पाकिस्तान: इन्हें विरासत में मिली सियासत

  • 23 जुलाई 2018
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पाकिस्तान में सामाजिक-राजनीतिक उथल-पुथल का दौर रहा, लेकिन यहाँ कुछ मज़बूत परिवार ऐसे हैं जिन्होंने बीते सात दशकों से पाकिस्तान की राजनीति में प्रभुत्व बनाए रखा है.

पाकिस्तान के एक निजी टीवी चैनल 'दुनिया न्यूज़' ने 29 जून को एक रिपोर्ट चलाई थी, जिसके मुताबिक, "पाकिस्तान में चुनावी राजनीति काफ़ी हद तक एक पारिवारिक धंधा बनकर रह गई है."

इस बार के आम चुनाव भी पहले से अलग नहीं हैं. कई नामी राजनीतिक दिग्गजों के बच्चे इस बार चुनावी मैदान में हैं.

आइये, उनमें से शीर्ष पाँच के बारे में आपको बताते हैं:

बिलावल भुट्टो ज़रदारी

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बिलावल का ताल्लुक पाकिस्तान के सबसे शक्तिशाली राजनीतिक परिवार से है.

वो तीन सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं. दो सिंध प्रांत की और एक ख़ैबर पख्तूनख़्वा प्रांत की सीट है. ये पहली बार है जब बिलावल आम चुनाव में खड़े हुए हैं.

उनके राजनीतिक करियर की बात करें तो उन्होंने साल 2016 में एकमात्र संसदीय उप-चुनाव जीता है.

बिलावल के माता-पिता, दोनों ही पाकिस्तान के सबसे बड़े पदों पर रह चुके हैं. उनकी माँ बेनज़ीर भुट्टो को दो बार प्रधानमंत्री के तौर पर चुना गया, जबकि उनके पिता आसिफ़ अली ज़रदारी साल 2008 से 2013 के बीच पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे.

बेहद कम उम्र में ही बिलावल का परिचय राजनीति से करा दिया गया था. वो महज़ 19 साल के थे जब मां की हत्या के बाद 2007 में उन्हें पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) का अध्यक्ष बनाया गया.

साल 2013 में उन्हें तालिबान के हमले के डर से चुनावों में नहीं उतरने दिया गया था. लेकिन इस बार वो पीपीपी के चुनाव अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं.

वो तालिबान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई के पक्षधर हैं. इस मुद्दे पर वो काफ़ी मुखर भी रहे हैं.

मरियम नवाज़ शरीफ़

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नवाज़ शरीफ़ की बेटी मरियम पहली बार पाकिस्तान के आम चुनाव में उम्मीदवार होने वाली थीं.

लेकिन भ्रष्टाचार के एक मामले में कोर्ट के फ़ैसले ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ठहरा दिया और उनका पर्चा रद्द हो गया.

बावजूद इसके मरियम नवाज़ पाकिस्तान में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक शख़्सियत हैं. भविष्य में मरियम को ही पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जाता है.

साल 2017 में भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने नवाज़ शरीफ़ को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था.

साल 2011 में मरियम नवाज़ ने मुख्यधारा की राजनीति में प्रवेश किया था. 2013 में उन्हें प्रधानमंत्री के युवा कार्यक्रम के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था.

पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) में उनकी सक्रिय भूमिका रही है. मरियम को एक मुखर नेता माना जाता है. हाल ही में उन्होंने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी इमरान खान के ख़िलाफ़ कई तल्ख़ बयान दिये थे.

नवाज़ शरीफ़ के क़रीबी दोस्त समझे जाने वाले चौधरी निसार अली ख़ान ने मार्च, 2018 में 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' अख़बार को दिये इंटरव्यू में कहा था कि मरियम की तीख़ी ज़बान, पार्टी के लिए परेशानी का कारण बन सकती है.

बहरहाल, पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के मौजूदा अध्यक्ष शाहबाज़ शरीफ़ मानते हैं कि नवाज़ शरीफ़ और मरियम नवाज़ का भ्रष्टाचार के केस में आरोपी पाया जाना और भी अधिक मतदाताओं को आकर्षित करने में उनकी मदद कर सकता है.

