सांसद ने बनाया रैप सॉन्ग, सरकार ने लगाया बैन

  • 23 जून 2018
जॉसेफ़ मबिलिनी को कथित तौर पर राष्ट्रपति की मानहानी करने के आरोप में पांच महीने कैद की सज़ा सुनाई गई थी. इमेज कॉपीरइट JOSEPH MBILINYI
Image caption जॉसेफ़ मबिलिनी को कथित तौर पर राष्ट्रपति की मानहानी करने के आरोप में पांच महीने कैद की सज़ा सुनाई गई थी.

तंज़ानिया में विपक्षी सांसद जॉसेफ़ मबिलिनी ने कहा है कि देश की जेलों पर बनाए गए उनके रैप सॉन्ग को प्रतिबंधित करने पर वह सरकार पर केस करेंगे.

देश की कला परिषद 'बसाटा' ने सार्वजनिक हिंसा को बढ़ाने वाले शब्दों का प्रयोग करने पर इस गीत को प्रतिबंधित किया था.

जॉसेफ़ मबिलिनी को एमसी सुगु नाम से जाना जाता है. यह गीत उनकी गिरफ़्तारी के बाद लीक हो गया था. सुगु को कथित तौर पर राष्ट्रपति जॉन मागुफ़ुली की मानहानी करने के आरोप में जेल में बंद किया गया था.

इस प्रतिबंध ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी सवाल खड़े किए थे.

कला परिषद बसाटा ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि #219 नाम से डब किए गए इस गीत पर आम लोगों ने कई आपत्तियां दर्ज करवाई थीं. इस गीत की वजह से कला जगत की प्रतिष्ठा को भी नुक़सान पहुंचा था.

मई में जेल से छूटकर बाहर आए मबिलिनी ने बीबीसी से कहा कि एक गाना किसी के लिए ख़तरा कैसे बन सकता है?

मबिलिनी ने कहा, ''जेल के अपने अनुभव के बारे में तो मैंने बहुत कम बात की, मैंने अधिकारियों से वहां के हालात बेहतर करने की अपील की है.''

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Image caption गायक डायमंड प्लैटनुम्ज़ ने अपने उस इंस्टाग्राम वीडियो के लिए माफ़ी मांगी थी जिसमें वे एक महिला को चूम रहे थे.

राष्ट्रपति पर विपक्ष के आरोप

तंज़ानिया प्रशासन ने मार्च में बसाटा की तरफ से मिली सूची के बाद लगभग 13 गानों को आपत्तिजनक बताते हुए प्रतिबंधित कर दिया था.

तंज़ानिया के राष्ट्रपति मागुफ़ुली जिन्हें 'द बुल्डोज़र' नाम से भी जाना जाता है, उनके विपक्षी उन पर आरोप लगाते हैं कि वे तानाशाह बनते जा रहे हैं. हालांकि, मागुफ़ुली इन आरोपों को ख़ारिज करते हैं.

साल 2015 में जब से वह सत्ता में आए हैं, बहुत से अखबारों को बंद करवा दिया गया है. वहीं अफ़्रीका के एक टॉप गायक की वीडियो क्लिप को आपत्तिजनक बताकर उनसे सवाल भी पूछे गए.

दरअसल, अवॉर्ड विजेता गायक डायमंड प्लैटनुम्ज़ ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो क्लिप पोस्ट की थी जिसमें वे गाने के साथ-साथ एक महिला को चूम रहे थे. बाद में इस वीडियो को इलेक्ट्रॉनिक और पोस्टल कम्युनिकेशन (ऑनलाइन सामग्री) के नए नियमों के आधार पर ग़लत बताया गया था.

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