थाईलैंड LIVE: गुफा में फंसे सभी लोग बाहर निकाल लिए गए

  • 10 जुलाई 2018
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उत्तरी थाईलैंड की टैम लूंग गुफा में फंसे बाकी चार बच्चों और उनके कोच को भी निकाल लिया गया है.

इसी के साथ एक लंबा और जोख़िम भरा अभियान अपने सुखद अंजाम तक पहुंचा हैं.

थाईलैंड नेवी सील ने सभी बारह बच्चों और उनके कोच को सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी दी है.

हालांकि बचाव दल के चार गोताखोरों, जिनमें एक डॉक्टर भी शामिल हैं, का अभी गुफा से बाहर आना बाक़ी है.

सोमवार शाम तक आठ बच्चों को पहले ही सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका था.

12 फ़ुटबॉल खिलाड़ी अपने कोच के साथ 23 जून को इस गुफा में गए थे और वहीं फंस कर रह गए थे.

घुप्प अंधेरी पानी से भरी और बेहद संकरे रास्तों वाली इस गुफा से बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के अभियान पर दुनिया भर की नज़रें टिकी हुई हैं.

बाहर निकाले जाने से पहले दी गई दवा

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Image caption गुफा में फंसे बच्चों की देखभाल के लिए डॉक्टर और गोताखोर उनके साथ रहे

इससे पहले थाईलैंड के प्रधानमंत्री ने बताया था कि बच्चों को बाहर निकाले जाने से पहले दवाइयां दी गईं थीं ताकि बाहर निकलने की मुश्किल प्रक्रिया के दौरान वो डरे नहीं.

हालांकि प्रधानमंत्री प्रयुत चान-ओचा ने उन रिपोर्टों का खंडन किया जिनमें कहा गया था कि बाहर निकाले जाने से पहले बच्चों को बेहोश कर दिया गया था.

उन्होंने बताया कि उन्हें चिंता निवारक दवा दी गई थी. ये दवा वैसी ही है जैसी सैनिक लेते हैं. उन्होंने कहा, "ये दवा खाने के बाद हमारा ध्यान अधिक केंद्रित रहता है और शार्प शूटिंग बेहतर होती है."

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Image caption अंधेरी गुफा में बच्चों को निकालने के लिए आगे बढ़ते गोताखोर
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किस हालत में हैं बाहर निकले बच्चे?

वहीं, सोमवार तक गुफा से निकाले गए सभी आठ बच्चों की 'शारीरिक और मानसिक सेहत अच्छी है'. यह जानकारी थाईलैंड के एक स्वास्थ्य अधिकारी ने दी है.

सार्वजनिक स्वास्य मंत्रालय के स्थायी सचिव जीसेदा चोकदेम्रोंगसुक ने कहा, "सभी आठों बच्चों का स्वास्थ्य अच्छा है, उन्हें किसी तरह का बुखार नहीं है...सबकी मानसिक स्थिति भी सही है."

इन सभी बच्चों का एक्स-रे और ब्लड टेस्ट कराया गया है और वो ठीक हैं.

हालांकि दो बच्चों के फेफड़ों में संक्रमण की आशंका है और उनका इलाज चल रहा है. उन्हें कम से कम सात दिनों तक अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में रखा जाएगा.

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माता-पिता को देखा मगर...

कुछ बच्चों के शरीर का तापमान कम है और कुछ के दिल की धड़कन भी थोड़ी धीमी है.

स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि बच्चों को पहले 'इंस्टैंट फ़ूड' और 'एनर्जी जेल' दिया गया लेकिन अब उन्हें आसानी से पचाया जा सकने वाला खाना दिया जा रहा है.

कुछ बच्चों ने अपने माता-पिता को देखा है लेकिन शीशे के उस पार से.

कुछ दिनों बाद इनका दोबारा टेस्ट किया जाएगा और संक्रमण की आशंका न होने पर उन्हें उनके परिवार से मिलने दिया जा सकता है.

हालांकि बच्चों से मिलते वक़्त परिजनों को एक ख़ास तरह के सुरक्षात्मक कपड़े पहनने होंगे और वो बच्चों के 2 मीटर से ज़्यादा करीब नहीं जा पाएंगे.

सनग्लास पहने हैं बच्चे

पहले चार बच्चों को शनिवार को सुरक्षित बाहर निकाला गया था. इसके बाद सोमवार को चार और बच्चों को सफलतापूर्व बाहर निकाल लिया गया था.

चूंकि बच्चे दो हफ़्ते से ज़्यादा वक़्त तक गुफा के घुप अंधेरे में रहे हैं इसलिए फिलहाल उन्हें सनग्लास पहने रहने को कहा गया है.

बचाव अभियान की अगुवाई कर रहे नारोंगसक ओसोटानकोर्न का कहना है कि अगर सबकुछ ठीक रहा तो बाकी चार बच्चों और उनके कोच को आज बाहर निकाला जा सकता है.

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बच्चों को कैसे निकाला गया?

इस अभियान को थाईलैंड के 40 और 50 विदेशी गोताखोरों ने अंजाम दिया. इनके लिए यह बेहद चुनौती भरा अभियान था. ये वहां तक रस्सियों के सहारे पानी में चलते हुए तैरते हुए और चढ़ते हुए पहुंचे. गोताखोरों के चेहरे पूरी तरह से नकाब से ढंके हुए थे.

ये उन बच्चों को निकालने पहुंचे थे जिन्हें नहीं पता है कि गुफा के पानी से कैसे निकलना होता है.

हर एक बच्चे पर दो गोताखोर थे. इन्हीं गोताखोरों के पास एयर सप्लाई भी थी. गोताखोरों के लिए उस गुफा के आधे रास्ते तक ही पहुंचना काफ़ी चुनौती भरा था.

यहां तक हवा टैंक को ले जाना काफ़ी मुश्किल काम था. इन गोताखोरों ने चेंबर थ्री नाम से एक बेस बनाया था, जहां बच्चों को गुफा के प्रवेश द्वार से निकालकर लाया जा रहा था.

सुरक्षित निकाले गए बच्चों को चियांग राय हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है. शुक्रवार को थाई नेवी के एक गोताखोर की अभियान के दौरान ही मौत हो गई थी.

इसी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यह अभियान कितना मुश्किल है. समन गुनान मौक़े पर एयर टैंक मुहैया कराकर लौट रहे थे तभी उन्होंने ऑक्सीजन की कमी के कारण दम तोड़ दिया.

गुनान के एक सहकर्मी ने कहा कि उनके साथी का समर्पण बेकार नहीं जाएगा.

11 से 17 साल की उम्र वाले ये बच्चे एक ट्रेनिंग ट्रिप के दौरान ये बच्चे थेम लुआंग गुफा में फंस गए थे.

नौ दिनों के बाद बच्चों के यहां फंसने का पता लगा था. ये लोग 23 जून से यहां फंसे हुए हैं और आज बचाव अभियान का तीसरा दिन है.

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