हमज़ा शाहबाज़

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नवाज़ शरीफ़ परिवार के ही एक अन्य सदस्य हैं हमज़ा शाहबाज़ जो इस बार चुनाव मैदान में हैं.

हमज़ा के पिता शाहबाज़, नवाज़ शरीफ़ के छोटे भाई हैं और इस वक़्त पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के अध्यक्ष पद पर भी हैं.

हमज़ा पहली बार चुनाव नहीं लड़ रहे. साल 2013 में उन्होंने लाहौर की एक सीट से चुनाव लड़ा था और वो भारी बहुमत से जीते थे.

इस बार भी वो लाहौर की एक सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. लाहौर पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) की मज़बूत पकड़ वाला इलाक़ा माना जाता है.

लाहौर में 14 निर्वाचन क्षेत्र हैं जहाँ क़रीब 160 मज़बूत दावेदार चुनाव मैदान में हैं.

शरीफ़ परिवार लंबे वक़्त से पाकिस्तान का शक्तिशाली और अमीर उद्योगपति परिवार रहा है.

अंग्रेज़ी के दैनिक अख़बार 'द न्यूज़ इंटरनेशनल' ने अप्रैल, 2011 में एक रिपोर्ट छापी थी. इसमें कहा गया था कि हमज़ा पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पशु आहार की सप्लाई करने वाले सबसे बड़े व्यापारी हैं.

अख़बार के अनुसार, हमज़ा के पास 4110 करोड़ पाकिस्तानी रुपये की संपत्ति है.

पनामा पेपर लीक की ख़बरों के बाद पाकिस्तान के स्थानीय मीडिया में ऐसी ख़बरें आई थीं कि शरीफ़ परिवार में धीरे-धीरे दरार पैदा हो रही हैं. लेकिन हमज़ा शाहबाज़ ने उन रिपोर्टों का खंडन किया था.

तलहा सईद

पाकिस्तान के चुनाव आयोग से मंज़ूरी मिलने के बाद इस्लामी कट्टरपंथी तलहा सईद भी चुनाव लड़ रहे हैं. ये उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत है.

डॉन अख़बार के मुताबिक़, सईद पाकिस्तान के सबसे बड़े पंजाब प्रांत से चुनाव लड़ रहे हैं. वो एक नये और बेहद कम चर्चित अल्लाह-ओ-अक़बर तहरीक़ पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हैं.

उनके पिता हाफ़िज़ सईद ने कश्मीर में भारतीय नियंत्रण के ख़िलाफ़ लड़ रहे सबसे कुख़्यात समूहों में से एक जमात-उद-दावा और इसके चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की स्थापना की थी.

भारत सरकार चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और हाफ़िज़ सईद को साल 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड मानती है. इस हमले में 174 लोगों की मौत हुई थी.

अमरीका ने सईद और उनके पिता को आतंकवादी घोषित किया हुआ है.

ऐमाल वली ख़ान

अवामी नेशनल पार्टी (एएनपी) के बैनर तले ऐमाल वली पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं.

ऐमाल अनुभवी राजनेता और एएनपी के चीफ़ असफंद्यार वली ख़ान के बेटे हैं. ख़ैबर पख्तूनख़्वा प्रांत को एएनपी का गढ़ माना जाता है.

ख़ैबर पख्तूनख़्वा में ऐमाल वली ख़ान की उम्मीदवारी कोई अपवाद नहीं है.

जुलाई 2018 में छपी डॉन अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, ख़ैबर पख्तूनख़्वा प्रांत के सबसे शक्तिशाली परिवारों ने या तो अपने बच्चों को चुनावी मैदान में उतारा है या वो ख़ुद कई निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ रहे हैं.

एएनपी, पाकिस्तानी तालिबान की एक गंभीर आलोचक रही है. पार्टी ने तालिबान के हमलों में अपने कई सदस्यों को खोया है.

10 जुलाई को पार्टी के प्रमुख सदस्य हारून बिलौर की तालिबान ने हत्या कर दी थी.

माना जा रहा है कि एएनपी के लिए इमरान ख़ान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक़-ए-इंसाफ़ इस चुनाव में सबसे बड़ी चुनौती होगी.

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