स्वामी अग्निवेश पर झारखंड में हमला, भाजपा कार्यकर्ताओं पर आरोप

  • रवि प्रकाश
  • रांची से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

बंधुओं मज़दूरों के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश पर पाकुड़ के भीड़-भाड़ वाले इलाके में हमला हुआ है. हमलावरों ने उनके ख़िलाफ़ नारे लगाए और बीच सड़क पर उन्हें बुरी तरह पीटा.

भीड़ के लोगों ने उनके कपड़े फाड़ डाले और गालियाँ भी दीं. इस हमले में उन्हें आंतरिक चोटें भी आई हैं. इस घटना के बाद अग्निवेश ने मुख्य सचिव को फ़ोन कर कार्रवाई की माँग की है.

स्वामी अग्निवेश के प्रतिनिधि और बंधुओं मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष मनोहर मानव ने बीबीसी को यह जानकारी दी.

उन्होंने कहा, "यह सरकार प्रायोजित हमला है. यह एक तरीक़े की मॉब लिंचिंग थी, जिसमें हमने मुश्किल से स्वामी अग्निवेश की जान बचाई. जब स्वामी जी पर हमला हुआ, तब पुलिस ने हमारी कोई मदद नहीं की और स्वामी जी की बुलाने के बावजूद पाकुड़ के एसपी उनसे मिलने नहीं पहुँचे. हमें कोई सुरक्षा नहीं दी गई. वे सबलोग भाजपा से जुड़े लोग थे."

पुलिस को थी सूचना

हमले के बाद स्वामी अग्निवेश ने कहा कि उनके आने की सूचना पुलिस और प्रशासन को दी गई थी.

इस हमले के बारे में स्वामी अग्निवेश ने बीबीसी से कहा, "मुझे डराने की कोशिश हुई है. मैं यहां पहाड़ियां आदिवासियों के एक कार्यक्रम में भाग लेने आया था. मुझे लिट्टीपाड़ा में आदिम जनजाति विकास समिति के दामिन दिवस कार्यक्रम में बोलने के लिए बुलाया गया था. आयोजकों ने प्रशासन को इसकी पूर्व सूचना दी थी. इसकी रिसिविंग भी है. इसके बावजूद मुझे सुरक्षा नहीं दी गई. मैंने मुख्य सचिव को इस हमले की सूचना दी है."

एसपी का सूचना से इनकार

हालांकि पाकुड़ के एसपी शैलेंद्र बर्णवाल ने पुलिस को उनके कार्यक्रम की पूर्व सूचना होने से इनकार किया है.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "हमें स्वामी अग्निवेश के किसी भी कार्यक्रम की सूचना नहीं दी गई थी. अब हमलोग इस मामले की जाँच कर रहे हैं. दोषियों पर कार्रवाई करेंगे."

कैसे हुआ हमला

स्थानीय पत्रकार रामप्रसाद सिन्हा ने बताया, ''लिट्टीपाड़ा के जिस होटल में स्वामी अग्निवेश ठहरे हुए थे, उसके बाहर भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता उनका विरोध प्रदर्शन करने के लिए धरने पर बैठे हुए थे.''

''अग्निवेश जैसे ही होटल से निकले, उनपर दर्जनों लोगों ने हमला कर दिया. उन्हें काले झंडे भी दिखाए गए और वापस जाओ के नारे लगाए गए. उन्हें जूते-चप्पलों से पीटा गया और गालियाँ दी गईं.''

''यह सब दस मिनट तक निर्बाध चलता रहा. बाद में पहुँची पुलिस ने उन्हें भीड़ से बचाया और होटल के कमरे तक वापस पहुँचाया. डॉक्टरों की एक टीम ने यहाँ उनकी मरहम-पट्टी की. बाद में उन्हें सदर अस्पताल ले जाया गया.''

भाजपा का हमले से इनकार

भारतीय जनता युवा मोर्चा के पाकुड़ ज़िलाध्यक्ष प्रसन्ना मिश्रा ने स्वामी अग्निवेश पर हुए हमले में उनके कार्यकर्ताओं की भागीदारी से इनकार किया है.

प्रसन्ना मिश्रा ने बीबीसी से कहा, "स्वामी अग्निवेश ईसाई मिशनरियों के एजेंट हैं. वे हमारे यहाँ आदिवासियों को बरगलाने आए थे. इसलिए हम उनका लोकतांत्रिक तरीक़े से विरोध कर रहे थे. उनपर हमारे द्वारा हमला करने की बात बेबुनियाद है."

कौन हैं स्वामी अग्निवेश

छत्तीसगढ़ के सक्ति में जन्मे स्वामी अग्निवेश ने कोलकाता से कानून और बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई की है. इसके बाद वे आर्य समाजी हो गए और संन्यास ग्रहण कर लिया. इस दौरान 1968 में उन्होंने आर्य सभा नाम की राजनीतिक पार्टी बनाई.

बाद में साल 1981 में उन्होंने बंधुआ मुक्ति मोर्चा की स्थापना की. वे राजनीति में भी सक्रिय रहे. हरियाणा से विधानसभा चुनाव लड़ा और जीतकर मंत्री बने.

लेकिन, वहाँ मजदूरों पर लाठीचार्ज की एक घटना के बाद उन्होंने मंत्रीपद से इस्तीफ़ा दे दिया और राजनीति को अलविदा कह दिया. उनपर सलवा जुडूम से जुड़े लोगों ने भी बस्तर में हमला किया था. तब उन्हें वहाँ से भागना पड़ा था.

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