आज़ादी का वो आंदोलन, जिसके बारे में पढ़ेंगे अमरीकी बच्चे

  • 16 जुलाई 2018
गदर पार्टी इमेज कॉपीरइट VANCOUVER PUBLIC LIBRARY

भारत के स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा रही ग़दर पार्टी का इतिहास अब अमरीका के बच्चे पढ़ेंगे.

पार्टी की 105 साल पूरे होने पर ओरेगन राज्य में आयोजित एक कार्यक्रम में इसकी घोषणा की गई.

अस्टोरिया शहर में हुए कार्यक्रम में सरकारी अधिकारियों ने कहा कि ग़दर पार्टी का इतिहास अब स्कूलों में पढ़ाया जाएगा.

कार्यक्रम का आयोजन गदर मेमोरियल फाउंडेशन ऑफ अस्टोरिया ने किया था.

इमेज कॉपीरइट Facebook/Gurinder Singh Khalsa

क्या थी ग़दर पार्टी

ग़दर पार्टी साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ हथियारबंद संघर्ष का ऐलान और भारत की पूरी आज़ादी की मांग करने वाली राजनैतिक पार्टी थी, जो कनाडा और अमरीका में प्रवासी भारतीयों ने 1913 में बनाई थी.

इसके संस्थापक अध्यक्ष सरदार सोहन सिंह भाकना थे. पार्टी का मुख्यालय सैन फ्रांसिस्को में था.

इस पार्टी के पीछे लाला हरदयाल की सोच थी, जिन्हें इंग्लैंड की ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी से स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी गतिविधियां चलाने के आरोप में निकाल दिया गया था.

इसके बाद वो अमरीका चले गए थे. वहां उन्होंने भारतीय प्रवासियों को जोड़ना शुरू किया और ग़दर पार्टी की स्थापना की.

पार्टी के अधिकतर सदस्य पंजाब के पूर्व सैनिक और किसान थे, जो बेहतर ज़िंदगी की तलाश में अमरीका गए थे.

इमेज कॉपीरइट VANCOUVER PUBLIC LIBRARY

वो वाकया

भारत को अंग्रेजी हुकूमत से आज़ाद कराने के लिए पार्टी ने हिंदी और उर्दू में 'हिंदुस्तान ग़दर' नाम का अख़बार भी निकाला. वो इसे विदेश में रह रहे भारतीयों को भेजते थे.

साल 1914 में 376 भारतीय अकाल और ब्रितानी हुकूमत से तंग आकर रोज़गार की तलाश में कोमागाटा मारू जहाज़ से कनाडा जा रहे थे.

जहाज़ को ग़दर पार्टी से जुड़े गुरदीत सिंह ने किराए पर लिया था. उस वक़्त कनाडा में अप्रवासियों के लिए क़ानून सख्त किए जा रहे थे. ये क़ानून अंग्रेजी हुकूमत के कहने पर बनाए जा रहे थे.

कोमागाटा मारू में सवार 376 भारतीय मुसाफ़िरों में से सिर्फ़ 24 को कनाडा सरकार ने बैंकूवर में उतरने की इजाज़त दी थी.

Image caption साल 2014 में कनाडा सरकार ने कोमागाटा मारू घटना की शताब्दी पर डाक टिकट जारी किया था

भारत में गदर आंदोलन

ग़दर पार्टी के दवाब के बावजूद जहाज़ को वापस भारत भेज दिया गया. लगभग छह महीने समुद्र में घूमने के बाद यह जहाज़ कोलकाता में बज बज बंदरगाह पहुंचा.

कोलकाता पहुंचने के बाद जहाज़ मे सवार लोगों को पंजाब लौटने को कहा गया, जिससे उन्होंने इंकार कर दिया.

29 सितंबर 1914 को बाबा गुरदीत सिंह और अन्य नेताओं को गिरफ़्तार करने के लिए जहाज़ पर पुलिस भेजी गई. जहाज़ पर सवार लोगों ने इसका विरोध किया.

प्रथम विश्व युद्ध में उलझी और ग़दर पार्टी की योजनाओं से परेशान अंग्रेज़ सरकार ने यात्रियों पर गोली चलाई जिसमें 18 यात्री मारे गए थे.

हालांकि, बाबा गुरदीत सिंह कई अन्य लोगों के साथ भाग निकले. बाक़ी यात्रियों को वापस पंजाब भेज दिया गया.

इसी घटना के बाद भारत में गदर आंदोलन की शुरुआत हुई. पार्टी का उद्देश्य ब्रिटिश हुकूमत के ख़िलाफ़ विद्रोह करने और उनकी हत्या का था.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

मिलते-जुलते मुद्दे