रदेश सिंह टोनी: ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह का इकलौता सिख उम्मीदवार

  • 11 जुलाई 2018
पाकिस्तान चुनाव
Image caption रदेश सिंह टोनी

पाकिस्तान में ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत के शहर पेशावर में सिख समुदाय से संबंध रखने वाले रदेश सिंह टोनी एकलौते उम्मीदवार हैं, जो अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं.

और वो भी जनरल सीट पर बड़े राजनीतिक दलों के मज़बूत उम्मीदवारों के सामने मैदान में डटे हुए हैं.

रदेश सिंह का कहना है कि ये मुक़ाबला मुश्किल है. उन्हें डर भी है लेकिन वो इसके बावजूद आशान्वित हैं कि लोग उन्हें ज़रूर वोट करेंगे.

वो पेशावर की असेंबली सीट नंबर 75 पर चुनाव लड़ रहे हैं और वो इन दिनों घर-घर जाकर लोगों से वोट की अपील करते रहे हैं.

बातचीत के दौरान उनका कहना था कि फिलहाल तो केवल वो और उनके बेटे चुनाव प्रचार कर रहे हैं.

लेकिन उनका दावा था कि क्षेत्र के लोग भी उनका समर्थन कर रहे हैं.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

जनरल सीट पर अल्पसंख्यक उम्मीदवार

थोड़े डरे हुए रदेश सिंह कहते हैं कि कुछ दिन पहले सिख समाज के एक सदस्य की हत्या कर दी गई थी.

हालांकि इसके बावजूद उनका भरोसा कमज़ोर नहीं हुआ है और वे अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं.

उनका कहना है कि क्षेत्र के मुसलमान और दूसरे धर्म के मतदाता उनकी कामयाबी के लिए लगे हुए हैं.

ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत में वो अकेले उम्मीदवार हैं जिनका संबंध अल्पसंख्यक समाज से है लेकिन वे जनरल सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं.

उनका कहना है कि साल 2003 के बाद जब अल्पसंख्यकों के लिए अलग से चुनाव की व्यवस्था ख़त्म कर दी गई, उसके बाद से जनरल सीट पर कोई भी अल्पसंख्यक समुदाय का उम्मीदवार सामने नहीं आया था.

पीटीआई के नेता रहे हैं रदेश

रदेश सिंह पहले निकाय चुनाव में अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित सीट पर पार्षद चुन लिए गए थे लेकिन इस चुनाव में हिस्सा लेने के लिए उन्होंने पार्षद के पद से इस्तीफा दे दिया था.

49 साल के रदेश सिंह तीन बेटों के बाप हैं और साल 2011 तक इमरान ख़ान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) के अल्पसंख्यक विंग के नेता थे.

वे कहते हैं कि 2011 के बाद पीटीआई में अमीरों को प्राथमिकता दी जाने लगी और उन जैसे लोगों के लिए पार्टी में कोई जगह नहीं बची.

उन्होंने पश्तूनों के आंदोलन का समर्थन भी किया था लेकिन अब वो उस संगठन के सदस्य नहीं रहे क्योंकि चुनाव लड़ने के फ़ैसले के कारण पश्तूनों के आंदोलन से उन्हें बाहर कर दिया गया.

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने राजनीतिक पार्टियों से कोई संपर्क किया है तो उनका कहना था मज़दूर किसान पार्टी और दूसरी एक-दो छोटी जमातों ने उनके समर्थन की घोषणा की है.

इमेज कॉपीरइट Reuters

मजदूर किसान पार्टी के प्रमुख मोहम्मद नज़ीफ़ ने बीबीसी को बताया रदेश सिंह का चुनावों में हिस्सा लेना पेशावर की जनता के लिए गर्व की बात है.

उन्होंने कहा कि रदेश सिंह के चुनावी मैदान में होने से दुनिया भर में पेशावर की अच्छी इमेज बनेगी.

उनके मुताबिक़ दुनिया के लोगों को पता चलेगा कि पश्तूनों में हर धर्म के लोगों को हिस्सेदारी देने की परंपरा है.

उन्होंने कहा कि जनरल सीट पर दूसरे अल्पसंख्यक लोगों को भी चुनाव लड़ना चाहिए.

रदेश सिंह टोनी को दूसरे अल्पसंख्यकों ने समर्थन का भरोसा दिलाया है. हालांकि उनकी कोशिश बहुसंखयक लोगों का भरोसा जीतने की भी है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

मिलते-जुलते मुद्दे