पाकिस्तान में चुनाव आज, क्या कमान होगी कप्तान के हाथ में?

  • 25 जुलाई 2018
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पाकिस्तानी बुधवार को संसदीय चुनावों के लिए मतदान करेंगे. पाकिस्तान में चुनाव अभियान हिंसा और नतीजों को प्रभावित करने के प्रयासों से जुड़ी चिंताओं से घिरा रहा है.

पाकिस्तान की संसद को चुनने के लिए हो रहे चुनाव में वोट डालने के लिए लगभग दस करोड़ साठ लाख मतदाता पंजीकृत हैं.

पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेट कप्तान इमरान ख़ान की तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) से सत्ता छीनने की उम्मीद लगाए है.

इस बीच, मानवाधिकार आयोग का कहना है कि पाकिस्तान में चुनावों को प्रभावित करने के प्रयास खुलेआम हुए हैं.

मतदान आठ बजे से शुरू होगा. बैलट पेपरों और मतदाताओं की सुरक्षा के लिए लाखों सैनिक तैनात रहेंगे.

पाकिस्तान की 272 संसदीय सीटों के लिए सीधे चुनाव हो रहे हैं. 70 सीटें महिलाओं और अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित हैं, इन्हें पांच फ़ीसदी से अधिक वोट पाने वाली पार्टियों में बांटा जाता है.

पाकिस्तान में 2013 में हुए चुनावों में 55 प्रतिशत मतदान हुआ था. नवाज़ शरीफ़ की पार्टी ने जीत तो हासिल की थी लेकिन स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं कर सकी थी.

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आती-जाती रही हैं सरकारें

पाकिस्तान के 71 साल के इतिहास में लोकतांत्रिक और सैन्य सरकारें आती-जाती रही हैं.

ये चुनाव इसलिए भी महत्पूर्ण हैं क्योंकि ये दूसरी बार हो रहा है जब एक लोकतांत्रिक नागरिक सरकार अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद दूसरी लोकतांत्रिक नागरिक सरकार को सत्ता सौंपने जा रही है.

लेकिन पाकिस्तान में चुनाव अभियान विवादों से घिरा रहा है.

नवाज़ शरीफ़ की पार्टी का कहना है कि देश की ताक़तवर सेना उसे हराने के लिए काम कर रही है और इमरान ख़ान और उनकी पार्टी का समर्थन कर रही है. पीएमएल (एन) का कहना है कि अदालतें भी उसके ख़िलाफ़ हैं.

रविवार को इस्लामाबाद के हाई कोर्ट के एक जज ने इन आरोपों का समर्थन करते हुए कहा है कि सेना की ख़ुफ़िया सेवा आईएसआई न्याय व्यवस्था में दख़ल दे रही है.

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पीएमएल (एन) के कई उम्मीदवारों ने आरोप लगाया है कि उन पर पार्टी छोड़ने और पीटीआई में शामिल होने का दबाव बनाया गया.

पार्टी के 17 हज़ार से अधिक कार्यकर्ताओं पर चुनाव नियमों का उल्लंघन करने के आरोपों में मुक़दमे भी दर्ज किए गए हैं. हालांकि आरोप स्पष्ट नहीं किए गए हैं.

पाकिस्तान की सेना चुनावों में किसी भी तरह के दख़ल के आरोपों को नकारती है.

हालांकि स्वतंत्र मीडिया समूहों का कहना है कि चुनावों को प्रभावित करने के प्रयास खुलेआम हो रहे हैं.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चरमपंथी घोषित लोगों के चुनावों में हिस्सा लेने पर भी सवाल उठ रहे हैं.

इन्हीं वजहों से देश के मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि चुनावों की निष्पक्षपता पर शक़ करने के पर्याप्त कारण हैं.

क्या इमरान ख़ान का समय आ गया है?

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बुधवार को जब मतदान शुरू होगा तो सबके दिमाग़ में एक ही प्रश्न होगा कि क्या इमरान ख़ान देश के अगले प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं.

इमरान ख़ान ने साल 1990 के दशक में राजनीति में क़दम रखा था. उस दौर में पाकिस्तान के क्रिकेट विश्व कप जीतने की यादें ताज़ा थीं.

लेकिन उनकी पार्टी को एक राजनीति शक़्ति बनने में लंबा वक़्त लगा और 2013 के चुनावों में ही उन्हें गंभीरता से लिया गया.

इस समय इमरान ख़ान भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ बदलाव की एक सशक्त आवाज़ के तौर पर उभरे.

2013 के चुनावों में इमरान ख़ान की पार्टी की बुरी हार हुई. लेकिन इसके बाद से उन्होंने लंबा और विभाजनकारी राजनीतिक अभियान चलाया.

इन चुनावों में इमरान ख़ान प्रधानमंत्री पद के क़रीब पहुंचते नज़र आ रहे हैं. लेकिन क्या ये हो पाएगा?

या पाकिस्तान के लोग जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की पार्टी को सहानुभूति वोट देकर जिता देंगे?

नवाज़ शरीफ़ को पद से हटाने में भी इमरान ख़ान और उनकी पार्टी की अहम भूमिका रही है.

कौन है मुख्य दावेदार?

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इस बार चुनावों को पीएमएल-एन और पीटीआई के बीच ही माना जा रहा है.

तीन बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे नवाज़ शरीफ़ भ्रष्टाचार निरोधक अदालत में दोषी ठहराए जाने के बाद से जेल में बंद हैं. बीते साल सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें पद से हटाते हुए चुनाव लड़ने के अयोग्य कर दिया था. नवाज़ शरीफ़ और उनके परिवार की क़ानूनी मुसबीतें पनामा पेपर्स में नाम आने के बाद से शुरू हुईं.

अदालत में दोषी ठहराए जाने के बाद नवाज़ शरीफ़ अपनी बेटी मरियम नवाज़ के साथ लंदन से देश लौटे और गिरफ़्तार हुए.

पंजाब प्रांत के पूर्व मुख्यमंत्री और नवाज़ शरीफ़ के भाई शाहबाज़ शरीफ़ के हाथों में इस समय पार्टी की कमान है. बीते सप्ताह बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा था कि उनके विरोधी चुनाव हार जाएंगे क्योंकि जनता उन्हें उनके काम के आधार पर वोट देगी.

वहीं पाकिस्तान में विपक्ष के सबसे बड़े नेता के तौर पर उभरे इमरान ख़ान भी सेना से सहयोग लेने के आरोपों को नकारते रहे हैं. इमरान ख़ान ने देश में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ एक लहर पैदा करने और फिर उस लहर पर सवार हो सत्ता तक पहुंचने की कोशिशें की हैं.

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विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता तक पहुंचने के लिए इमरान ख़ान को पंजाब प्रांत में भी अपनी जगह बनानी होगी जो करना उनके लिए बहुत आसान नहीं लग रहा है. पंजाब हमेशा से ही पीएमएल (एन) का गढ़ रहा है.

वहीं माना जा रहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्ज़ पार्टी इन चुनावों में तीसरे नंबर पर रह सकती है.

पार्टी की कमान इस समय भुट्टो के 29 वर्षीय बेटे बिलावल भुट्टो के हाथ में है. ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी में पढ़े बिलावल भुट्टो एक शांतीपूर्ण और तरक्कीपरस्त पाकिस्तान बनाने के वादे पर वोट मांग रहे हैं.

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