'यक़ीन नहीं हो रहा कि मैं सऊदी में कार चला रही हूं'

  • 24 जून 2018
रोआ अल्तावेली

सऊदी अरब में महिलाओं के गाड़ी चलाने पर प्रतिबंध हटने के बाद जेद्दा में मिडवाइफ़ (दाई) का काम करने वाली रोआ अल्तावेली कार चलाकर काम पर गईं. उन्होंने अपना अनुभव बीबीसी से साझा किया -

आज मैं रोज़ाना से पहले ही सोकर उठ गई. मैं इतना उत्साहित थी कि सो ही नहीं पाई. आज मैं कार से काम पर जा रही हूं और ये पहली बार है कि मैं पिछली सीट पर नहीं बैठी हूं बल्कि मेरे हाथ में स्टीयरिंग है. मुझे यक़ीन नहीं हो पा रहा है कि मैं जेद्दा में कार चला पा रही हूं.

सऊदी अरब ने अंततः महिलाओं के गाड़ी चलाने पर लगा प्रतिबंध हटा दिया है. मैं देर रात तक जागी रही और सोशल मीडिया पर उन महिलाओं की तस्वीरें और वीडियो देखती रही जो गाड़ी लेकर निकली हैं.

कार चलाने का मेरा पहला दिन शांत था. स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियां हैं. पहली बार गाड़ी चला रहे लोगों के लिए ये अच्छी बात है. मुझे नैतिक समर्थन और कुछ सलाह देने के लिए मेरे पिता मेरे साथ थे.

रास्ते में मुझे पुलिस दिखी, लेकिन मेरे भीतर कार रोके जाने का डर नहीं था. अब मेरे पास लाइसेंस है और मैं क़ानूनी तौर पर सऊदी अरब में कार चला रही हूं. रास्ते में मैं ड्राइव थ्रू पर कॉफ़ी लेने के लिए रुकी. ये पहली बार है जब बरिस्ता ने किसी महिला ड्राइवर को कॉफ़ी दी है.

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'मेरे पेशे में मददगार'

जब मैं बहरीन में मिडवाइफ़ होने का डिप्लोमा कर रही थी तब मैं कार चलाकर ही कॉलेज जाती थी. मेरे पास साल 2005 से ड्राइविंग लाइसेंस है. मेरे पास अंतरराष्ट्रीय लाइसेंस भी है और मैंने दुबई, पुर्तगाल और अमरीका में छुट्टियों के दौरान गाड़ी चलाई है.

बहरीन के ड्राइवेंग लाइसेंस को सऊदी के लाइसेंस में बदलना आसान था, लेकिन ड्राइविंग टेस्ट के लिए तारीख़ पाना उतना आसान नहीं था. मांग इतनी ज़्यादा थी कि जुलाई से पहले की सभी तारीख़ें आरक्षित थीं. भाग्यवश कुछ सप्ताह पहले मुझे और मेरी बहन को ड्राइविंग टेस्ट के लिए समय मिल गया. हमने पहली बार में ही ये टेस्ट पास कर लिया.

मेरे पिता और छोटे भाई ने हम दोनों बहनों को लाइसेंस लेने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि प्रतिबंध हटते ही हम कार चला सकें.

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Image caption सऊदी अरब की महिलाओं को विदेश जाने के लिए पुरुष अभिभावक की अनुमति होना आवश्यक

मैं पेशे से मिडवाइफ़ हूं और मैंने ब्रिटेन से मिडवाइफ़री में पीएचडी की है. यूरोप और अन्य विकसित देशों में मिडवाइफ़ के लिए गाड़ी चलाना बेहद अहम होता है ताकि ज़रूरत पड़ने पर वो एंबुलेंस या मदद का इंतज़ार किए बिना स्वयं ही गर्भवती महिला को अस्पताल ले जा सकें.

कई बार तो नौकरी पाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस होना ज़रूरी होता है.

अब स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर रही महिला कर्मचारी भी देर रात की ड्यूटी के दौरान टैक्सी लेने का ख़तरा उठाने के बजाए स्वयं गाड़ी चलाकर अस्पताल या अस्पताल से घर आ सकेंगी.

मैं जिस अस्पताल में काम करती हूं वो जेद्दा के पूर्वी हिस्से में है. जब मैं मुख्य दरवाज़े से गाड़ी लेकर अस्पताल में दाख़िल हुई तो किसी ने मुझे घूरा नहीं. मुझे ऐसा लगा जैसे में यहा लंबे समय से कार चलाकर आती रही हूं.

अभी भी बहुत कुछ किए जाने की ज़रूरत है, लेकिन स्वयं गाड़ी चलाकर काम पर आने से सशक्त होने की भावना तो आती ही है. आज का दिन एक ऐतिहासिक दिन है और ऐसा लग रहा है कि सऊदी अरब में अब महिलाओं के लिए ऐसे ही और बहुत से ऐतिहासिक दिन आने वाले हैं.

(जैसा कि रोआ अल्तावेली ने बीबीसी की लुलवा शालहूब को बताया)

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