वॉशिंगटन डायरी: 'गोरे पुलिस अधिकारी हम कालों को इंसान ही नहीं समझते'

  • 22 जुलाई 2018
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भारत और पाकिस्तान की राजनीति में जिस तरह से जाति और पंथ का रंग देखने को मिलता है, वही हाल अमरीका में नस्लभेद का है. मेरे वॉशिंगटन लौटने से एक दिन पहले 35 वर्षीय अफ़्रीकी-अमरीकी हेरिथ ऑगस्टस को शिकागो पुलिस ने गोली मार दी थी.

ओहेयर अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट की ओर जाते समय शिकागो की सड़कों पर गुस्सा और बेचैनी साफ़ देखी जा सकती थी. इस डायरी को लिखे जाते समय तक सड़कों पर 200 प्रदर्शनकारी अपना विरोध दर्ज करा रहे थे.

शिकागो पुलिस विभाग ने बल प्रयोग कर इस प्रदर्शन को समाप्त करने की कोशिश की और इसमें ख़ासतौर पर काला समुदाय निशाने पर था.

2014 में लेक्वन मेकडॉनल्ड्स की हत्या की ख़बर आने के बाद शहर पहले ही दहल चुका है.

17 वर्षीय एक निहत्थे किशोर को पुलिस ने 16 गोलियां मारी थीं और यह सब वीडियो में भी दर्ज हुआ था.

न्याय विभाग ने घटना की जांच के बाद कहा कि पुलिस का रवैया ग़लत था. इसके बाद सुपरिटेंडेंट गैरी मैक्कार्थी को हटा दिया गया.

हेरिथ के मारे जाने के बाद अफ़्रीकी-अमरीकी लोगों के उत्पीड़न का मामला फिर से ताज़ा हो गया है और शिकागो की जनसांख्यिकी की जड़ों में यह मुद्दा हाल तक शांत रहा है.

2014 की शूटिंग में पुलिस अफ़सर के शामिल होने की घटना पर शिकागो की अदालत में मामला चलना था. इस कारण हेरिथ की हत्या से पहले ही नस्लभेदी मुद्दे को लेकर माहौल तनावपूर्ण था.

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'हम कितना भी चिल्ला लें, हमें कोई नहीं सुनता'

मुझे एयरपोर्ट छोड़ने जा रहे मेरे ड्राइवर जेम्स निराशा से भरे हुए थे. प्रदर्शन के कारण हुए ट्रैफ़िक जाम की उन्हें चिंता थी. इसके बाद उन्होंने मुझसे कहा कि वह मुझे छोड़ने के बाद इस प्रदर्शन में शामिल होंगे. वह कहते हैं, "इसका कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि हम कितना भी चिल्ला लें."

बड़ी निराशा के साथ अफ़्रीकी-अमरीकी जेम्स कहते हैं, "पुलिस की ज़्यादती के हर बार हम ही शिकार क्यों होते हैं? मैं किसी के ख़िलाफ़ हिंसा का समर्थन नहीं करता हूं लेकिन कुछ गोरे पुलिस अधिकारी हमें इंसान ही नहीं समझते हैं."

42 साल के जेम्स ने मुझे अपने तीन बच्चों की तस्वीर दिखाई. केन्या से जब वह अपने माता-पिता के साथ यहां आए तो उनकी उम्र तब केवल दो वर्ष थी. पिता बनने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि उन्हें अपनी आवाज़ उठानी चाहिए और उन्होंने अपना असंतोष हर मंच पर उठाया.

मेक्डॉनल्ड्स शूटिंग की घटना का ज़िक्र करते हुए वह कहते हैं, "आप देख सकते हैं कि पुलिस अफ़सर ने बिना किसी कारण के गोली मारी."

वह कहते हैं, "चौथे साल में मुकदमा जारी है और काले लोगों के मामले में न्याय मिलने में देरी होती है. यहां तक की काले राष्ट्रपति ओबामा बंदूक़ हिंसा के ख़िलाफ़ सुरक्षा उपाय नहीं लागू कर सके तो ट्रंप से इसकी उम्मीद करना व्यर्थ है."

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लेकिन बंदूक़ चाहने वाले लोग भी

विमान में बैठने के दौरान जेम्स की बात मेरे दिमाग़ में घूम रही थी. इसी दौरान एक गोरे जॉर्जियाई मूल के 55 वर्षीय टेलर मेरी बगल वाली सीट पर आकर बैठक गए. वह ट्रंप के कट्टर समर्थक थे. जब मैंने बंदूक़ नियंत्रण की कुछ संभावनाओं के बारे में बात की तो टेलर के अपने तर्क थे.

टेलर कहते हैं, "हमारा गांव एक छोटा सा समुदाय है जहां निशानेबाज़ी मशहूर खेल है."

"अगर वे हमारी बंदूक़ें हमसे छीन लेते हैं तो हमारे पास क्या बचेगा? अगर कोई चोर हमारे घर में घुस जाएगा तो हम क्या करेंगे? कम से कम बंदूक़ से हमारे पास एक मौक़ा तो होता है."

टेलर की जेम्स के साथ सहानुभूति है लेकिन इन मामलों में वह पुलिस का समर्थन करने में कोई हिचकिचाहट नहीं बरतते.

इन सबके बीच मैंने टेलर से बातें ख़त्म कर वॉशिंगटन पहुंचने से पहले एक नींद ली. शुक्र है कि यह केवल दो घंटे की हवाई यात्रा थी. मेरी और टेलर की यात्रा समाप्त हुई. वह अपनी दोस्त की बेटी की शादी में शामिल होने के लिए आए थे.

टेलर को मैंने उस युवती के लिए शुभकामनाएं दीं और सोचा कि अमरीका में नस्लभेद की दरारें कितनी गहरी हैं और कोई इसमें मदद नहीं कर सकता लेकिन देखना होगा कि आने वाले मध्यावधि चुनावों में इसका क्या असर होगा.

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