नवाज़ शरीफ़: जेल में पढ़ने को एक अख़बार और देखने को दो चैनल

  • 22 जुलाई 2018
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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को रावलपिंडी की अडियाला जेल में 'बी' क्लास की सुविधाएं तो दी गई हैं, लेकिन उनको वैसी कुछ मामूली सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं जो वह चाहते हैं.

भ्रष्टाचार मामले में दोषी क़रार दिए जाने के बाद जेल में बंद नवाज़ शरीफ़ ने यह शिकायत अपने उन चंद क़रीबी लोगों के साथ की है जिन्होंने बीते दिनों में उनसे मुलाक़ात की है.

नवाज़ शरीफ़, उनकी बेटी मरियम नवाज़ और दामाद रिटायर्ड कैप्टन मोहम्मद सफ़दर को एक ही जेल में तो रखा गया है लेकिन उन्हें एक-दूसरे को संदेश देने की कोई अनुमति नहीं है.

अडियाला जेल के एक अधिकारी ने नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर बीबीसी को बताया कि नवाज़ शरीफ़ ने कई बार जेल के अधिकारियों से कुछ लिखने के लिए काग़ज़ और क़लम मांगी है लेकिन जेल के अधिकारियों ने ये सामग्री उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया है.

अधिकारियों के मुताबिक़, डिप्टी सुपरिटेंडेंट स्तर के दो अफ़सरों ने इस बारे में नवाज़ शरीफ़ से मुलाक़ात भी की है और कहा है कि उनको विशेषाधिकार होने के बावजूद उन्हें काग़ज़ और क़लम नहीं दी जा सकती है.

इससे पहले, पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी, जावेद हाशमी और शेख़ रशीद को जब विभिन्न अदालतों की तरफ़ से सज़ा सुनाई गई थी तो उन्होंने उस दौरान किताबें भी लिखीं और काग़ज़-क़लम एवं अन्य सामग्रियां जेल प्रशासन से ही मिले थे.

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अधिकारियों पर रखी जा रही नज़र

अडियाला जेल के अधिकारी का कहना था कि जेल के आला अधिकारी के साथ काम करने वाले अर्दलियों को भी बदल दिया गया है जबकि जेल अधिकारियों के आवागमन के अलावा उनके मोबाइल फ़ोन पर भी नज़र रखी जा रही है. इसका मक़सद ये जानना है कि वे ड्यूटी ख़त्म होने के बाद किससे मिलते हैं और किससे टेलिफ़ोन पर बात करते हैं.

अधिकारी के मुताबिक़, पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ और उनकी बेटी मरियम नवाज़ को पेशकश की गई थी कि उन्हें सहाला रेस्ट हाउस में स्थानांतरित कर दिया जाए लेकिन उन्होंने इस पेशकश को ठुकरा दिया था और कहा था कि वे जहां भी रहेंगे एक साथ रहेंगे.

अधिकारी के मुताबिक़, 'बी' क्लास की सुविधाएं किसी हद तक पूर्व प्रधानमंत्री को मुहैया कराई गई हैं जबकि मरियम नवाज़ और उनके पति रिटायर्ड कैप्टन सफ़दर को ये सुविधाएं नहीं दी गई हैं.

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Image caption रिटायर्ड कैप्टन मोहम्मद सफ़दर

ख़राब कल टीवी दिया देखने को

अधिकारी का कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री को एक अख़बार भी रोज़ाना दिया जाता है. हालांकि, जेल प्रशासन को यह अधिकार है कि वह कौन-सा अख़बार नवाज़ शरीफ़ को पढ़ने के लिए देते हैं.

नवाज़ शरीफ़ से मुलाक़ात करके आने वाली वकीलों की टीम में शामिल एक वकील ने बीबीसी को बताया कि जब शनिवार के रोज़ उनकी नवाज़ शरीफ़ से मुलाक़ात हुई तो उन्होंने बताया कि जेल प्रशासन ने उन्हें एक टीवी दिया है जो कहने को तो कलर टीवी है लेकिन इसके रंगों का पता नहीं चलता और न ही वहां पर कोई चैनल आता है.

उस वकील के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री ने जब जेल के अधिकारियों से कहा कि टीवी पर कुछ नज़र नहीं आ रहा है तो टीवी की ट्यूनिंग की गई जिसके बाद सिर्फ़ दो चैनल ही आए जिनमें से एक पीटीवी होम और दूसरा पीटीवी स्पोर्ट्स था.

उनके मुताबिक़, नवाज़ शरीफ़ ने जब जेल के अधिकारियों से पूछा कि कोई और चैनल भी है जिस पर अधिकारियों का कहना था कि 'सर सिर्फ़ पीटीवी होम और पीटीवी स्पोर्ट्स की इजाज़त है.'

पूर्व प्रधानमंत्री का कहना है कि इस टीवी की स्क्रीन इतनी ख़राब है कि इससे आंखें प्रभावित होती हैं.

पीटीवी होम पर ड्रामे और खाना बनाने के कार्यक्रमों के अलावा कुछ धार्मिक कार्यक्रम दिखाए जाते हैं.

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Image caption अडियाला जेल

नवाज़ शरीफ़ के वकील ख़्वाजा हारिस ने दावा किया है कि अगर इस्लामाबाद हाईकोर्ट की तरफ़ से पूर्व प्रधानमंत्री, उनकी बेटी मरियम नवाज़ और दामाद रिटायर्ड कैप्टन मोहम्मद सफ़दर के ख़िलाफ़ अकाउंटेबिलिटी कोर्ट के फ़ैसलों के ख़िलाफ़ अपील 25 जुलाई से पहले सुनवाई के लिए तय की जाती तो कार्यकारी सरकार कभी भी दोषियों के ख़िलाफ़ अकाउंटेबिलिटी कोर्ट की कार्रवाई अडियाला जेल में करने का नोटिफ़िकेशन वापस न लेती.

उन्होंने कहा कि कार्यकारी सरकार का ये बयान हास्यास्पद है जिसमें वह कहते हैं कि उन्होंने आर्टिकल 10 ए को सामने रखते हुए नवाज़ शरीफ़ के ख़िलाफ़ अन्य मामलों की सुनवाई खुली अदालत में करने का फ़ैसला किया है.

ख़्वाजा हारिस का कहना था कि फ़ेयर ट्रायल से संबंधित आर्टिकल संविधान का उस वक़्त भी हिस्सा था जब पूर्व प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ दो अन्य मामले अडियाला जेल में करने का नोटिफ़िकेशन जारी किया गया था.

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