है, कैसे पता करें?

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Image caption लंबी लड़ाई लड़ने के बाद ताबता अपने रेपिस्ट को सलाखों के पीछे पहुंचा पाईं

19 दिसंबर 2017 यानी एक साल बाद फोटोग्राफर को रिहा कर दिया गया. जेल में अच्छे बर्ताव की वजह से उसकी सज़ा कम कर दी गई थी.

अब वो आज़ाद है और तबाता इससे असंतुष्ट हैं. लेकिन उन्हें लगता है कि जिसने उनका बचपन में दो साल तक बलात्कार किया, उसे इतने कम समय में कैसे छोड़ दिया गया.

मानसिक नुकसान

तबाता बचपन में बहुत घुलने-मिलने वाली बच्ची थी, लेकिन उनके साथ हुए शोषण ने उनके आगे की ज़िंदगी को बदलकर रख दिया.

वो बताती हैं, "मैं लोगों से ज़्यादा बात करने से बचने लगी थी. मुझे डर लगता था. मुझे अपने शरीर पर शर्म आती थी. जब मेरे दोस्त सेक्स और बच्चे पैदा करने के बारे में बात करते थे तो मैं असहज हो जाती थी. क्योंकि मैंने हमेशा सेक्स का एक गंदा रूप देखा था."

पुलिस अफसर तबाता यौन हिंसा के केस नहीं लेती थीं. क्योंकि हर रेप की कहानी उनके ज़ख्म ताज़ा कर देती थी.

लेकिन तबाता का मानना है कि उनकी कहानी दूसरे परिवारों के लिए एक चेतावनी है.

"मैं मांओं से कहूंगी कि अपने बच्चों से बात करें और उन्हें सिखाएं कि कुछ भी गलत होने पर बताएं. बच्चों को अहसास कराएं कि वो उन पर भरोसा करते हैं."

"मैं यौन शोषण की दूसरी पीड़िताओं से कहना चाहती हूं कि वो अपने साथ हुए ग़लत बर्ताव के लिए ख़ुद को दोषी ना मानें."

"मैं हमेशा कहती हूं कि पीड़िता पर दोष नहीं मढ़ा जाना चाहिए. जो कुछ होता है उसमें पीड़िता के कपड़ों का कोई दोष नहीं होता. बल्कि यौन शोषण करने वाला ही दिमागी तौर पर बीमार होता है."

कौन है '500 बच्चों के यौन शोषण' का अभियुक्त

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